बिहार: जीतन राम मांझी के बेटे ने महागठबंधन से अलग होने की बताई ये वजह

होने पर बोले

नई दिल्ली। बिहार के पूर्व मुख्य जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) कांग्रेस-राजद महागठबंधन से अलग हो गई है। गुरुवार को हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा की कोर कमिटी की बैठक में गठबंधन से बाहर होने को लेकर सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है। हम के मुखिया जीतनराम मांझी के बेटे एमएलसी संतोष सुमन ने इस फैसले पर कहा है कि महागठबंधन में उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा था। लगातार हो रही उपेक्षा के चलते हमने अलग होने का फैसला लिया है। संतोष ने बिहार चुनाव के लिए तीसरा मोर्चा बनाने की बात कही है।

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    हम कब तक उपेक्षा झेलते: हम

    हम कब तक उपेक्षा झेलते: हम

    जीतन राम मांझी के बेटे ने कहा, महागठबंधन के लोग हमें समझ नहीं रहे थे। वो सोचते थे कि इन लोगों में क्षमता नहीं है ये कुछ नहीं कर सकते। इस उपेक्षा का दंश हम कब तक झेलते। एक- डेढ़ साल से हमारी गठबंधन सरकार के बड़े नेताओं के साथ कोई बात नहीं हुई। ये उपेक्षा कहीं ना कहीं घातक थी। ऐसे में हमने फैसला लिया कि अलग हो जाना बेहतर है।

    कहां जाएंगे, इस पर बहुत संभावनाएं

    कहां जाएंगे, इस पर बहुत संभावनाएं

    आगे की रणनीति पर सुमन ने कहा कि बिहार के विकास की और गरीबों के हित की बात नहीं थी इसलिए हमने सोचा कि हम लोगों को अलग होकर गरीबों की लड़ाई लड़नी है। इसके लिए आगे की रणनीति तय करेंगे। अभी ये तय नहीं हुआ है कि हम कहां जाएंगे। राजनीति है अपार संभावना है। हम सभी नेताओं के बातचीत करेंगे। हम अकेले लड़ सकते हैं या नए गठबंधन में शामिल हो सकते हैं। बहुत मुमकिन है कि एक तीसरा मोर्चा बने।

    जदयू के साथ जाने की चर्चाएं

    जदयू के साथ जाने की चर्चाएं

    जीतन राम मांझी ने हालांकि अपनी रणनीति को लेकर कुछ साफ नहीं किया है लेकिन ऐसी चर्चाएं हैं कि वो जदयू के साथ जा सकते हैं। जीतनराम मांझी जदयू में रहते हुए ही मुख्यमंत्री बने थे। बाद में उनके रिश्ते नीतीश कुमार से खराब हो गए थे और उन्होंने हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा का गठन किया था। सूत्रों का दावा है कि मांझी की जेडीयू के नेताओं से इस मामले में लगातार बातचीत हो रही है। जेडीयू मांझी से अपनी पार्टी हम का विलय करने को कह रही है और इसी पर मामला अटका है।

    बिहार विधानसभा के लिए इस साल अक्टूबर या नवंबर में चुनाव में होने हैं। अगर कोरोना महामारी के चलते देरी ना हुई तो आने वाले दिनों में चुनाव आयोग इलेक्शन की घोषणा कर सकता है क्योंकि बिहार विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर को पूरा हो रहा है। ऐसे में कई नेताओं के दल बदलने और छोटे दलों के गठबंधन तोड़ने का का सिलसिला इन दिनों प्रदेश में देखने को मिल रहा है।

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