BJP विधायकों ने दिखाए योगी सरकार के खिलाफ बागी तेवर, उठ सकता है ब्राह्मणों की हत्याओं का मामला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की कार्यप्रणाली पर अब खुद बीजेपी विधायकों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कोई विधायक खुलेआम बयानबाजी कर रहा है तो कोई ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहा है। कानून और व्यवस्था, भ्रष्टाचार और अन्य मुद्दों पर अपनी खुद की सरकार के खिलाफ विधायकों ने मोर्चा खोल रखा है। 20 अगस्त से शुरू होने जा रहे विधानसभा सत्र में सीएम योगी और उनकी कैबिनेट का भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
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भगवा पार्टी के कई विधायकों ने राज्य सरकार की भ्रष्टाचार से लड़ने की क्षमता पर सवाल उठाए हैं। विधायकों ने लोगों की हो रही हत्याओं और बेलगाम नौकरशाही के रवैए जैसे मामले उठाए हैं। विधायकों ने राज्य में लगातार हो रही ब्राह्मणों की हत्याओं का भी मामला उठाया है। सुल्तानपुर में लंभुआ विधान सभा सीट से BJP विधायक देवमणि द्विवेदी ने यूपी सरकार के कार्यकाल में ब्राह्मणों की हत्या को लेकर प्रश्न पूछने के लिए विधानसभा की प्रक्रिया और संचालन नियमावली 1958 के तहत सूचीबद्ध कराने के लिए प्रपत्र दिया है।
सदन की कार्यवाही के दौरान भाजपा विधायक सवाल पूछना चाहते हैं कि सरकार के 3 वर्षों में कितने ब्राह्मणों की हत्या हुई, कितने हत्यारे पकड़े गए, कितने हत्यारों को पुलिस सज़ा दिलाने में कामयाब हुई? विधायक ने आगे पूछा है कि क्या राज्य सरकार ने ब्राह्मणों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कोई योजना बनाई है या नहीं और क्या सरकार प्राथमिकता के आधार पर ब्राह्मणों को हथियार लाइसेंस प्रदान करेगी।
वहीं हरदोई जिले के गोपामऊ विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी के विधायक श्याम प्रकाश लगातार सोशल मीडिया पर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। सीधी बात और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को घेरने के आरोप में पार्टी द्वारा एक बार इन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जा चुका है। वहीं पीलीभीत के बीजेपी विधायक बाबू राम पासवान ने अपनी सरकार पर ही भ्रष्टाचार का आरोप लगाए हैं। वहीं 26 अप्रैल को उन्होंने सीतापुर विधायक के ऑडियो प्रकरण से आहत होकर राजनीति से संन्यास लेने की इच्छा जताई थी
पिछले साल दिसंबर मे शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा के लोनी गाजियाबाद से विधायक नंद किशोर गुर्जर को अपना पक्ष न रखने देने के मुद्दे को लेकर धरने पर बैठ गए थे। इस दौरान उन्हें सपा और कांग्रेस के सदस्यों ने समर्थन दिया। हंगामा करने के कारण सत्र के पहले दिन की कार्यवाही स्थगित हो गई। गुर्जर ने प्रदेश सरकार पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर विधानसभा सदन में धरना दिया। उन्हें करीब 100 विधायकों का समर्थन मिला था।












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