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BJP President: ब्राह्मण अध्यक्ष बनाने पर RSS का जोर? लखनऊ से नागपुर तक इन 3 समीकरणों को साधने की तैयारी

BJP President: बीजेपी के नए अध्यक्ष के चुनाव में जितनी देरी हो रही है, उतना ही अटकलों का बाजार भी गर्म हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि श्राद्ध पक्ष खत्म होने के बाद नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान होगा। इस बार अध्यक्ष चुनने में हो रही देरी के पीछे मुख्य वजह आरएसएस की ओर से दिए गए अहम सुझाव भी माने जा रहे हैं। बीजेपी और संघ दोनों का मानना है कि इस महत्वपूर्ण पद के लिए जिस भी राजनीतिक हस्ती का चयन हो, वह संवाद और संगठन दोनों में कुशल हो।

सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि संघ की प्राथमिकता है कि एक बार फिर बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी ब्राह्मण जाति से आने वाले कद्दावर नेता को ही सौंपा जाएगा। संघ की राजनीति के जानकारों का कहना है कि इसके पीछे एक साथ कई समीकरणों को साधने की कोशिश है।

BJP President

BJP President के चुनाव में जाति का समीकरण

संघ और बीजेपी की राजनीति को बारीकी से परखने वाले विश्लेषकों का भी मानना है कि अध्यक्ष का पद महज पार्टी और संगठन के कामों तक सीमित नहीं है। इसका असर मतदाताओं और कोर समर्थकों तक दूरगामी संदेश देने के लिए भी दिया जा सकता है। बीजेपी के नए अध्यक्ष के लिए कई नाम रेस में हैं। इसमें ओबीसी वर्ग से आने वाले शिवराज सिंह चौहान से लेकर भूमिहार ब्राह्मण मनोज सिन्हा, ब्राह्मण सुधांशु त्रिवेदी समेत कई नाम चल रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि संघ ने ब्राह्मण चेहरे पर कई वजहों से जोर दिया है।

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Uttar Pradesh चुनाव को ध्यान में रखकर बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी का मकसद अपने कोर ब्राह्मण वोटरों को संदेश देना है कि पार्टी शीर्ष नेतृत्व में उनकी भागीदारी अहम है। प्रदेश की राजनीति में आज भी ब्राह्मण एक प्रमुख और कद्दावर समुदाय है। इसके अलावा, बीजेपी के कोर समर्थकों की बात करें तो लंबे समय तक भगवा पार्टी को ब्राह्मण-बनिया पार्टी कहा गया है। पिछले कुछ चुनाव के बाद ब्राह्मणों में नाराजगी के भी दावे किए जा रहे हैं। अब संघ की कोशिश है कि उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले ब्राह्मण अध्यक्ष का दांव चला जा सकता है।

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लखनऊ से नागपुर तक समीकरण साधने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में बीजेपी को फिर से जीत दिलाने के अलावा संघ के कार्यकर्ताओं तक को साधने के लिहाज से ब्राह्मण चेहरा अहम है। पार्टी दक्षिण भारत में अपने पैर फैलाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। इसके लिए तमिलनाडु से लेकर आंध्र प्रदेश तक प्रदेश में जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश पदाधिकारियों का चुनाव किया गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर एक ब्राह्मण चेहरे को स्थापित करके पार्टी बड़ा संदेश दे सकती है।

दलित-ओबीसी समीकरणों पर भी नजर

बीजेपी के पास ओबीसी समुदाय से आने वाले शिवराज सिंह चौहान जैसा चेहरा है, जिनका नाम अध्यक्ष के लिए रेस में है। हालांकि, संघ और पार्टी दोनों ही इस बात को समझते हैं कि ओबीसी और दलित वर्ग से मिलने वाले वोट भी पार्टी को चुनावी संग्राम में बड़ी जीत तय कर सकते हैं। इसे देखते हुए किसी ओबीसी चेहरे को चुने जाने पर विपक्षियों को ओबीसी बनाम दलित या ओबीसी बनाम ओबीसी के समीकरणों को उलझाने की कोशिश हो सकती है। ऐसे में एक ब्राह्मण चेहरा सबको साथ लेकर चलने के लिहाज से समावेशी कदम साबित हो सकता है।

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