बिहार: पुलिसवालों ने नहीं किया अच्छा काम तो नवादा SP ने लॉकअप में किया बंद, वायरल हुआ वीडियो
बिहार: पुलिसवालों ने नहीं किया अच्छा काम तो नवादा SP ने लॉकअप में किया बंद, वायरल हुआ वीडियो
नवादा, 12 सितंबर: बिहार के नवादा जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) गौरव मंगला का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया, जिसमें कथित तौर पर पांच पुलिसकर्मियों को एक थाने में लॉक-अप के अंदर रखा गया था। इसके बाद रविवार को बिहार पुलिस एसोसिएशन ने घटना की न्यायिक जांच की मांग की है। बताया जाता है कि आठ सितंबर की रात जब एसपी निरीक्षण के लिए नवादा थाने पहुंचे तो कथित तौर पर थाने में तैनात पांच पुलिसकर्मियों के काम नहीं कर रहे थे, जिसको देखकर वो भड़क गए।

आधी रात के करीब दो घंटे बाद पुलिस वालों को किया गया रिहा
एसपी गौरव मंगला ने स्टेशन डायरी का निरीक्षण किया और दो उपनिरीक्षकों और तीन सहायक उप निरीक्षकों के प्रदर्शन से पूरी तरह असंतुष्ट बताया। वह कथित तौर पर गुस्सा हुए और पुलिस अधिकारियों को थाने में लॉक-अप के अंदर रखने का आदेश दिया, जहां से उन्हें आधी रात के करीब दो घंटे बाद रिहा कर दिया गया।

जानें कौन-कौन हैं अधिकारी
जिन अधिकारियों को लॉक-अप के अंदर रखा गया उनमें शत्रुघ्न पासवान, रामरेखा सिंह, संतोष पासवान, संजय सिंह और रामेश्वर उरांव थे। वायरल वीडियो में, लॉक-अप के अंदर पुलिस अधिकारी आपस में बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि उनमें से एक लॉक-अप के एक अलग बाड़े में खड़ा था।

नवादा एसपी ने इसे फेक न्यूज कहा
नवादा एसपी ने इसे फेक न्यूज बताया, जबकि बिहार पुलिस एसोसिएशन ने न्यायिक जांच की मांग की है। जब लॉक-अप के अंदर पुलिसकर्मियों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो नवादा एसपी गौरव मंगला ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है और यह एक "फर्जी खबर" थी। नवादा नगर थाना प्रभारी विजय कुमार सिंह ने भी एसपी से सहमति जताई। पटना में पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी किसी न किसी बहाने इस घटना पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

बिहार पुलिस एसोसिएशन ने की जांच की मांग
इस बीच, बिहार पुलिस एसोसिएशन ने घटना की न्यायिक जांच की मांग की। है। उन्होंने कहा, ''पीड़ित पुलिस अधिकारियों पर इस मुद्दे को दबाने और स्थानीय स्तर पर सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ करने के लिए दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। घटना का वीडियो हमारे व्हाट्सएप ग्रुप पर पुलिसकर्मियों के बीच साझा किया गया था और यह राज्य में अपनी तरह की पहली घटना है। घटना से औपनिवेशिक काल की बू आती है।''
एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह ने मीडिया को एक विज्ञप्ति में कहा, हम सोशल मीडिया पर वायरल हुए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर न्यायिक जांच और मामले की गहन जांच की मांग करते हैं।












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