ये सब हमारे ही लोग हैं, भाजपा सांसद ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद ओम प्रकाश माथुर ने गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर प्रवासी मजदूरों की ओर उनका ध्यान दिलाया है। राजस्थान भाजपा के सीनियर नेता माथुर ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि हजारों किमी पैदल चल रहे ये मजदूर हमारे ही लोग हैं, इनके लिए ट्रांसपोर्ट का इंतजाम किया जाना चाहिए। उन्होंने पीएम केयर फंड से एक हजार करोड़ रुपए इसके लिए जारी करने की मांग की है।

पीएम केयर फंड से हो मजदूरों की वापसी का इंतजाम

पीएम केयर फंड से हो मजदूरों की वापसी का इंतजाम

सांसद ओम प्रकाश माथुर ने गृहमंत्री अमित शाह को लिखी चिट्ठी में कहा है कि पीएम केयर्स फंड से एक हजार करोड़ रुपये जारी किए जाएं। इस पैसे का इस्तेमाल परेशालहाल घरों को लौट रहे प्रवासी मजदूरों को ट्रांसपोर्ट का साधन उपलब्ध कराने और उनके भोजन वगैरह का इंतजाम करने के लिए किया जाए। जिससे वो आराम से अपने घरों तक पहुंच जाएं।

 ये सब हमारे ही लोग हैं

ये सब हमारे ही लोग हैं

अपनी चिट्ठी में माथुर ने शाह को लिखा है, आप इन दिनों मजदूरों की स्थिति को जानते ही होंगे। लगातार टीवी पर और अखबारों में देखने-पढ़ने को मिल रहा है कि कैसे लॉकडाउ के बाद हजारों मजदूर सेकड़ों मील पैदल चल रहे हैं। यह सब लोग हमारे ही हैं। इन्हें जल्द से जल्द राहत देकर घरों को पहुंचाया जाना चाहिए। इसलिए पीएम केयर फंड से एक हजार करोड़ रुपए जारी कर इन मजदूरों के लिए घरों को जाने की सुविधा का इंतजाम किया जाए।

सांसद ओम प्रकाश माथुर ने चिट्ठी में मजदूरों के लिए एक हजार करोड़ की मांग करने के साथ ही सरकार की ओर से हाल ही में घोषित किए गए 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की सराहना भी की है। साथ ही उन्होंने कैंटीन में स्वदेशी वस्तुओं को बेचे जाने के फैसले की भी तारीफ की है।

लगातार पैदल चल रहे हैं लाखों मजदूर

लगातार पैदल चल रहे हैं लाखों मजदूर

बता दें कि 25 मार्च को देश में लॉकडाउन लागू होने के बाद से ही बड़े शहरों से अपने घरों की ओर से मजदूरों का जाना जारी है। दिल्ली, मुंबई, सूरत जैसे शहरों से ये लोग पैदल या साइकिल, रेहडी वगैरह पर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और दूसरे सूबों में अपने गावों को जा रहे हैं। एक तरफ अमानवीय परिस्थितियों में इन लोगों को चलना पड़ रहा है तो वहीं ये लगातार हादसों का शिकार भी हो रहे हैं। अब तक 100 से ज्यादा मजदूर अलग-अलग हादसों में जान गंवा चुके हैं और इससे कहीं ज्यादा घायल हुए हैं। लगातार सड़क हादसों में मजदूरों की जान जाने की खबरें आ रही हैं। वहीं छोटे-छोटे बच्चों और महिलाओं को सैकड़ों मील पैदल चलना पड़ रहा है।

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