Anand Mohan की रिहाई पर संशय बरकरार, जानिए क्या है बिलकिस बानो केस जिससे बढ़ी बाहुबली की मुश्किलें!
Anand Mohan Bail News Update: बिहार में आनंद मोहन को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर टिकीं हुईं हैं। मंगलवाल को केस की सुनवाई होनी थी, लेकिन 27वां नंबर होने की वजह से अगली तारीख पर सुनवाई होगी। मंगलवार को सिर्फ 24वें केस तक ही सुनवाई हो पाई थी।
आपको बता दें कि इससे पहले 11 अगस्त को सुनवाई मे सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को इस बाबत एडिशनल काउंटर एफिडेविट फाइल करने कहा था। वहीं कहां गया था कि 26 सितंबर मामले में पूरी बातें सुनी जाएंगे। ग़ौरतलब है कि पूर्व डीएम की पत्नी उमा देवी कृष्णैया आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ हैं।

उमा देवी कृष्णैया ने एक एडिशनल री-ज्वॉइंडर पेटिशन फाइल करते हुए बिलकिस बानो केस (गुजरात) का हवाला दिया है। री-ज्वॉइंडर पेटिशन में उमा देवी कृष्णैया ने दलील दी है कि बिलकिस बानो केस मामले में जिस तरह आउट ऑफ टर्न जाकर अभियुक्तों को छोड़ा गया। बिहार सरकार ने भी उसी तरह मेरे पति (जी कृष्णैया, पूर्व डीएम, गोपालगंज) की हत्यारे आनंद मोहन को रिहा कर दिया गया।
बिहार सरकार ने आनंद मोहन को रिहा करने के लिए सारे नियम बदल दिए। आउट ऑफ वे काम कर रिहा कर दिया। वहीं बिहार में आनंद मोहन के ख़िलाफ़ विभिन्न थानों में जितने भी अपराधिक मामले हैं, उनके डिटेल्स बताने की भी अपील की है। वहीं उमा देवी कृष्णैया ने बिहार सरकार पर अपराधों को छिपाने का भी आरोप लगाया है।
आइए जानते हैं बिलकिस बानो केस क्या है, जिसका पूर्व डीएम की पत्नी उमा देवी कृष्णैया ने अपने पेटिशन में ज़िक्र किया है। साल 2002 में गोधर ट्रेन जला दी गई थी। इसके बाग सांप्रदायिक दंगे भड़के थे। हालात बेकाबू होता देख, 21 साल की गर्भवती बिलकिस बानो इलाके छोड़ कर जा रही थी। इसी दौरान उनके साथ दंगाइयों ने गैंगरेप किया।
पांच महीने की गर्भवती बिलकिस बानो, उनकी मां समेत चार अन्य महिलाओं के साथ रेप किया गया। बिलकिस के परिवार के 7 सदस्यों की हत्या कर दी। जिसमें, बिलकिस की 3 साल की बेटी भी थी। दंगाइयों के हमले में सिर्फ़ बिलकिस,एक व्यक्ति और उनका बच्चा ही ज़िंदा बचा था।
इस मामले में 11 लोग दोषी पाए गये थे, जिसे गुजरात सरकार ने 15 अगस्त 2022 को रिहा कर दिया। उमा देवी कृष्णैया ने कहा कि जिस तरह से गुजरात सरकार ने आउट ऑफ वे दोषियों को रिहा किया। उसी तरह नीतीश सरकार ने भी आनंद मोहन को बचाने के लिए सारे नियम बदल दिए हैं। उसकी रिहाई पूरी तरह से ग़लत है, उसे सज़ा होनी चाहिए।












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