बिलकिस बानो केस पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 11 दोषियों की रिहाई की रद्द, फिर से जाना होगा अब जेल
Bilkis Bano case: बिलकिस बानो गैंगरेप के 11 दोषियों की रिहाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी 11 दोषियों की रिहाई रद्द कर दी है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि बिलकिस बानो द्वारा 11 दोषियों की सजा की सजा को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई योग्य है।
अगस्त 2022 में बिलकिस बानो गैंगरेप मामले में उम्रकैद की सजा पाए सभी 11 दोषियों को रिहा कर दिया था। जिसके बाद दोषियों की रिहाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। अब इन सभी दोषियों को फिर से जेल जाना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि, राज्य, जहां किसी अपराधी पर मुकदमा चलाया जाता है और सजा सुनाई जाती है, वह दोषियों की माफी याचिका पर फैसला लेने में सक्षम है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि दोषियों की सजा माफी का आदेश देने के लिए गुजरात राज्य सक्षम नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र सरकार सक्षम है।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने फैसले की घोषणा की और जस्टिस नागरत्ना ने फैसला लिखा है।
सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को सुरक्षित रखा था फैसला
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 11 दिनों की सुनवाई के बाद पिछले साल 12 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कार्यवाही के दौरान, केंद्र और गुजरात सरकार ने दोषियों की सजा माफ करने से संबंधित मूल रिकॉर्ड भी दिए थे। गुजरात सरकार ने दोषियों की रिहाई को उचित ठहराते हुए कहा कि उन्होंने सुधारात्मक सिद्धांत का पालन किया है।
सभी 11 दोषियों को जेल में 15 साल पूरे करने बाद कैद के दौरान उनकी उम्र और व्यवहार को ध्यान में रखते हुए, उन्हें 15 अगस्त, 2022 को रिहा कर दिया गया था।
21 साल की गर्भवती थी बिलकिस बानो, जब हुआ गैंगरेप
3 मार्च 2002 को गुजरात में गोधरा ट्रेन जलाने की घटना के बाद भड़के दंगों से भागते समय बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप किया गया था। बिलकिस बानो उस वक्त 21 साल की थीं और पांच महीने की गर्भवती थीं। इस दंगे में बिलकिस बानो के परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी गई थी, जिसमें उनकी तीन साल की बेटी भी शामिल थी।












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