बिलकिस बानो मामले में दोषियों की बढ़ेंगी मुश्किलें या मिलेगी राहत, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट में आज बिलकिस बानो के परिवार के सात सदस्यों की हत्या सहित दुष्कर्म मामले में 11 दोषियों की सजा की छूट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई होनी है।

Bilkis Bano News: बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों की समय से पहले रिहाई देने के कोर्ट के फैसले के खिलाफ आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की डिवीजन बेंच करेगी। कई सिविल राइट्स एक्टिविस्ट समेत अन्य द्वारा दायर याचिकाओं और बानो द्वारा दायर एक रिट याचिका पर कोर्ट में सुनवाई होनी है। फिलहाल, कोर्ट के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
सुनवाई के लिए नई पीठ के गठन की कोर्ट ने दी थी सहमति
इससे पहले 22 मार्च को मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था और दलीलों की सुनवाई के लिए एक नई पीठ गठित करने पर सहमति व्यक्त की थी। 4 जनवरी को जस्टिस अजय रस्तोगी और बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने बानो द्वारा दायर याचिका और अन्य याचिकाओं पर विचार किया। हालांकि, न्यायमूर्ति त्रिवेदी ने बिना कोई कारण बताए मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसके बाद सुनवाई टाल दी गई थी।
इससे पहले कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
बानो ने पिछले साल 30 नवंबर को शीर्ष अदालत में राज्य सरकार द्वारा 11 आजीवन कारावास के दोषियों की 'समय से पहले रिहाई को चुनौती देते हुए कहा था कि इस फैसले ने 'समाज की अंतरात्मा को हिला दिया है।' दोषियों की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका के अलावा, गैंगरेप पीड़िता ने एक अलग याचिका भी दायर की थी जिसमें शीर्ष अदालत के 13 मई, 2022 को एक दोषी की याचिका पर दिए गए आदेश की समीक्षा की मांग की गई थी। समीक्षा याचिका को बाद में पिछले साल दिसंबर में खारिज कर दिया गया था।
15 अगस्त 2022 को रिहा हुए थे सभी दोषी
सभी 11 दोषियों को गुजरात सरकार ने छूट दी थी और पिछले साल 15 अगस्त को रिहा कर दिया था। पीड़िता ने अपनी लंबित रिट याचिका में कहा है कि राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून की आवश्यकता को पूरी तरह से अनदेखा करते हुए एक आदेश पारित किया। उन्होंने कहा, 'बिलकिस बानो के बहुचर्चित मामले में दोषियों की समय से पहले रिहाई ने समाज की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है और इसके परिणामस्वरूप देश भर में कई आंदोलन हुए हैं।'
क्या है पूरा मामला
दरअसल, जब बानो 21 साल की थी और पांच महीने की गर्भवती थी, उस समय गोधरा ट्रेन जलाने की घटना के बाद भड़के दंगों से भागते समय उसके साथ सामूहिक बलात्कार की घटना को अंजाम दिया गया था। मारे गए परिवार के सात सदस्यों में उनकी तीन साल की बेटी भी शामिल थी। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी और सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे को महाराष्ट्र की एक अदालत में स्थानांतरित कर दिया था। मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 21 जनवरी, 2008 को बानो के सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के आरोप में 11 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
मामले में दोषी ठहराए गए 11 लोग पिछले साल 15 अगस्त को गोधरा उप-जेल से बाहर चले गए, जब गुजरात सरकार ने अपनी छूट नीति के तहत उनकी रिहाई की अनुमति दी। वे जेल में 15 साल से ज्यादा का समय पूरा कर चुके थे। दोषियों की समय से पहले रिहाई देने के कोर्ट के फैसले के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।












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