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Bihar election 2020: CPI-ML की मौजूदगी से कितना मजबूत हुआ RJD का जातीय समीकरण

नई दिल्ली- बिहार में पहली बार भाकपा (माले) ने राजद के साथ चुनावी गठबंधन किया है। भाकपा और माकपा पहले भी कई बार लालू यादव की पार्टी के साथ तालमेल कर चुकी है। लेकिन, भाकपा (माले) का इस बार राजद की अगुवाई वाले महागठबंधन में चुनाव लड़ना बहुत ज्यादा मायने रखता है और इससे ना सिर्फ महागठबंधन का जातीय समीकरण मजबूत हुआ है, बल्कि सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के लिए भी चुनौती बढ़ गई है। इसकी वजह ये है कि भाकपा (माले) की पैठ कई समुदायों में है, जिसमें अच्छी-खासी तादाद दलितों और महादलितों की भी है। खासकर मगध और पुराने शाहाबाद क्षेत्रों में इसका बढ़िया जनाधार है।

Bihar assembly election 2020:RJDs caste equation due to the existence of CPI-ML is strong

भाकपा (माले) साथ तो बढ़ सकता है महागठबंधन का जनाधार
लालू यादव के जमाने से राष्ट्रीय जनता दल ने मुस्लिम-यादव (माय समीकरण) की राजनीति की है। बिहार में एक सामान्य अनुमान के मुताबिक वोटिंग करने लायक मुस्लिम आबादी 17% और यादवों की 13% है। इस बार राजद ने शुरू से 'हम', रालोजपा और वीआईपी जैसी पार्टियों को कोई भाव नहीं दिया। इसके बदले उसने वामपंथी दलों को साथ लाने पर ज्यादा भरोसा किया। इससे लालू की पार्टी ने एक साथ कई तरह से अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। मसलन, तीनों वामपंथी पार्टियों के चुनाव के बाद बीजेपी के साथ हाथ मिलाने की कोई संभावना नहीं है। मुस्लिम वोटों के बंटवारे की आशंका भी कम हो गई है और साथ ही उन जातियों के एक वर्ग के भी समर्थन मिलने की संभावना बढ़ गई है, जो फिलहाल महागठबंधन के जातीय तानेबाने में नहीं जुड़ पाए थे।

बिहार में करीब 16% दलित-महादलित वोट बैंक
लेफ्ट पार्टियों खासकर भाकपा (माले) के महागठबंधन में शामिल होने का मतलब ये है कि इसे उन दलित-महादलित जातियों के भी कुछ वोट मिल सकते हैं, जिनके बीच पार्टी का पहले से ही बड़ा जनाधार रहा है। 2015 में जब जदयू-राजद और कांग्रेस ने काफी ताकतवर गठबंधन बनाया था, तब भी यह पार्टी 3 सीटें अकेले जीतने में कामयाब रही थी। क्योंकि, इसका वोट कैडर आधारित है, जिनका किसी भी स्थिति में इधर-उधर भटकने की संभावना बहुत ही कम रहती है। बिहार में दलित वोट बैंक करीब 16% है। इनमें पासवान के करीब 5.5%, मुशहर (मांझी) करीब 2.5% और रविदास समुदाय के 4% वोट हैं। भाकपा (माले) के एक सदस्य ने एक अंग्रेजी अखबार को नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा है कि, 'मगध और पुराने शाहाबाद क्षेत्र हमारे मूवमेंट का हृदय रहा है और इसलिए इस हिस्से में हमारा एक व्यापक जनाधार है। विपक्षी गठबंधन में हमारी मौजूदगी का मतलब है कि हमारे गठबंधन के सहयोगी-कांग्रेस और आरजेडी को अच्छा समर्थन मिलेगा।'

19 सीटों पर चुनाव लड़ रही है भाकपा (माले)
यही वजह है कि पार्टी को तालमेल के तहत जो 19 सीटें चुनाव लड़ने के लिए दी गई हैं, उनमें से 10 सीटें मगध और पुराने शाहाबाद इलाके में ही हैं। ये सीटें हैं- पालीगंज, आरा, अगिआंव,तरारी, डुमरांव, काराकाट, अरवल, घोसी, दीघा और फुलवारीशरीफ। गठबंधन के तहत राजद-144, कांग्रेस-70, भाकपा-6,माकपा-4 सीटों पर लड़ रही है। गौरतलब है कि बिहार की 243 सीटों के लिए 28 अक्टूबर (71 सीट), 3 नवंबर (94 सीट) और 7 नवंबर (78 सीट) को तीन चरणों में मतदान करवाए जाने हैं। वोटों की गिनती 10 नवंबर को होगी और 29 नवंबर तक नई विधानसभा का गठन कर लिया जाना है।

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