एक चेहरा जिसने मोदी के लिए बनाया CM से PM तक का रास्ता

मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाए जाने का सार्वजनिक ऐलान पहली बार उत्तराखंड में ही हुआ था। हरिद्वार में बाबा रामदेव के पतंजलि परिसर में 26 अप्रैल 2013 को देशभर के संतों की मौजूदगी में खुद बाबा ने मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बताया। इस समारोह के करीब पांच माह बाद भाजपा ने उनकी पीएम पद की उम्मीदवारी की घोषणा की।
यहां हुआ था 'पीएम' पद का पहला एनाउंस -
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पतंजलि योगपीठ में आचार्यकुलम शिक्षण संस्थान के उद्घाटन के मौके पर मोदी बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इसमें देश के कई प्रमुख संत भी मौजूद थे। इस कार्यक्रम में ही पहली बार बाबा रामदेव ने मोदी को भावी प्रधानमंत्री के तौर पर संतों के समक्ष प्रस्तुत किया था।
बाबा रामदेव ने मोदी को भगवान का वरदान बताते हुए कहा था कि इस संकटग्रस्त देश के लिए एक आशा की किरण बनकर आए हैं। मोदी के राज में देश में चारित्रिक विकास और भ्रष्टाचार खत्म होगा। उसके बाद 9 अगस्त, 13 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बाबा रामदेव ने एक दिन के अनशन में संकल्प लिया था कि जब तक दिल्ली की सरकार नहीं बदलती वे हरिद्वार में अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे।
सच निकली बाबा रामदेव की बात -
इसे संयोग या बाबा रामदेव के मुख से निकली भविष्यवाणी ही कहेंगे कि इसके बाद 13 सितंबर, 2013 को शुक्रवार के दिन भाजपा ने मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया।
नौ माह से योगहठ पर हैं बाबा -
केंद्र में सरकार बदलने का संकल्प लेने के बाद बाबा रामदेव दो बार उत्तराखंड आए। 8 अप्रैल, 14 को उन्होंने हरिद्वार में प्रवेश करने के बाद देवप्रयाग में आपदा पीडित के बच्चों के लिए स्कूल और छात्रावास की बुनियाद रखी। उसके बाद वे चुनाव के दिन 7 मई को हरिद्वार आए।
वहां उन्होंने अपना वोट डाला। बाबा के निकट सहयोगी आचार्य बालकृष्ण ने उन्हें चंडी पुल में दिव्य प्रेम सेवा मिशन के आश्रम में भोजन करवाया। बाबा ने पतंजलि योगपीठ में कदम नहीं रखा। फिलहाल भाजपा के खेमे में जश्न का माहौल है व मंत्रमंडल की जिम्मेदारियां भी तय होने लगी हैं।












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