भीमा कोरेगांव हिंसा: दलित संगठनों का आज महाराष्ट्र बंद का ऐलान

नई दिल्ली। पुणे के भीमा कोरेगांव में गंलवार भड़की जातीय हिंसा बुधवार को भी थमती हुई नहीं दिखाई दे रही है। आज आरपीआई समते तमाम दलित संगठनों ने महाराष्ट्र बंद का एलान किया है। इसस पहले मंगलवार देर शाम में जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद के खिलाफ इस मामले में पुणे के डेक्कन पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस को मिली शिकायत में कहा गया है जिग्नेश और उमर खालिद ने भड़काऊ बयान दिए जिससे की दो जातीय समूहों के बीच हिंसा भड़क गई।

यहां से शुरू हुई कहानी

यहां से शुरू हुई कहानी

बता दें कि पुणे के भीमा कोरेगांव में मंगलवार को महार रेजिमेंट के पेशवाओं पर जीत के 200 वर्ष पूरे होने पर 'शौर्य दिवस' का आयोजन किया था। बताया जाता है कि इस लड़ाई में अंग्रेजों की तरफ से लड़ते हुए महार रेजिमेंट के 500 सैनिकों ने हजारों की संख्या वाली पेशवा बाजीराव की सेना को हरा दिया था। यह लड़ाई 1 जनवरी 1818 को लड़ी गई थी। तभी से हर साल हजारों की संख्या में यहां दलित समुदाय के लोग इकठ्ठा होकर महार रेजिमेंट की जीत का जश्न मनाते हैं। इस साल 1 जनवरी को इस ऐतिहासिक लड़ाई के 200 साल पूरे हो गए जिस मौके पर दलित समुदाय की तरफ से भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद समेत कई तमाम लोगों को बुलाया गया था। कई दक्षिणपंथी संगठन शुरू से ही इस समारोह का विरोध कर रहा था। वे इस जीत को 'अंग्रेजो की जीत' बताकर इसके जश्न का विरोध कर रहे थे।

1 की मौत, 100 से ज्यादा हिरासत में

1 की मौत, 100 से ज्यादा हिरासत में

मंगलवार को इस कार्यक्रम के शरू होने के कुछ ही घंटों में पुणे के कई इलाकों में जातीय संघर्ष की खबरें आने शुरू हो गईं। दलित और अन्य दक्षिणपंथी संगठन इस मामले में आमने सामने आए गए। हिंसा भड़कने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। मुंबई पुलिस की ओर से बताया गया है कि इस मामले में 100 से ज्यादा लोगों को अलग-अलग इलाकों से हिरासत में लिया गया है।

 पूरे महाराष्ट्र में दिखा हिंसा का असर

पूरे महाराष्ट्र में दिखा हिंसा का असर

पुणे में भड़की यह हिंसा की आग धीरे धीरे मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में फैल गई। मुंबई के अलावा, हड़पसर और फुरसुंगी में बसों पर उग्र लोगों ने जमकर पथराव किया गया और सड़क पर खड़ी खाली बसों में तोड़फोड़ की गई। हिंसा को देखते हुए औरंगाबाद और अहमदनगर के लिए बस सेवा निरस्त कर दी गई थी। सुरक्षा के मद्देनजर स्कूल-कॉलेज को बंद कर दिया गया थी। लोकल रेल सेवाएं भी बाधित रहीं जिसके कारण लोग परेशान रहे।

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