Bihar Politics: फिर खाली हाथ रह गए सुशील मोदी, नीतीश के लिए 'दरवाजा खोलना' भी न आया काम
Bihar Political News: बिहार में हुए सत्ता परिवर्तन के एक बड़े किरदार और अलग दल में रहकर भी नीतीश कुमार के बेहद खास माने जाने वाले भाजपा के दिग्गज नेता सुशील कुमार मोदी फिर खाली हाथ रह गए हैं।
जिस तरह से बिहार बीजेपी के अध्यक्ष सम्राट चौधरी को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया है, उससे साफ हो गया है कि वही बिहार में भाजपा नेताओं में अभी सर्वप्रथम हैं।

खुद 'दरवाजे' से बाहर रह गए सुशील मोदी!
उनके नीतीश के नए मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ होते दिखने से तय हो गया है कि जेडीयू अध्यक्ष की एनडीए में वापसी के लिए 'दरवाजा खोलने' के बावजूद वह खुद नई सरकार के दरवाजे से बाहर कर दिए गए हैं।
सुशील मोदी ने की थी नीतीश को साथ लाने के लिए 'बैटिंग'!
26 जनवरी यानी शुक्रवार को जिस दिन दिल्ली में बीजेपी ने बिहार में सत्ता परिवर्तन की रूपरेखा तय की थी, उसी दिन नीतीश कुमार को फिर से एनडीए के पाले में लाने के लिए सुशील मोदी ने बहुत ज्यादा सक्रियता दिखाई थी।
उस दिन सुशील मोदी ने कहा था कि 'राजनीति में दरवाजे कभी भी स्थाई तौर पर बंद नहीं होते।' उन्होंने यह भी कहा था कि 'वे (दरवाजे) जरूरत के हिसाब से खोले जाते हैं।'
सुशील मोदी का यह बयान उस बैठक के बाद आया था, जिसमें वे खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, बिहार भाजपा के अध्यक्ष सम्राट चौधरी, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय और भाजपा महासचिव और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े जैसे दिग्गज शामिल हुए थे।
रेणु देवी, तारकिशोर प्रसाद से नीतीश की नहीं बन पाई थी ट्विनिंग!
दरअसल, 2022 के अगस्त में जब नीतीश कुमार ने तीसरी बार पलटी मार कर लालू यादव की शरण ली थी, तब बीजेपी के एक वर्ग में यह चर्चा थी कि मुख्यमंत्री को सुशील मोदी की कमी बहुत खल रही थी। वह तत्कालीन डिप्टी सीएम रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद के साथ ट्विनिंग नहीं बिठा पा रहे थे।
'नीतीश के आदमी' होने का लगता रहा है आरोप
इस बार भी चर्चा थी कि नीतीश कुमार बीजेपी से डिप्टी सीएम के लिए सुशील मोदी की ही मांग कर रहे थे। क्योंकि, इससे पहले बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की चार सरकारों में तीन बार वही उनके डिप्टी थे। सुशील मोदी तो कई बार पार्टी नेताओं की ओर से भी इस बात के लिए निशाने पर आ चुके हैं कि वह पार्टी में रहकर भी 'नीतीश के आदमी' की तरह काम करते हैं।
इसलिए, अबकी बार जब नीतीश के पलटने की चर्चाएं शुरू हुईं तो लगा कि सुशील मोदी उन्हें फिर से एनडीए के पाले में लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की मजबूरी बन सकते हैं।
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नई प्लेसमेंट का लंबा होता इंतजार!
लेकिन, विजय कुमार सिन्हा और सम्राट चौधरी का नए डिप्टी सीएम के तौर पर नाम आने के बाद सुशील मोदी फिर से 'वेटिंग पर पोस्टिंग' वाले मोड में रह गए हैं। क्योंकि, उन्हें कुर्सी छोड़े चार साल गुजर चुके हैं और हाथ में सिर्फ राज्यसभा की सीट रह गई है। केंद्र और राज्य में कहीं भी नई प्लेसमेंट नहीं मिल पा रही है।












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