Bihar Election:विधायकों के खिलाफ गुस्सा, JDU से कितने का कट सकता है पत्ता, जानिए

नई दिल्ली- बिहार विधानसभा चुनाव के लिए दोनों बड़े गठबंधन अभी तक सहयोगी दलों से सीटें फाइनल नहीं कर पाई हैं। संभावना है कि शुक्रवार तक भाजपा-जेडीयू और एलजेपी के बीच कोई फाइनल फॉर्मूला निकल आए। लेकिन, सत्ताधारी दलों की चुनौती यहीं खत्म नहीं होने वाली। उन्हें टिकट बंटवारे में भी फूंक-फूंक कर कदम उठाना है। क्योंकि, सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी अपनी जगह है, सत्ताधारी विधायकों को भी उनके अपने-अपने क्षेत्रों में वोटरों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है। इसको लेकर खासकर जेडीयू ने काफी मंथन किया है और जानकारी है कि दर्जन भर से ज्यादा मौजूदा एमएलए दोबारा टिकट पाने में नाकाम रह सकते हैं।

विधायकों की एंटी-इनकंबेंसी की चुनौती

विधायकों की एंटी-इनकंबेंसी की चुनौती

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले दौर के मतदान के लिए गुरुवार से नामांकन का काम शुरू हो चुका है। लेकिन, सत्ताधारी एनडीए गठबंधन अभी तक सीटों का बंटवारा नहीं कर पाया है। इस मसले पर बुधवार को दिल्ली में भाजपा के बड़े नेताओं की बैठक हो चुकी है और गुरुवार को पटना में भी जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार के साथ प्रदेश बीजेपी प्रभारी भूपेंद्र यादव और प्रदेश चुनाव प्रभारी देवेंद्र फडणवीस के बीच बैठकों का दौर जारी है। लेकिन, इन दलों के बीच आपस में जितनी भी सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला हो, इतना तो लगभग तय लगता है कि नीतीश कुमार जेडीयू के सारे विधायकों को दोबारा टिकट देकर चुनाव मैदान में भेजने के मूड में नहीं लग रहे हैं। इसकी वजह है एंटी-इनकंबेंसी, जो कि सत्ताधारी दल के कई विधायकों के खिलाफ बहुत ही ज्यादा है।

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    12 से ज्यादा विधायकों का कट सकता है टिकट

    12 से ज्यादा विधायकों का कट सकता है टिकट

    विधायकों के खिलाफ इस गुस्से से बचने के लिए हो सकता है कि जेडीयू 12 से ज्यादा विधायकों का टिकट इसबार काट ले। अब वह सीटिंग विधायक पार्टी को चाहे जितना नुकसान पहुंचाएं, लेकिन विधायकों की एंटी-इनकंबेंसी से बचने के लिए जेडीयू के पास इससे बेहतर कोई तोड़ फिलहाल नजर नहीं आ रहा है। जानकारी के मुताबिक यह फैसला पार्टी के भीतर हुए एक आंतरिक सर्वे और जमीनी कार्यकर्ताओं और आम जनता से मिली फीडबैक के आधार पर लिया गया है। सबसे बड़ी बात ये है कि यह पूरी प्रक्रिया मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख नीतीश कुमार की सीधी निगरानी में हो रही है। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते वे पार्टी दफ्तर में मौजूद रहे और हजार से ज्यादा पार्टी वर्करों से बात करके अलग-अलग सीटों के लिए उनकी राय जानने की कोशिश की थी।

    विधायकों पर पिछले उम्मीदवारों से हो चुकी है मुलाकात

    विधायकों पर पिछले उम्मीदवारों से हो चुकी है मुलाकात

    जानकारी के मुताबिक कई सारे कार्यकर्ताओं ने मौजूदा विधायकों को लेकर क्षेत्र की जनता में नाराजगी की बात से मुख्यमंत्री को रूबरू करवाया है। नीतीश कुमार पार्टी के सभी 69 विधायकों और 2015 का विधानसभा चुनाव हार जाने वाले पार्टी प्रत्याशियों से भी मिल चुके हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक जब एक ही विधानसभा क्षेत्र से टिकट के कई दावेदार पहुंच गए तो नीतीश कुमार को यह स्थिति अच्छी नहीं लगी। जानकारी के मुताबिक सीएम ने ऐसे विधायकों से कहा भी है कि 'अगर कहीं जेडीयू का सीटिंग विधायक है तो उस क्षेत्र में उसके नेतृत्व को लेकर कोई सवाल नहीं होना चाहिए। लेकिन, यह चिंताजनक हालत है कि इतने सारे लोग आपको बदलना चाहते हैं।'

    जीतने की स्थिति वाले दावेदारों पर ही दांव लगाएंगे नीतीश

    जीतने की स्थिति वाले दावेदारों पर ही दांव लगाएंगे नीतीश

    जानकारी के मुताबिक पहले से किए गए सर्वे, कार्यकर्ताओं और जनता से मिली फीडबैक और नीतीश कुमार को निजी तौर पर हासिल हुई जानकारी के आधार पर उन मौजूदा विधायकों की एक लिस्ट तैयार हो चुकी है, जिनका टिकट इसबार काटा जा सकता है। यही नहीं, जो विधायक एक ही क्षेत्र से दो-तीन बार से लगातार जीत रहे हैं, उनके खिलाफ भी एंटी-इनकंबेंसी की स्थिति की ज्यादा आशंका है। हो सकता है कि पार्टी ऐसे में जो जीतने वाले प्रत्याशी होंगे, उन्हीं पर दांव लगाने की कोशिश करेगी। 2015 के चुनाव में जेडीयू-आरजेडी और कांग्रेस का गठबंधन था। तब पार्टी 101 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसे 71 सीटें मिली थीं।

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