Bilkis Bano Case: सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की सजा माफी को किया रद्द, जानें इस केस में कब-कब क्या हुआ?
हाइलाइट्स
- सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो मामले में आज फैसला सुनाया
- गुजरात सरकार के फैसले को पलटते हुए दोषियों की सजा माफी रद्द
- 2002 में बिलकिस बानो के घर में घुस कर किया गया था रेप
Bilkis Bano Rape Case Timeline: बिलकिस बानो रेप केस में आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया जिसमें गुजरात सरकार के फैसले को पलटते हुए दोषियों की सजा माफी रद्द कर दी गई है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जवल भुइयां की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। 12 अक्तूबर 2023 को पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सोमवार, 8 जनवरी को अपना फैसला सुनाते हुए सर्वोच्य अदालत ने कहा, "जहां अपराधी के खिलाफ मुकदमा चला और सजा सुनाई गई, वही राज्य दोषियों की सजा माफी का फैसला कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा दोषियों की सजा माफी का फैसला गुजरात सरकार नहीं कर सकती बल्कि महाराष्ट्र सरकार इस पर फैसला करेगी।"
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2002 में गुजरात में गोधरा ट्रेन जलाने की घटना से बाद भड़के दंगों में 21 साल की बिलकिस बानो जो 5 महीने की गर्भवती थीं, उनके घर में घुस कर उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। साथ ही उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी गई थी जिसमें उनकी तीन साल की बेटी भी शामिल थी। आइए जानते हैं बिलकिस बानो केस में कब-कब क्या-क्या हुआ...
इस मामले में 2008 में दोषी ठहराए गए 11 लोग पिछले साल 15 अगस्त को गोधरा उप-जेल से बाहर आ गए थे, जब गुजरात सरकार ने अपनी छूट नीति के तहत उन्हें रिहा करने की अनुमति दी थी। उन्होंने जेल में 15 साल से अधिक समय पूरा कर लिया था।
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दोषियों की रिहाई के बाद से सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई और उन पर पहले ही सुनवाई हो रही है। पहली याचिका पर 25 अगस्त, 2022 को भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमना की अगुवाई वाली पीठ द्वारा नोटिस जारी किया गया था। तब मामले की सुनवाई जस्टिस अजय रस्तोगी की अगुवाई वाली बेंच कर रही थी।
सभी 11 लोगों के जेल से बाहर आने के तीन महीने से अधिक समय बाद, बिलकिस बानो ने सुप्रीम कोर्ट के मई के आदेश को चुनौती दी, जिसने गुजरात सरकार को मामले में 1992 के छूट नियमों को लागू करने की अनुमति दी थी। उन्होंने बलात्कार के 11 दोषियों की समयपूर्व रिहाई को चुनौती देते हुए एक याचिका भी दायर की।
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9 सितंबर, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात से बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए 11 दोषियों को दी गई छूट से संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने को कहा।
दिसंबर 2022 में, जब बिलकिस बानो की याचिका पहली बार सूचीबद्ध हुई तो सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बेला त्रिवेदी ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। बाद में दिसंबर में, सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत के मई 2022 के आदेश को चुनौती देने वाली बिलकिस बानो द्वारा दायर समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें गुजरात सरकार की 1992 की छूट नीति के अनुसार दोषियों में से एक की सजा पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।
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मार्च 2023 में, मामला जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया, जिसने बिलकिस बानो द्वारा दायर याचिका पर केंद्र, गुजरात सरकार और 11 दोषियों को नोटिस जारी किया।
अप्रैल 2023 में, अदालत ने गुजरात सरकार से पूछा कि उसने दोषियों की रिहाई की अनुमति क्यों दी। जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की बेंच ने मामले की सुनवाई की। जस्टिस जोसेफ 19 जून को सेवानिवृत्त होने वाले थे, इसलिए उन्होंने छुट्टियों के दौरान मामले की सुनवाई की पेशकश की थी।
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जुलाई 2023 में, न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि दलीलें पूरी हो चुकी हैं और सभी दोषियों को समाचार पत्र प्रकाशनों के माध्यम से या सीधे नोटिस दिए गए हैं।
अक्टूबर में, अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया और गुजरात सरकार से उन फाइलों के मूल रिकॉर्ड जमा करने को कहा, जिनमें छूट का निर्णय लिया गया था।
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8 जनवरी, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया। फैसले में सर्वोच्य न्यायालय ने गुजरात सरकार के फैसले को पलटते हुए दोषियों की सजा माफी को रद्द कर दिया।
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