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'मैं भी कार सेवक, मुझे गिरफ्तार करो': बीजेपी ने कर्नाटक में क्यों शुरू किया ऐसा अभियान?

कर्नाटक बीजेपी ने गुरुवार को राज्य भर में 'मैं भी कार सेवक, मुझे गिरफ्तार करो' का अभियान शुरू किया है। इसके तहत बीजेपी के एमएलए और पूर्व मंत्री दावा कर रहे हैं कि वह भी 1992 में अयोध्या राम जन्मभूमि आंदोलन में शामिल हो चुके हैं, इसलिए उन्हें भी गिरफ्तार किया जाए।

इस दौरान बीजेपी नेताओं ने थानों के सामने बैठक जय श्री राम के नारे लगाए और अपनी गिरफ्तारी की मांग की। अयोध्या में राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से पहले और आने वाले लोकसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा इसे बड़े राजनीतिक अवसर की तरह देख रही है।

bjp campaign in karnataka

राम भक्तों को डराने की कोशिश कर रही है कर्नाटक सरकार-बीजेपी
बेंगलुरु में एक थाने के सामने बैठे बीजेपी महासचिव सुनील कुमार करकरला ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार राम भक्तों को राम मंदिर के उद्घाटन से पहले डराने की कोशिश कर रही है।

राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान हिंसा के आरोप में हुई गिरफ्तारी
बीजेपी 'कार सेवक' श्रीकांत पुजारी की गिरफ्तार के बाद राज्य की कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुकी है और उसपर हिंदू-विरोधी होने का आरोप लगा रही है।

पुजारी की गिरफ्तारी जिन कथित आरोपों में की गई है, उनमें अन्य मामलों के अलावा राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान हिंसा में शामिल होना भी बताया गया है।

सरकार की सफाई मानने से बीजेपी ने किया इनकार
भाजपा के विरोध प्रदर्शन को ठंडा करने के लिए मुख्यमंत्री और सरकार की ओर से इस तरह का स्पष्टीकरण देने की कोशिश की जा चुकी है कि पुजारी 16 असमाजिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं और खुद को बचाने के लिए धर्म का इस्तेमाल किया है। लेकिन, बीजेपी पर सरकार की इन दलीलों का असर नहीं पड़ा है।

इस समय पुजारी की गिरफ्तारी महज संयोग- सिद्दारमैया
मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का दावा है कि आपराधिक गतिविधियों की वजह से गिरफ्तार हुए 36 लोगों में पुजारी भी शामिल है और राम मंदिर के उद्घाटन से पहले उसकी गिरफ्तारी महज एक संयोग भर है। लेकिन, भाजपा यह स्पष्टीकरण खारिज कर चुकी है।

कार सेवक की रिहाई तक आंदोलन चलाएगी बीजेपी
बीजेपी ने अपने सभी विधायकों, एमएलसी, पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से कहा है कि इस अभियान को तबतक जारी रखें, जबतक कि राज्य सरकार गिरफ्तार 'कार सेवकों' को रिहा नहीं कर देती।

नवंबर में प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बनने के बाद बीवाई विजयेंद्र की ओर से राज्य सरकार के खिलाफ शुरू किया गया यह पहला आंदोलन है। बीजेपी ने सिद्दारमैया को हिंदू-विरोधी दिखाने के लिए एक क्लिपिंग भी जारी की है, जिसमें वे अपने कैबिनेट सहयोगी एमबी पाटिल के अनुरोध के बावजूद विजयपुरा के एक मंदिर में प्रवेश करने से इनकार कर रहे हैं।

राज्य सरकार के खिलाफ बीजेपी को गुरुवार को एक और मौका हाथ लग गया। पार्टी ने आरोप लगाया कि वह चिक्कमगलुरु के बाबा बुदनगिरी पहाड़ी पर स्थित कब्रों को कथित रूप से नष्ट करने की कोशिशों के आरोपों में कथित तौर पर शामिल हिंदू कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुराने केस खोल रही है।

इसपर सीएम को फिर सफाई देनी पड़ी कि यह 2017 का मामला है, जिसपर अदालत की ओर से 14 आरोपियों को 8 जनवरी से पहले पेश होने का समन जारी किया गया है।

इसे भी पढ़ें- Ram Temple: 'राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा से पहले गोधरा जैसी घटना मुमकिन', कांग्रेस नेता ने बताई पूरी बात

हिंदुओं और हिंदु संगठनों को निशाना बनाने का लगाया आरोप
लेकिन, बीजेपी का आरोप है कि राज्य सरकार हिंदुओं और हिंदू संगठनों को निशाना बना रही है और पीएफआई जैसे गैर-कानूनी संगठनों के प्रति नरम रवैया अपना रही है।

बीजेपी का दावा है कि कांग्रेस ने सैकड़ों पीएफआई कार्यकर्ताओं और उन 'जिहादियों' पर से मुकदमा वापस ले लिया है, जिन्होंने कुछ वर्ष पहले बेंगलुरु में एक दलित एमएलए के घर में आग लगा दी थी।

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