क्या करवट लेगी तमिलनाडु की राजनीति, पीएम मोदी-अन्नामलाई की जुगलबंदी को क्यों नहीं नकार सकते?
तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष के अन्नामलाई की पदयात्रा को पिछले साल जुलाई में जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रामेश्वरम से लॉन्च किया था, तब शायद ही पार्टी ने भी सोचा होगा कि इससे प्रदेश में पिछले 6-7 दशकों से हावी द्रविड़ राजनीति पर कोई खास असर होगा।
लेकिन,'एन मन एन मक्कल' यात्रा को भले ही उतनी मीडिया कवरेज ना मिली हो, फिर भी इसने भाजपा को राज्य में एक विकल्प के तौर पर जरूर खड़ा करना शुरू कर दिया है।

यात्रा के समापन में पीएम मोदी
27 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने के साथ 103 दिन पुरानी यह यात्रा समाप्त होने जा रही है। कोयंबटूर में रैली के साथ पीएम मोदी एक तरह से तमिलनाडु में लोकसभा चुनाव अभियान का आगाज कर रहे हैं, जिसका आधार आईपीएस की नौकरी छोड़कर भाजपा में आए जुझारु नेता के अन्नामलाई ने तैयार किया है।
पूरे तमिलनाडु तक पहुंची बीजेपी की नीति
महज 39 वर्ष की अवस्था में अन्नामलाई ने अपनी यात्रा के जरिए तमिलनाडु में वोटरों के एक वर्ग तक जिस तरह से भाजपा और पीएम मोदी की नीतियों को पहुंचाया है, उसकी चर्चा मीडिया में भले ही उतनी प्रमुखता से नहीं दिख रही हो, लेकिन जानकारों की राय में इसका एहसास जरूर महसूस किया जा सकता है।
द्रविड़ पार्टियों की नीतियों को बनाया निशाना
कर्नाटक कैडर के आईपीएस रहे अन्नामलाई ने अपने अभियान को मुख्य तौर पर दोनों प्रमुख द्रविड़ पार्टियों डीएमके और एआईएडीएमके के कथित मोनोपॉली और अराजक राजनीति के विरोध पर केंद्रित रखा है। शायद यही वजह है कि यह यात्रा जहां से भी गुजरी है, वहां अप्रत्याशित भीड़ जुटी है।
तमिलनाडु के एक कारोबारी और तमिल राजनीति की जानकारी रखने वाले राजा एम शनमुघम ने दि क्विंट के एक लेख से बातचीत में अन्नामलाई की राजनीति और उनकी पदयात्रा को लेकर काफी चौंकाने वाली जानकारी साझा की हैं।
तमिलनाडु में एक बहुत बड़ा वोट बैंक विकल्प की तलाश में!
उनके मुताबिक इस यात्रा की वजह से पहली बार द्रविड़ राजनीति के अभेद्य किले में दरार महसूस हो रही है। उनका कहना है कि द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों ही लगभग 50% वोट की राजनीति करती हैं। जाति आधारित कई छोटी पार्टियां भी है। फिर भी तमिलनाडु का एक बहुत बड़ा वोट बैंक है, जो पूरी तरह से स्वतंत्र है।
भाजपा के वोट शेयर में भारी इजाफे की उम्मीद
उनका कहना है, 'वे (लोग) बहुत ही तेजी से अन्नामलाई को राज्य की राजनीति के भविष्य के तौर पर देखने लगे हैं।' हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि एक ही बार में चमत्कार तो नहीं हो सकता, लेकिन उनको लगता है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने जो आधार तैयार किया है, उससे पार्टी का वोट शेयर 15% को पार कर सकता है।
हालांकि, तमिलनाडु की मीडिया के सारे लोगों की ऐसी प्रतिक्रिया नहीं है। लेकिन, शनमुघम का कहना है कि यहां की मीडिया पर भी द्रविड़ पार्टियों की काफी पकड़ है और 'और आप शायद ही किसी मेनस्ट्रीम पत्रकार को देखेंगे, जिसका अन्नामलाई को लेकर पूर्वाग्रह न हो।'
इसके पक्ष में उनकी दलील है कि बीजेपी अध्यक्ष पीएम मोदी के पदचिन्हों पर चलने की कोशिश कर रहे हैं। जिस तरह से 2002 के बाद मोदी मीडिया के निशाने पर थे, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया को अपना आधार बनाया और सीधे वोटरों से संवाद करने लगे।
'एन मन एन मक्कल' पदयात्रा क्या है?
अगर तमिल में इसके शाब्दिक अर्थ पर जाएं तो 'एन मन एन मक्कल' का मतलब होता है, 'मेरी भूमि, मेरे लोग'। जब इस यात्रा की शुरुआत हुई थी तो शाह ने इसका मकसद तमिलनाडु की राजनीति से परिवारवाद और वंशवाद मिटाकर भ्रष्टाचार मुक्त और अच्छी कानून-व्यवस्था लाना बताया था।
यात्रा उत्सव में बदल गया- अन्नामलाई
डेक्कन हेराल्ड को दिए एक इंटरव्यू में अन्नामलाई ने अपनी यात्रा की सफलता को लेकर काफी कुछ कहा है। उनका कहना है कि कुछ जगहों पर तो यात्रा उत्सव में बदल गया। अपनी रणनीति के बारे में उनका कहना है कि हर विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने मोदी सरकार की योजनाओं के 100 लाभार्थियों की पहचान की और उनमें से 10 को मंच पर जगह दी गई।
लोग भाजपा को विकल्प के रूप में देख रहे हैं- बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष
उनके मुताबिक बीजेपी की यात्रा एक जन-अभियान बन गई है, जिसे तमिलनाडु के लोग नई राजनीतिक संस्कृति के रूप में देख रहे हैं। उनका दावा है कि 2019 में राज्य ने कृत्रिम लहर देखा था। लेकिन आज राज्य में मोदी लहर देखा जा सकता है। लोग अब दो दलों के तय पैटर्न वाली राजनीति से ऊपर उठकर भाजपा को विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
उन्होंने कहा, 'करीब 50 फीसदी वोटर इस बार विकल्प की तलाश में हैं और मेरा मानना है कि राज्य में जो बदलाव चाहते हैं, बीजेपी उनकी पसंद हो सकती है।'
ऐसा पहली बार हुआ है, जब बीजेपी ने तमिलनाडु में ऐसी यात्रा निकाली है, जो सभी 234 विधानसभा सीटों से होकर गुजरी है और उसका फोकस पूरी तरह से स्थानीय मुद्दे रहे हैं।
भाजपा का वोट शेयर 20% से ज्यादा रहने का दावा
अन्नामलाई का दावा है कि 'मुझे लगता है कि बीजेपी तमिलनाडु में पहले ही 20 फीसदी वोट पार कर चुकी है और हमें सिर्फ इसकी पुष्टि के लिए चुनावों का इंतजार है।'
शनमुघम कहते हैं कि अन्नामलाई की भाषा और बात करने का तरीका वैसा ही है, जिसे तमिल लोग समझते हैं और उसमें अपनापन महसूस करते हैं। वह जिस तरह से दोनों प्रमुख पार्टियों की तथ्य-आधारित आलोचना कर रहे हैं, उसने हकीकत में उन्हें परेशान कर दिया है।












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