Bihar caste census: नीतीश सरकार में कितने अति पिछड़े और मुस्लिम मंत्री ? जनगणना में आई सबसे अधिक आबादी

बिहार में जातीय जनगणना के आंकड़े जारी करने के बाद सत्ताधारी जनता दल(यूनाइटेड) और राष्ट्रीय जनता दल के नेता अपनी पीठ खुद ही थपथपाने में लगे हैं। इस जातीय जनगणना की तरह दूसरे राज्यों में भी ऐसा ही सर्वे करवाए जाने की मांग की जा रही है। इंडिया ब्लॉक तो राष्ट्रीय स्तर पर यह जातीय जनगणना की वकालत कर रहा है।

लेकिन, अगर बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार के भीतर झांकें तो लगता है कि इनकी ओर से ओबीसी-ईबीसी को जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व दिए जाने की जो मांग हो रही है, उसे अपनी ही कैबिनेट में लागू कर पाने में बुरी तरह से नाकाम साबित हुए हैं।

caste census nitish kumar

नीतीश सरकार के नाम बड़े पर दर्शन छोटे!
नीतीश सरकार के मंत्रियों की जाति देखें तो सबसे ज्यादा मलाई यादवों को खाने का मौका मिल रहा है। जबकि, जिन अति पिछड़ों-दलितों को उनका असली हक देने की डफली बजाई जा रही है, उन्हें उनकी तुलना में पूरी तरह से हाशिए पर छोड़ दिया गया है। यही हाल मुसलमानों और ओबीसी की अन्य जातियों का भी है।

कुल मिलाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव तुलनात्मक रूप से अपनी-अपनी जातियों के ज्यादा लोगों को में मंत्री बनाए हुए हैं। हम जो आंकड़ा दिखाने जा रहे हैं, वह मंडल की राजनीति करने वाले दलों की नीति को लेकर भी आंखें खोल सकता है। इस सरकार में ऊंची जातियों का प्रतिनिधित्व भी अत्यंत पिछड़े वर्ग, दलितों और मुसलमानों की आबादी के मुकाबले में अधिक है।

जातीय जनगणना के अनुसार जातियों के आंकड़े
जातिगत जनगणना के अनुसार कुछ जातियों की आबादी के आंकड़े देखें और फिर उनकी नीतीश सरकार में नुमाइंदगी पर नजर डालें तो दूध का दूध और पानी का पानी स्पष्ट हो जाता है। इस जनगणना के अनुसार राज्य में सबसे अधिक आबादी अत्यंत पिछड़े वर्ग (ईबीसी) की है, जो 36% से भी अधिक है।

इसके बाद दलित हैं, जिनक जनसंख्या करीब 20% है। वहीं वहीं मुसलमानों की जनसंख्या भी 17% के करीब है। इसके बाद यादव हैं, जिनकी जनसंख्या करीब 14%. फिर कोइरी या कुशवाहा जनसंख्या है, जो 4.2% है। वहीं नीतीश कुमार जिस कुर्मी जाति से ताल्लुक रखते हैं, उनकी जनसंख्या 2.8% है।

सरकार में यादव मंत्रियों का जलवा, अति पिछड़े-मुस्लिम हाशिए पर
अब अगर बिहार में नीतीश सरकार के मौजूदा मंत्रिपरिषद को देखें तो उसमें सबसे ज्यादा यानी 8 मंत्री यादव जाति से हैं। मतलब, सरकार में लालू यादव की बिरादरी का जलवा कायम है। लेकिन, अगर सबसे ज्यादा आबादी वाले अत्यंत पिछड़े वर्ग (ईबीसी) की बात करें तो नीतीश कुमार ने अपनी सरकार में सिर्फ 4 अति पिछड़ो को ही मंत्री बनाया है। इसी तरह सिर्फ 5 मुसलमान ही मंत्री हैं।

नीतीश सरकार में अति-पिछड़े मंत्रियों में मदन सहनी, शीला कुमारी, अनिता देवी और समीर महासेठ को जगह मिली हुई है। वहीं मुसलमान मंत्रियों में आपाक आलम, शमीम अहमद, जमा खान, इसराइल मंसूरी और शाहनवाज आलम को स्थान दिया गया है।

नीतीश कोइरी की तुलना में अपनी जाति पर अधिक मेहरबान
वहीं कोइरी-कुर्मी की राजनीति करने वाले नीतीश कुमार ने ज्यादा आबादी के बावजूद सिर्फ 2 कुशवाहा समाज के नेता को मंत्री पद दी हुई है और 2 ही कुर्मी नेता भी मंत्रिपरिषद में शामिल हैं।

दलित मंत्रियों की भी संख्या तुलनात्मक रूप से काफी कम
इनके अलावा अभी 4 हिंदू सवर्ण और 5 दलितों को मंत्री पद दिया गया है। गौरतलब है कि जातिगत जनगणना की रिपोर्ट के हिसाब से राज्य में हिंदू सवर्णों की संख्या महज 10.56% है और दलितों की कुल आबादी करीब 20% है।

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