जूली के छोड़ जाने से अकेले हुए मटुकनाथ, अब स्टूडेंट्स को पढ़ाएंगे प्यार का पाठ

पटना। 2006 में अपने से आधी से भी कम उम्र की अपनी छात्रा के साथ प्यार का एलान कर दुनिया से भिड़ गए प्रोफेसर मटुकनाथ आज पटना में अकेले रह रहे हैं। जूली के लिए मटुकनाथ ने घर-परिवार छोड़ दिया था और जूली से उनके रिश्तों के बाद पहली पत्नी ने मटुकनाथ को छोड़ दिया था। कुछ समय पहले जूली ने मटुकनाथ से अलग होने का फैसला कर लिया और उन्हें छोड गईं। दोनों 12 साल के साथ रह रहे थे। 64 साल के मटुकनाथ का कहना है कि जूली का दुनिया से मोह भंग हो गया है और वो अध्यात्म की ओर चली गई हैं।

12 साल पहले आए थए सुर्खियों में

12 साल पहले आए थए सुर्खियों में

मटुकनाथ और जूली तब चर्चा में आए थे जब पटना के बीएन कॉलेज में हिंदी प्रफेसर मटुकनाथ चौधरी अपनी की शिष्या जूली कुमारी के प्रेम में पड़ गए थे। ये 2004 की बातें हैं। उस वक्त मटुक 51 साल के थे और जूली 21 साल कीं। 2006 में जब मटुक की पत्नी ने हंगामा किया और जूली मटुक ने साथ रहने की बात कही तो देशभर में ये मामला चर्चा में आ गया। गुरू और शिष्या में प्यार की बातें टीवी, अखबारों से लेकर गली-नुक्कड़ तक चर्चा में रहीं। यूनिवर्सिटी ने भी उनको निकाल दिया और अपनी बहाली के लिए उनको कोर्ट के भी चक्कर लगाने पड़े।

जूली ने किया अध्यात्म की ओर जाने का फैसला

जूली ने किया अध्यात्म की ओर जाने का फैसला

जूली को करीब चार साल पहले अध्यात्म में रुचि आई। जिसके बाद उन्होंने ओशो आश्रम में समय बिताना शुरू कर दिया। मटुकनाथ बताते हैं कि पहले तो जब वह पटना आती थी तो कुछ दिनों के लिए मेरे साथ रहती थी ल्किन फिर वह फुलटाइम अध्यात्म की शरण में चली गईं। मटुकनाथ अब पटना में अकेले रह रहे हैं। वो इस साल रिटायर हो रहे हैं, रिटायरमेंट के बाद वह भागलपुर में एक प्रेम पाठशाला खोलेने की चाह रखते हैं।

हाल में सुप्रीम कोर्ट ने दिया है पहली पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश

हाल में सुप्रीम कोर्ट ने दिया है पहली पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश

हाल ही में प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी को सुप्रीम कोर्ट ने पहली पत्नी को गुजारा भत्ता देने के आदेश भी दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मटुकनाथ को कहा है कि उन्हें पहली पत्नी को अपने वेतन से एक तिहाई हिस्सा गुजारा भत्ता के तौर पर देना होगा। इतना ही नहीं, रिटायर होने के बाद भी गुजारा भत्ता चालू रहेगा और वो ये रुपये अपनी पेंशन में से पहली पत्नी को देंगे। कोर्ट का कहना है कि वो नौकरी रहते सैलरी से और रिटायर होने के बाद पेंशन में से एक तिहाई हिस्सा पूर्व पत्नी को दें। साथ ही मटुकनाथ को अब तक की बकाया राशि 18.5 लाख रुपये भी पहली पत्नी के अकाउंट में जमा कराने होंगे।

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