Bihar caste census: जातिगत जनगणना से दोराहे पर कांग्रेस, इधर जाए या उधर जाए?
बिहार में जातिगत जनगणना के नतीजे सामने आने से भी पहले से कांग्रेस आलाकमान इस मुद्दे को हवा देने में जुट चुका था। पहले एआईसीसी की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर जातिगत जनगणना की मांग की गई थी, फिर पार्टी नेता राहुल गांधी ने इसके लिए जोरदार तरीके से बैटिंग शुरू कर दी। उन्होंने तो कई कदम आगे बढ़ते हुए 'जितनी आबादी, उतना हक' वाला नारा भी गढ़ दिया।
लेकिन, लगता नहीं है कि पूरी कांग्रेस पार्टी के बदले हुए इस स्टैंड इसके लिए अभी तक तैयार हो पाई है। राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रांतीय स्तर तक पार्टी नेताओं में इस मुद्दे को लेकर आगे बढ़ने में थोड़ी हिचक दिख रही है। खासकर बिहार के नेताओं को तो बचा-खुचा जनाधार जाने की चिंता भी सताने लगी है।

जातिगत जनगणना, संकोच में कांग्रेस?
बिहार की जातिगत जनगणना को लेकर कांग्रेस किस तरह से संकोच में पड़ी है, इसका बेहतर उदाहरण कर्नाटक है। यहां कांग्रेस सरकार ही जातीय सर्वे करवा चुकी है, लेकिन 2018 से किसी ना किसी वजह से इसे लटकारकर रखा गया है। कहा जा रहा है कि रिपोर्ट जारी करने को लेकर पार्टी के अंदर ही एक तरह की हिचकिचाहट है। वैसे, अबतक नहीं जारी होने का ठीकरा, 'तकनीकी दिक्कतों' पर फोड़ा जा रहा है।
कर्नाटक में भी रिपोर्ट जारी करने की तेज हुई मांग
कई रिपोर्ट के आधार पर यह बातें सामने आ रही हैं कि कर्नाटक के जातिगत सर्वे में लिंगायतों और वोक्कालिगा की आबादी, मौजूदा अनुमानों से कथित तौर पर कम बताई गई है। कहा जा रहा है कि इससे कांग्रेस नेताओं को डर है कि कहीं 2024 के लोकसभा चुनावों में उसके प्रदर्शन पर असर न पड़ जाए।
लेकिन, बिहार के बाद अब पार्टी में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के आलोचक माने जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने इसे जल्द से जल्द जारी करने की मांग कर दी है।
उन्होंने ईटी को बताया है, 'एआईसीसी लीडरशिप खासकर राहुलजी ने बिहार सरकार की ओर से जातिगत सर्वे जारी करने का स्वागत किया है और राहुलजी ने राष्ट्रीय जातिगत जनगणना की भी जरूरत बताई है।' इसी आधार पर उन्होंने अपनी ही सरकार से 2018 से लंबित पड़े जातीय सर्वे की रिपोर्ट का खुलासा करने को कहा है।
अभिषेक मनु सिंघवी को डिलीट करना पड़ा ट्वीट
लेकिन, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के अंतर्विरोध की पोल पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने एक 'एक्स' पोस्ट से खोल दी है। उनकी लाइन सीधे राहुल की सोच को चुनौती देने वाली है। उन्होंने लिखा था, '.......जितनी आबादी उतना हक का समर्थन करने वाले लोगों को पहले इसके नतीजों को पूरी तरह से समझना पड़ेगा....'
लेकिन, जिस तरह से उन्हें अपनी यह ट्वीट डिलीट करनी पड़ी, उससे पार्टी में इस मसले को लेकर मतभेद की बात भी जगजाहिर हो चुकी है। हालांकि, बाद में कांग्रेस ने कहा कि यह उनकी निजी राय है और पार्टी आधिकारिक तौर पर जाति जनगणना के विचार के साथ है। हालांकि, बाद में सिंघवी ने यह सफाई भी दी है कि उन्होंने पार्टी से अलग स्टैंड नहीं लिया है। सिंघवी अब क्या कह रहे है, वह वीडियो आगे देख सकते हैं।
बिहार कांग्रेस नेताओं को बचा हुआ जनाधार भी खिसकने का डर
यही असमंजस वाला हाल बिहार कांग्रेस में भी दिख रहा है। वैसे तो आधिकारिक तौर पर पार्टी इस सर्वे का समर्थन कर रही है, लेकिन इसके आंकड़े नेताओं के दिलों की धड़कनें बढ़ाने लगी हैं। क्योंकि, बिहार में कांग्रेस का अपना कोई जातिगत जनाधार नहीं है।
उसका कोर वोट बैंक, जिस भी पॉकेट में बचा हुआ है, वह मूल रूप से ऊंची जातियों का ही है। मसलन, मिथिलांचल इलाके में उसे अभी भी कुछ ब्राह्मणों का समर्थन मिलता है तो औरंगाबाद, भभुआ आदि क्षेत्रों में राजपूतों के एक वर्ग में उसकी पैठ मानी जाती है।
इस सर्वे के बाद पार्टी नेताओं को अंदर ही अंदर यह डर सता रहा है कि पार्टी का यह बचा हुआ जनाधार भी न हाथ से निकल जाए, जिसका सीधा फायद जेडीयू-आरजेडी को मिल सकता है। क्योंकि, सीटों के तालमेल में कांग्रेस का प्रभाव उनके सामने अब घटना निश्चित है।
जैसे प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और राज्य के वरिष्ठ पार्टी नेता मदन मोहन झा का कहना है, 'क्योंकि राहुलजी ने जातिगत जनगणना का समर्थन कर दिया है, तो यह कांग्रेस का विचार है। जाति के आंकड़े जानना सही है। लेकिन, इससे कांग्रेस को फायदा होगा या नुकसान, यह सिर्फ चुनावों में जनता के फैसले से पता चलेगा.... '












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