'49 में तो करियर शुरू होता है', स्मृति ईरानी ने अगला चुनाव लड़ने को लेकर कर डाला बड़ा इशारा
Smriti Irani comeback in politics: छोटे पर्दे की सबसे मशहूर बहू और भाजपा की तेज-तर्रार नेता स्मृति ईरानी जल्द ही "क्योंकि सास कभी भी बहू थी" के दूसरे सीजन में टीवी पर नजर आएंगी। स्मृति के एक्टिंग करियर में वापसी के बाद, ऐसी अटकलें लगाई जा रही कि स्मृति ईरानी राजनीति से संन्यास ले रही हैं। इसी बीच अमेठी की पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार को एक विशेष टीवी इंटरव्यू में अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर खुलकर बात की।
राजनीति से संन्यास लेने पर पूछे गए सवाल पर भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने खुलकर जवाब दिया और राजनीति ही नहीं चुनावी कमबैक को लेकर बड़ा संकेत दे डाला है।

'49 में तो करियर शुरू होता है'
स्मृति ईरानी ने कहा "49 साल की उम्र में कौन संन्यास लेता है? इस उम्र में तो कई लोगों का करियर शुरू होता है। मैं तो तीन बार सांसद रह चुकी हूं और पांच मंत्रालयों की मंत्री भी रह चुकी हूं।" इसके साथ उन्होंने कहा, "पार्टी उन्हें क्या जिम्मेदारी देगी, यह उन्हें नहीं पता, लेकिन उन्होंने संसद के माध्यम से अपनी क्षमता साबित की है।"
भाजपा 2029 में ही क्यों बोलेगी?
आज तक न्यूज चैनल के इंटरव्यू में स्मृति ईरानी ने 2029 में बीजेपी की योजनाओं के बारे में अटकलों पर टिप्पणी करते हुए कहा, "इसके बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि "2029 में क्या होगा, यह न तो मैं जानती हूं और न ही आप। भाजपा 2029 में ही क्यों बोलेगी? 2026 में कुछ बोल दे और 2025 में कुछ बोल दे तो..."

'क्योंकि मेरा नाम स्मृति ईरानी है'
स्मृति ईरानी ने अपने बारे में होने वाली चर्चाओं पर भी बात की। स्मृति ईरानी बोलीं, "मेरे बारे में सवालों में चर्चाएं बहुत होती हैं। मेयर का चुनाव हो तो मेरी बात आएगी, विधायक का चुनाव होगा तब भी मेरी बात आएगी, संसद का चुनाव होगा तब भी मेरी बात आएगी, क्योंकि मेरा नाम स्मृति ईरानी है।"
'मौत के कुएं में छलांग लगाने जैसा था'
अपने राजनीतिक अनुभव को साझा करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि उन्होंने यूपीए सरकार के 10 वर्षों के दौरान भी सक्रिय राजनीति की और कई धरनों में भाग लिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने अमेठी में उस समय भी काम किया जब उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी और उन्होंने उस समय चुनाव लड़ा जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी। उन्होंने इसे "मौत के कुएं में छलांग" लगाने जैसा बताया।
अमेठी सीट क्यों चुनी?
अमेठी के चुनावी इतिहास पर बात करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा, "गांधी परिवार ने इस सीट को इसलिए चुना क्योंकि वहां का सामाजिक समीकरण ऐसा था कि वोट सिर्फ परिवार को ही मिलते थे। उन्होंने कहा कि कोई भी समझदार राजनेता ऐसी सीट नहीं चुनेगा जहां हार निश्चित हो। लेकिन अगर उसे ऐसी सीट पर चुनाव लड़ने के लिए कहा जाता है, तो वह इसे पार्टी के प्रति अपनी जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करेगा।
स्मृति ईरानी ने कहा कि एक समय था जब यह सीट जीतने के लिए मुश्किल मानी जाती थी। उन्होंने कहा कि कई दिग्गज नेता, जैसे शरद यादव और मेनका गांधी, जो गांधी परिवार से हैं, यहां से हार चुके हैं। उन्होंने 2014 में अपनी हार का जिक्र करते हुए कहा कि 2014 से 2019 तक उन्होंने लगातार काम किया, जिसके परिणामस्वरूप लोगों ने उन्हें 2019 में मौका दिया।"












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