'राहुल गांधी के पीछे-पीछे भाग नहीं सकती, स्मृति ईरानी ने अमेठी में मिली हार के बाद अब क्यों बोलीं ये बात?
BJP Leader Smriti Irani News: भारतीय जनता पार्टी की फायरब्रांड नेता स्मृति ईरानी जो कभी कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखे हमलों के लिए जानी जाती थीं, उनका रवैया काफी बदला हुआ है। ऐसा क्यों है एक इंटरव्यू में स्मृति ईरानी ने खुलकर बात की है। इसके साथ ही भाजपा नेता और अमेठी की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी में राहुल गांधी को लेकर कई बातें कहीं।
2019 में राहुल गांधी को अमेठी सीट से चुनाव हराने वाली स्मृति ईरानी ने आजतक को दिए इंटरव्यू में कहा कि अब राहुल गांधी पर हमलावर होने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि 2024 के चुनाव में गांधी परिवार ने उनसे मुकाबला करने से इनकार कर दिया।

स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल गांधी मेरे सामने चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरे ही नहीं, इसलिए मैं उनके पीछे-पीछे भाग नहीं भाग सकती।
स्मृति ईरानी ने अमेठी को ही क्यों चुनाव के लिए चुना?
स्मृति ईरानी ने आगे कहा कि गांधी परिवार ने अमेठी को इसलिए चुना क्योंकि वहां का सामाजिक समीकरण ऐसा था कि वोट गांधी परिवार को ही मिलेंगे। उन्होंने कहा कि कोई भी समझदार राजनेता ऐसी सीट नहीं चुनेगा जहां हार निश्चित हो, लेकिन अगर उसे ऐसी सीट पर चुनाव लड़ने के लिए कहा जाता है, तो वह इसे पार्टी के प्रति अपनी जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करेगा।
"2014 में चुनाव हारने के बावजूद मैंने अमेठी में काम किया"
स्मृति ईरानी ने कहा मैंने 2014 से 2019 तक अमेठी में बहुत काम किया था। उन्होंने कहा कि 2014 में चुनाव हारने के बावजूद, उन्होंने उस दौरान वहां काफी काम किया। उन्होंने कहा, "अगर लोग कहते कि मैंने अमेठी के लिए काम नहीं किया, तो मुझे दुख होता। आज चर्चा होती है कि मैंने वहां बहुत काम किया है। मैं अमेठी में रहती थी, घर-घर, गांव-गांव घूमी।" उन्होंने वहां बिजली पहुंचाने और घर बनवाने जैसे कार्यों का भी जिक्र किया।
अमेठी में 2024 का चुनाव क्यों हार गई स्मृति ईरानी?
अमेठी में मिली हार के सवाल पर स्मृति ईरानी ने कहा कि काम और राजनीतिक समीकरण में अंतर होता है। उन्होंने कहा, "राजनीति का राष्ट्रनीति से कोई लेना-देना नहीं है, मैं राष्ट्रनीति में सम्मिलित हूं।"
"मैं राहुल गांधी को हरा चुकी हूं, तो मुझे.."
स्मृति ईरानी ने आगे कहा, "मैं राहुल गांधी को हरा चुकी हूं, तो मुझे थोड़े बहुत तंज भी सहने पड़ेंगे।" उन्होंने कहा कि वह जिंदगी को समग्र रूप से देखती हैं और उनका मानना है कि अगर जीवन को केवल एक पहलू से जिया जाए तो वह जीना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रीय राजनीति में इसलिए आईं, क्योंकि उन्हें लगा कि समाज में कई ऐसी चीजें हैं जिन पर लोगों का ध्यान जाना चाहिए, चाहे वह राजनीति के माध्यम से हो या मीडिया के माध्यम से।












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