Bihar Politics: क्या स्कूली बच्चों को भी धर्म के नाम पर बांटेंगे नीतीश कुमार?
बिहार में स्कूलों में छुट्टियों को लेकर राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों पर भारी बवाल हो रहा है। विपक्षी बीजेपी या एनडीए गठबंधन महागठबंधन सरकार पर पूरी तरह से हमलावर है, दूसरी तरफ सरकार के नुमाइंदों को जवाब देना मुश्किल पड़ रहा है।
भाजपा का आरोप है कि नीतीश सरकार ने हिंदुओं के त्योहारों पर मिलने वाली छुट्टियां तो कम कर दी हैं, जबकि मुसलमानों के पर्व पर छुट्टियां बढ़ा दी हैं।

हिंदी और उर्दू स्कूलों के लिए अलग-अलग छुट्टी कैलेंडर
सारा फसाद साल 2024 के लिए स्कूलों के लिए जारी छुट्टियों के कैलेंडर को लेकर हो रहा है। जिसके लिए शिक्षा विभाग ने इस बार हिंदी और उर्दू स्कूलों के हिसाब से दो-दो कैलेंडर जारी किया और सत्ताधारी दलों को ठीक से जवाब देते नहीं बन पा रहा है।
नीतीश सरकार पर हमलावर है विपक्ष
बिहार सरकार के हिंदू और मुसलमान के आधार पर स्कूलों में छुट्टियों का कैलेंडर जारी करने के बाद बीजेपी और एनडीए गठबंधन आग बबूला है। भाजपा के राज्यसभा सांसद और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी वनइंडिया से खास बातचीत में बताया है कि उनकी पार्टी को आपत्ति किस बात पर है।
हिंदू त्योहारों पर छुट्टियां कम कर दी गईं- बीजेपी
सुशील मोदी ने कहा है कि अगर मौजूदा साल 2023 की छुट्टियों के कैलेंडर की तुलना 2024 के लिए जारी कैलेंडर से करें तो होली की छुट्टी 4 की जगह 2 दिन, दुर्गा पूजा की 6 के बदले 3 दिन, दिवाली से छठ तक 9 दिन की छुट्टी की जगह 5 दिन कर दी गई है।
मुसलमानों के पर्व पर छुट्टियों में इजाफे का आरोप
यही नहीं उन्होंने कहा है कि तीज, जितिया, रक्षा बंधन और अनंत चतुर्दशी के पर्व पर मिलने वाली छुट्टियां तो खत्म ही कर दी गई हैं। वहीं उर्दू स्कूलों में ईद की छुट्टी को अब 1 की जगह 3 दिन, बकरीद की 2 की जगह 3 दिन, मुहर्रम की 1 की जगह 2 दिन कर दिया गया है।
क्या स्कूली बच्चों को भी धर्म के नाम पर बांटेंगे?
सुशील मोदी ने सवाल किया है कि उर्दू स्कूलों में साप्ताहिक छुट्टी शुक्रवार को क्यों मिलेगी, जबकि बाकी स्कूलों में रविवार को मिलती है। सुशील मोदी ने नीतीश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि "ये जो अलगाव है, इसी ने देश के अंदर विभाजन का बीजारोपण किया था।"
क्या कह रही है बिहार सरकार?
सवाल तो उठता है कि आखिर एक धर्मनिरपेक्ष देश में बिहार सरकार को उर्दू और हिंदी स्कूलों में छुट्टियों में भेदभाव करने की जरूरत क्यों पड़ी? कमाल की बात है कि एक मीडिया चैनल ने जब स्कूली छुट्टियों पर मचे बवाल को लेकर बिहार के विवादित शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर से पूछा तो उन्होंने पूरे मामले से खुद को किनारे कर लिया।
उनके मुताबिक फैसला सरकार के स्तर नहीं लिया गया है। उन्होंने बवाल शांत करने के लिए यह गुंजाइश छोड़ी है कि कुछ गड़बड़ी हुई है तो उसे संशोधित किया जाएगा। सवाल फिर है कि क्या सरकारी अधिकारी अपनी मर्जी से इतने बड़े फैसले ले सकते हैं?
यही सवाल एक चैनल पर सीएम नीतीश के बेहद खास मंत्री अशोक चौधरी से भी किया। उन्होंने भी यही कहकर कन्नी काटने की कोशिश की है कि यह विषय मुख्यमंत्री के संज्ञान में जैसे ही आएगा वे इसमें सुधार जरूर करेंगे, जैसा वे पहले भी कर चुके हैं।
राजद-जदयू के नेता कर रहे हैं फैसले का समर्थन
हालांकि, जदयू और राजद के सारे नेताओं का इस मुद्दे पर रुख एक नहीं है और कुछ तो इस मुद्दे पर अपनी सरकार को बचाने के लिए तरह-तरह की दलीलें दे रहे हैं।
जैसे जेडीयू नेता नीरज कुमार ने एक चैनल से कहा है, 'सवाल है कि 60 दिन की छुट्टी है कि नहीं.....बीजेपी इसका सांप्रदायिकरण कर रही है।' वहीं आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी का कहना है कि 'यह व्यवस्था तो पहले से ही थी....जहां सिर्फ उर्दू की पढ़ाई होती है...वहां उस हिसाब से दिया जाता है......।' (इनपुट- वनइंडिया के हमारे सहयोगी इंज़माम वहीदी)












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