BJP President: भाजपा अध्यक्ष की रेस से बाहर हुए ये 2 बड़े नेता! आखिर किसको बनाएगी BJP अपना चीफ?
BJP President Election: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम है। जेपी नड्डा के कार्यकाल को पहले ही बढ़ाया जा चुका है, लेकिन अब सवाल उठने लगा है कि पार्टी आखिर कब नया अध्यक्ष चुनेगी और इस पद पर किसे मौका मिलेगा। राजनीतिक हलकों में नामों की लंबी लिस्ट चल रही है, लेकिन अब चर्चा यह भी है कि दो दिग्गज चेहरे अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हो सकते हैं।
कौन हो सकते हैं भाजपा अध्यक्ष की रेस से बाहर?
सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव अध्यक्ष पद की रेस से पीछे हो सकते हैं। वजह है उन्हें हाल ही में पार्टी की चुनावी जिम्मेदारियां सौंपा जाना। धर्मेंद्र प्रधान को बिहार विधानसभा चुनाव का प्रभारी बनाया गया है। भूपेंद्र यादव को पश्चिम बंगाल चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

चूंकि बिहार और बंगाल, दोनों ही राज्यों में आने वाले विधानसभा चुनाव बेहद अहम माने जा रहे हैं, ऐसे में यह माना जा रहा है कि इन दोनों नेताओं धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव पर पार्टी संगठनात्मक जिम्मेदारी से ज्यादा चुनावी रणनीति पर ध्यान देना चाहती है। यही कारण है कि दोनों को अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर माना जा रहा है।
🔵 BJP chief: किन नामों पर टिक सकती है नजर?
अब सवाल यह है कि अगर ये दोनों नाम रेस से बाहर हो गए तो बीजेपी किस पर दांव खेलेगी? चर्चा में जो नाम सबसे आगे हैं, उनमें शामिल हैं,
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान , केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, मनोहर लाल खट्टर (पूर्व मुख्यमंत्री, हरियाणा) और ओम माथुर (अनुभवी संगठन नेता) जैसे नेता।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का नाम भी लगातार सुर्खियों में रहा है। हालांकि उन्होंने खुद यह कहकर सस्पेंस बढ़ा दिया कि वे अगले पांच साल तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। इसके बावजूद संगठन के भीतर उन्हें लेकर चर्चाएं थमी नहीं हैं।
🔵 क्यों खिंच रही है भाजपा अध्यक्ष चुनाव की तारीख?
बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव कब होगा, इस पर फिलहाल स्थिति साफ नहीं है। पार्टी के भीतर से संकेत मिल रहे हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद ही इस दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा जनवरी 2020 से इस पद पर हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उनके कार्यकाल को बढ़ाया गया था।
दिलचस्प बात यह है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में बयान दिया कि आरएसएस, बीजेपी के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देता। इसे राजनीतिक हलकों में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी को अध्यक्ष चुनाव टालने का "लाइसेंस" माना जा रहा है।

🔵 संघ और मोदी-शाह की 'स्ट्रेटेजी'
बीजेपी और आरएसएस के बीच नए अध्यक्ष को लेकर खींचतान की खबरें समय-समय पर सामने आती रही हैं। माना जा रहा है कि मोदी-शाह की जोड़ी चाहती है कि पार्टी अध्यक्ष उनकी पसंद का हो और संगठन के फैसले पर उनका सीधा कंट्रोल रहे। संघ हालांकि अपनी राय रखता है, लेकिन इस बार ऐसा लग रहा है कि उसे दरकिनार किया जा रहा है।
मोहन भागवत का हालिया बयान-"बीजेपी अपने अध्यक्ष का चुनाव अपने हिसाब से कर सकती है"-इसी खींचतान का इशारा देता है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि मोदी-शाह की रणनीति यही है कि संघ को इतना इंतजार कराया जाए कि आखिरकार वह उनकी पसंद पर मुहर लगाने के लिए मजबूर हो जाए।
🔵 जेपी नड्डा का 'सुपर पावरफुल' कार्यकाल
जेपी नड्डा इस वक्त पार्टी में सबसे पावरफुल नेताओं में गिने जा रहे हैं। एक ओर वे बीजेपी अध्यक्ष हैं, तो दूसरी तरफ मोदी सरकार में स्वास्थ्य, रसायन और उर्वरक मंत्रालय भी संभाल रहे हैं। यही नहीं, वे राज्यसभा में सदन के नेता की भूमिका भी निभा रहे हैं। यानी एक ही समय में उनके पास तीन-तीन बड़े पद हैं।
पार्टी की परंपरा रही है कि "वन मैन, वन पोस्ट" यानी एक व्यक्ति एक पद, लेकिन नड्डा इस परंपरा को तोड़ते नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि उन्हें मौजूदा दौर का 'लकी अध्यक्ष' कहा जा रहा है।
बीजेपी अध्यक्ष की कुर्सी पर किसका ताज रखा जाएगा, इस पर अभी सस्पेंस बरकरार है। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव जैसे दिग्गज नेता इस रेस से बाहर हो गए हैं। अब देखना होगा कि पार्टी अपने अध्यक्ष पद के लिए शिवराज सिंह चौहान, नितिन गडकरी या किसी अन्य नाम पर भरोसा जताती है या फिर अचानक कोई नया चेहरा सामने लाती है।












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