आडवाणी की जिद से याद आये राव-केसरी
[अंकुर शर्मा] एक बार फिर से भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने जिद पकड़ ली है जिसके बाद से पार्टी के अंदर महाभारत चल रही है। वजह वही है कि मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार घोषित ना किया जाये। सूत्रों के हवाले से जो खबर आ रही है कि उसके मुताबिक तो अब पार्टी के आलाकमान राजनाथ सिंह को आडवाणी की वरिष्ठता का मोह भी नहीं है और वह पार्टी कार्यकर्ताओं और पार्टी के भविष्य के मद्दे नजर आडवाणी की सहमती के बिना ही शुक्रवार को मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर देंगे।
लाल कृष्ण आडवाणी की हालत देखकर ना जाने क्यों आज मुझे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी की याद आ रही है, जिनकी जरा सी जिद ने लोगों को उन्हें भूलने पर मजबूर कर दिया।
बावजूद इसके कि दोनों ही लोगों का कांग्रेस पार्टी औऱ देश के विकास में अतुलनीय योगदान रहा है। लेकिन अपनी शेखी और अपने हठ की वजह से शायद कोई कांग्रेसी उन्हें याद भी नहीं करता है। इतिहास खंगालेंगे तो आपको पता चलेगा कि नेता सीताराम को केसरी क्यों जाना जाता था और नरसिम्हा राव के समय तेलंगाना विवाद क्यों नही आग उगल रहा था, जिसने आज कांग्रेस का जीना हराम कर रखा है।
सीताराम केसरी और पी वी नरसिंहराव दोनों ने हजारों गुण होने के बाद अपने स्वार्थ को सर्वोपरी बताया। जिससे हाशिये पर बैठी कांग्रेस ने दोनों को ही हाशिये पर ला खड़ा किया और दोनो ही लोग पार्टी औऱ देश के लिए बीता हुआ कल हो चुके हैं। कहीं यह हालात आडवाणी के साथ ना दोहरा दिये जायें क्योंकि वक्त रहते आडवाणी ने अपना बड़प्पन नहीं दिखाया तो हो सकता है कि भाजपा भी वही करने को मजबूर हो जाये जो कि कांग्रेस ने किया था क्योंकि दुनिया चढ़ते सूरज को सलाम करती है और मोदी इस समय भाजपा के लिए चढ़ते सूरज ही है और उसे लगता है कि मोदी शायद वो करिश्मा कर सके जो कि पीएम इन वेटिंग रहे लाल कृष्ण आडवाणी 50 साल से ज्यादा के राजनैतिक जीवन में और साल 2009 के लोकसभा चुनाव में नहीं कर पाये।
खैर हालात किस ओर करवट लेते हैं यह तो अगले 24 घंटे में पता चल जायेगा लेकिन हां.. बस इतना कहना चाहती हूं कि समझदार इंसान वो ही होता है जो स्थिति को पहले से ही भांप लेता है और इज्जत इंसान को उम्र से नहीं बल्कि कर्मों से मिलती है।
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भाजपा में महाभारत...
पीएम पद के लिए मोदी को उम्मीदवार घोषित करने को लेकर भाजपा में जबरदस्त दोफाड़ मची हुई है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि आडवाणी और उनका खेमा नहीं चाहता की मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया जाये।

सब ठीक है..
हालांकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा, "कोई किसी से नाराज नहीं है।""बातचीत जारी है और हम जल्द उम्मीदवार की घोषणा करेंगे। पार्टी में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर कोई विरोधाभास नहीं है। सब कुछ ठीक है।"

आखिर क्यों अड़े हैं आडवाणी?
जब पार्टी के आधे से ज्यादा लोग मोदी के समर्थन में हैं तो सवाल यह उठता है कि आडवाणी गु्स्सा क्यों हैं? क्या उन्हें मोदी से कोई खतरा है कि कल को उन्हें यह सुनना पड़ेगा कि आडवाणी की अगुवाई में भाजपा चुनाव हार गयी थी और मोदी की अगुवाई में जीत गयी?

बस औपचारिक ऐलान..
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर बड़ी सहमित बन गई है। इसकी औपचारिक घोषणा भाजपा के संसदीय बोर्ड के उनकी उम्मीदवारी को हरी झंडी दे दिए जाने के बाद शुक्रवार को की जा सकती है।

कुछ सख्त कदम...
संसदीय बोर्ड की बैठक में आम सहमति न बनने पर राजनाथ पार्टी के संविधान के तहत मिले अधिकार का प्रयोग करते हुए बिना बैठक के भी इसकी घोषणा कर सकते हैं।












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