बिहार: राजगीर के गर्म कुण्ड का अस्तित्व संकट में!
पटना। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल राजगीर में आज कल कुछ बढ़िया नहीं चल रहा है। जिस राजगीर की पहचान गर्म झरनों से थी उसके अस्तित्व पर ही आज कल संकट के बादल मंडराने लगे हैं। झरनों से गिरने वाला पानी पता नहीं किसी लापरवाह को कोस-कोस कर पतली धारों से ही लोगों को संतुष्ट कर रहा है। थोड़ी बहुत इज़्ज़त,पांडु पोखर के बोरिंग ने ले ली, जिससे गर्म पानी निकल रहा था।

जी हां राजगीर का गर्म कुंड सूख रहा है और इस वजह से प्रशासन के होश उड़े हुए हैं। जिस गर्म कुंड में सदियों से पानी आता रहा, उसकी धार अचानक कैसे पतली हो गई, इसे लेकर बिहार सरकार परेशान है और खोजबीन कर रही है।
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हाल ही में जब स्थानीय लोगों ने मुद्दा उठाया तो नन-फानन में प्रशासन से उसे सील कर जाँच के आदेश भी दे दिए। आज जाँच टीम भी राजगीर पहुंचकर कसरत करती रही, लेकिन समझ में नहीं आया। डीएम साहब को भरोसा है कि सब कुछ ठीक हो जायेगा।
गर्म कुंड
आज जल संसाधन विभाग और पीएचईडी के प्रधान सचिव ने विभाग के वरीय अधिकारियों और अभियंताओं के साथ उन सभी कुंडों का निरीक्षण किया जो सूख गये हैं या जलस्तर कम हुआ है। उन्होंने बंद पड़े धाराओं को भी देखा और इस पर चिंता जाहिर की। अधिकारियों के साथ उनकी बैठक भी हुई जिसमें इसका कारण पता लगाने का निर्देश दिया गया।
जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने बताया कि गर्म जल के चार कुंडों का धारा बंद हो गया है। ये धाराएं क्यों बंद हुई है इसके कारणों की पड़ताल की जा रही है। जांच के बिना यह कहना मुश्किल है कि पांडु पोखर पार्क की बोरिंग के कारण यह समस्या खड़ी हुई है या जलस्तर नीचे जाने के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने सेंट्रल ग्राउंड वाटर की टीम से सर्वेक्षण कराये जाने की बात भी कही।
उन्होंने कहा कि कुंडों के धारा और जलस्रोतों के प्रवाह की कमी कैसे दूर की जाये इसके लिए विभाग द्वारा मंथन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुंड के सभी धारों के पानी की जांच करायी जाएगी। अधिकारियों को पानी की जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजने के निर्देश दिये गये हैं।












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