Bihar Politics: अमित शाह ने दी 'हरी झंडी', फिर कहां अटका है नीतीश के NDA में वापसी का मामला?
बिहार की राजनीति एक बार फिर से नीतीश कुमार के अगले कदम को लेकर चल रही अटकलबाजियों की वजह से गरम है। बयानबाजियों का दौर शुरू है। बैठकों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। पार्टियां अपने-अपने सांसदों और विधायकों को अगले निर्देश तक मुख्यालय नहीं छोड़ने के लिए कहने लगी हैं।
सवाल एक है कि क्या जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर टीम बदलने वाले हैं। इसकी शुरुआत केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के एक बयान से हुई है, जिसे जदयू सुप्रीमो को एनडीए में वापस स्वीकरने की 'हरी झंडी' के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रस्ताव आने पर विचार होगा- अमित शाह
शाह ने पत्रिका को एक इंटरव्यू दिया है। सवाल सीधा था कि 'क्या जो पुरानी सहयोगी छोड़ कर गए थे, जैसे नीतीश कुमार तो उनकी वापसी के रास्ते अभी भी खुले हैं।' इसपर शाह ने बहुत ही साफ शब्दों में कहा, 'राजनीति में जो और तो से बात नहीं चलती। किसी का प्रस्ताव आएगा तो विचार होगा।'
लालू को लेकर नीतीश के घर पहुंचे तेजस्वी
शाह के इस बयान ने बिहार में क्या बीजेपी, एनडीए के तमाम सहयोगियों को भी अपने-अपने हिसाब से अर्थ निकालने का मौका दे दिया है।
लेकिन, इसी दौरान बुजुर्ग और बीमार लालू यादव को लेकर उनके बेटे उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव जिस तरह से आनन-फानन में मुख्यमंत्री निवास पहुंचे, उससे इन कयासबाजियों को और हवा मिली है कि कुछ चल तो जरूर रहा है!
दरअसल, बीजेपी की ओर से पहले यही दावे होते रहे हैं कि नीतीश कुमार के लिए अब सारे दरवाजे बंद हो चुके हैं। खुद शाह के हवाले से भी इस तरह की बातें कही जा चुकी हैं। लेकिन, लगता है कि बिहार की 40 लोकसभा सीटें जीतने की मजबूरी के चलते उनके सुर से नरमी के संकेत निकल रहे हैं।
बिहार बीजेपी का स्टैंड दिख रहा है थोड़ा सख्त
हालांकि, बिहार बीजेपी के अध्यक्ष सम्राट चौधरी का स्टैंड अभी भी बिहार के सीएम के लिए ज्यादा सख्त नजर आ रहा है। उन्होंने अमित शाह के बयान को लेकर पूछे गए सवालों पर कहा है,' अगर बिहार के सीएम नीतीश कुमार बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता लेना चाहते हैं तो उनका स्वागत है.....'
जेडीयू का स्टैंड दिख रहा है नरम
उधर जेडीयू नेता और नीतीश के बेहद करीबी मंत्री अशोक चौधरी ने ये कहकर और चौंका दिया है कि अमित शाह ने कभी नहीं कहा कि जेडीयू के लिए दरवाजे बंद हैं। उन्होंने प्रस्ताव आने की बात कही है। लेकिन, हम कोई प्रस्ताव देंगे तब न।
बीजेपी के सहयोगियों को नहीं है आपत्ति
इस बीच मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि नीतीश कुमार ने पार्टी के सभी सांसदों और विधायकों को अगले आदेश तक पटना नहीं छोड़ने को कहा है। इसी तरह से अभी बीजेपी के सहयोगी बने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतनराम मांझी ने 25 जनवरी तक पार्टी विधायकों से पटना में रहने को कह दिया है।
अलबत्ता उनकी ओर से यह जरूर कहा जा रहा है कि अगर जेडीयू फिर से एनडीए का हिस्सा बनता भी है तो उन्हें आपत्ति नहीं होगी। इससे पहले वे एलजेपी (रामविलास) चीफ चिराग पासवान के घर उपेंद्र कुशवाहा के साथ एक बैठक भी कर आए थे।
इंडिया ब्लॉक में अभी तक नीतीश को नहीं मिला पूरा भाव
जहां नीतीश के फिर से पलटने की वजह सवाल है तो उसकी वजह ये हो सकती है कि इंडिया ब्लॉक को बनाने के लिए उन्होंने जितनी ताकत झोंकी थी, कांग्रेस और टीएमसी जैसी पार्टियों ने उन्हें उतना भाव नहीं दिया है।
विपक्षी गठबंधन का पीएम उम्मीदवार तो दूर, संयोजक पद तक के लिए महीनों से तरसा दिया गया है। दूसरी तरफ तेजस्वी यादव के लिए रास्ता साफ करने का आरजेडी का दबाव कम नहीं हो रहा है। उनकी मुश्किल ये है कि 2025 में वादे के मुताबिक अगर कुर्सी खाली करनी पड़ी तो आगे पूछेगा कौन?
ललन को रास्ते से हटाकर नीतीश बीजेपी को पहले ही दे चुके हैं संदेश
पिछली बार नीतीश ने जदयू के जिन नेताओं के कहने पर बीजेपी से अलग होने की बात कही थी, उनमें ललन सिंह को वह खुद ही साइडलाइन करके बीजेपी की नाराजगी कम करने की कोशिश कर चुके हैं। शाह के बयान को इस संदर्भ से अलग नहीं किया जा सकता।
कुल मिलाकर नीतीश के एनडीए में आने से नुकसान न तो बीजेपी को है और न ही खुद जदयू सुप्रीमो को। बीजेपी को अभी तो राज्य में सिर्फ लोकसभा की 40 सीटें दिख रही हैं।
इसके लिए बीजेपी नेतृत्व नीतीश को फिर मुख्यमंत्री पद पर भी स्वीकार सकता है। नीतीश भी आगे के लिए रिटायरमेंट बेनिफिट मांग लें, इसका भी रास्ता खुल सकता है।
फिर कहां अटका है नीतीश के NDA में वापसी का मामला?
लेकिन, शायद बीजेपी की प्रदेश इकाई इस बार नीतीश के नाम पर इतनी आसानी से केंद्रीय नेतृत्व की बात मानने को तैयार नहीं दिख रही। यही वजह है कि पार्टी नेता विजय कुमार सिन्हा के घर पर नेताओं की एक बैठक होने की भी खबर है।
दिक्कत ये है कि अगर नीतीश एनडीए में वापसी का मन बना चुके हैं तो वह चिराग पासवान के साथ तालमेल के लिए कैसे तैयार होंगे? जहां तक चिराग की बात है तो बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की दखल के बाद वे शायद उनका उतना विरोध न करें।
लेकिन, नीतीश के लिए वह एक ही गठबंधन में दुखती रग की तरह होंगे। हो सकता है कि यही वजह है कि यह मामला अभी तक कयासबाजियों में ही उलझा हुआ है।












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