Narth East Elections: पूर्वोत्तर में भाजपा गठबंधन का दबदबा, हावी हुआ AFSPA हटाने का मुद्दा
पूर्वोत्तर में एक बार फिर कांग्रेस को झटका लगा है। यहां क्षेत्रीय पार्टियों ने कांग्रेस का खेल बिगाड़ दिया। वहीं भाजपा गठबंधन का दबदबा फिर से कायम रहा।

AFSPA in Narth East Elections 2023: पूर्वोत्तर के तीन राज्यों के चुनाव में एक बार फिर से क्षेत्रीय दलों ने बाजी मारी। त्रिपुरा और नागालैंड में भाजपा संगठन के बड़ी सफलता मिल रही है। वहीं मेघालय में भाजपा कांग्रेस का प्रदर्शन समान्य दिख रहा है। यहां एनपीपी एक बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है। पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों के विधानसभा चुनाव का समग्र रूप से अगर विश्लेषण किया जाए तो ये कहा जा सकता है कि इस बार भाजपा और क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा कायम है। वहीं कांग्रेस के लिए ये चुनाव परिणाम एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इसका बड़ा कारण पूर्वोत्तर में अफस्पा (Armed Forces Special Powers Act) के चुनावी मुद्दा बनने और इसको लेकर भाजपा के चुनावी वादा माना जा रहा है।
त्रिपुरा, नागालैंड और मेघायल विधानसभा चुनाव परिणाम के रूझानों पर नजर डालें तो अब तक नागालैंड में भाजपा गठबंधन को 37, कांग्रेस 3, एनपीएफ 2 और अन्य को 18 सीटों पर आगे है। जबकि त्रिपुरा में भाजपा गठबंधन को 33, कांग्रेस गठबंधन को 15 और टिपरा मोथा को 11 सीटों पर बढ़त मिल रही है। जबकि मेघालय में भाजपा अभी 7 सीटों पर आगे चल रही हैं। वहीं टीएमसी और कांग्रेस को 5-5, एनपीपी 24, यूडीपी 9 और अन्य को 8 सीटों पर बढ़त मिली है।
पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों में से दो में भाजपा गठबंधन को अजेय बढ़त मिल रही है, तो वहीं मेघालय में अकेले दम पर लड़ रही भाजपा को 7 सीटों पर बढ़त मिलना इस बात का संकेत है कि भाजपा का क्रेज यहां भी है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की सियासी जमीन पूर्वोत्तर के राज्यों से सिकुड़ती हुई नजर आ रही है।
रूझान ये बताते हैं कि त्रिपुरा में बीजेपी के आगे कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन और टिपरा माथो का दांव काम नहीं आया। वहीं नगालैंड में बीजेपी-एनपीपी गठबंधन के सामने सभी बेअसर रहा। पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय तीनों राज्यों में 60-60 विधानसभा सीटें हैं। तीनों राज्यों में 2018 से बीजेपी गठबंधन की सरकार थी, जबकि त्रिपुरा में भाजपा की अपने दम पर सरकार थी। यहां फिर से भाजपा की पूर्ण बहुमत के साथ वापसी होती दिखाई दे रही है।
AFSPA हटाने के ऐलान का बड़ा असर
अफस्पा कानून पूर्वोत्तर का कई दशकों से बड़ा मुद्दा रहा है। हालांकि चुनाव के वक्त कभी ये मुद्दा नहीं बन पाया लेकिन इस बार भाजपा (BJP) की ओर अफस्पा हटाने का चुनाव वादा किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्वोत्तर के हर मंच से सीधे AFSPA को अगले कुछ सालों में हटाने का ऐलान किया। जिसके बाद तीन राज्यों के चुनाव परिणामों से इसका असर सभा दिख रहा है। गठबंधन के अलावा मेघालय में भी भाजपा ने कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी। हालांकि यहां एनपीपी ने सारा खेल बिगाड़ती नजर आ रही है। अब तक प्राप्त रुझानों के मुताबिक मेघालय में त्रिशंकु की स्थिति बनती दिख रही।
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