मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को SC से बड़ा झटका- पहले बताएं कहां छिपे हैं ?
नई दिल्ली, 18 नवंबर: वसूली मामले में फरार चल रहे मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने यह बताने तक कि वह कहां छिपे हुए हैं उनकी अर्जी पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। परमबीर सिंह ने उनपर दर्ज आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने उनके ठिकाने की जानकारी मिलने तक उनकी याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है। मुंबई के पूर्व पुलिस प्रमुख को पहले ही भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। सिंह ने आज ही आपराधिक मामले में अपनी गिरफ्तारी से बचाव के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है।

'परमबीर सिंह कहां हैं?'
सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के पूर्व पुलिस कप्तान की याचिका सुनने से तबतक मना कर दिया, जबतक वह अपना मौजूदा ठिकाना नहीं बताएंगे कि वह भारत में हैं या फिर विदेश में छिपे हुए हैं। परमबीर सिंह के खिलाफ महाराष्ट्र में कम से कम पांच क्रिमिनल केस दर्ज हैं और गोरेगांव जबरन वसूली केस में उनके खिलाफ कई गैर-जमानती वारंट जारी हो चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उनकी अर्जी पर कहा है, 'परमबीर सिंह कहां हैं? वह जांच में नहीं शामिल हुए, हम नहीं जानते कि वो कहां हैं। वह एक वरिष्ठ अधिकारी हैं और इससे विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठता है।'
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मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर के रवैए से अदालत नाखुश
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संजय किशन कौल ने टिप्पणी की है कि 'यदि आप विदेश में बैठे हुए हैं और कोर्ट से संपर्क कर रहे हैं......अगर कोर्ट उनके पक्ष में आदेश देगा तभी वह वापस आएंगे। ऐसा भी हो सकता है।' परमबीर सिंह के वकील ने बेंच से निर्देश पाने के लिए वक्त मांगा था। इसपर अदालत ने गिरफ्तारी से बचाव वाली उनकी याचिका को 22 नवंबर के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
भगोड़ा घोषित हो चुके हैं परमबीर सिंह
परमबीर सिंह इस साल सितंबर से ही गायब हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि कहीं वह भारत छोड़कर भाग तो नहीं चुके हैं। बुधवार को ही एक मैजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें 'भगोड़ा' घोषित किया है। उन्हें उसी मुंबई पुलिस की याचिका पर भगोड़ा घोषित किया गया है, जिसकी वह कप्तानी कर चुके हैं। मुंबई पुलिस गोरेगांव उगाही केस में उनके खिलाफ जांच कर रही है। दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने तब उनके खिलाफ मोर्चा खोला था जब उन्होंने पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख पर हफ्ता वसूली के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया था। देशमुख ने भी महीनों तक कानून की आड़ में अपनी गिरफ्तारी से बचने की कोशिश की थी, लेकिन आखिरकार प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और अब वह जेल का खाना खा रहे हैं।












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