#BhimaKoregaon: 'शिवाजी' के चेहरे वाली जैकट बन गई राहुल के लिए काल, लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला

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    Bhima Koregaom Violence: Rahul की मौत का कारण बनी उसकी Shivaji वाली Jacket । वनइंडिया हिंदी

    मुंबई। पुणे जिले में भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर आयोजित एक कार्यक्रम में दो गुटों के बीच भड़की हिंसा ने उग्र रुप धारण कर लिया है, इस हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई है और कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। जिस व्यक्ति की मौत इस जातीय हिंसा में हुई है, उसकी गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने ऐसी जैकेट पहन रखी थी जिस पर शिवाजी का चेहरा बना था, 30 साल के राहुल बाबाजी फाटांगडे को अंदाजा भी नहीं था कि ये जैकेट उसके लिए काल बन जाएगा और साल 2018 का पहला दिन उसकी जिंदगी का आखिरी दिन साबित होगा।

     वाडेबुडरुक गांव

    वाडेबुडरुक गांव

    स्थानीय मीडिया के मुताबिक 29 दिसंबर को वाडेबुडरुक गांव में गणेश महार की समाधि को राइट विंग द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया था, दलित गणेश महार ने ही छत्रपति शि‍वाजी के बेटे सांभाजी का अंतिम संस्कार किया था, जिसके बाद से ही दलितों का समूह शिवाजी के समर्थकों पर गुस्साया हुआ था और ये ही गुस्सा क्रूरता में 1 जनवरी को उस वक्त बदल गया, जिस वक्त भीमा-कोरेगांव युद्द की 200 वीं बरसी में दो गुटों के बीच झड़प हुई।

    भीमा-कोरेगांव युद्द की 200 वीं बरसी

    भीमा-कोरेगांव युद्द की 200 वीं बरसी

    गांव वालों के बयान के मुताबिक कार्यक्रम के दौरान ही जब महार से समर्थक स्मारक की ओर जा रहे थे तभी दूसरे गुट की ओर से किसी बात पर बहस हुई और लोग भड़क गए।

    लोगों ने राहुल बाबा जी पर हमला बोल दिया

    लोगों ने राहुल बाबा जी पर हमला बोल दिया

    दलितों के अंदर गुस्सा तो पहले से ही था, वो गाली-गलौज पर उतर आए और पथराव करने लगे, उसी दौरान राहुल बाबाजी फाटांगडे भी अपने सनस्वाडी गांव की ओर जा रहे थे, लोगों का गुस्सा देखकर वो भी वहां रुक गए, लोगों की भीड़ उस वक्त उग्र हो चुकी थी और लोग पत्थर लेकर अटैक करने के लिए भाग रहे थे और इसी दौरान उनकी नजर राहुल के जैकेट पर पड़ी और लोगों ने उन पर हमला बोल दिया और लगे पीटनेऔर तब तक पीटते रहे, जब तक उन्होंने दम नहीं तोड़ दिया।

     स्थानीय पुलिस

    स्थानीय पुलिस

    हालांकि स्थानीय पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में पुलिस को पता लगा है कि भीमा कोरेगांव के जश्न में दलित अपने बच्चों और महिलाओं के साथ शरीक होने आए थे और उनके पास कोई हथियार नहीं थे, घटना में घायल लोगों के घाव भी इस बात के सबूत हैं कि उनकी तरफ से कोई भी घातक हथियार इस्तेमाल नहीं हुआ, जो कुछ भी हुआ है वो आक्रोश के कारण हुआ है, फिलहाल घटना की जांच चल रही है।

     महाराष्ट्र बंद

    महाराष्ट्र बंद

    आपको बता दें कि भीमा-कोरेगांव लड़ाई की सालगिरह पर भड़की आग पूरे महाराष्ट्र में फैल रही है, राज्य सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं, हिंसा के कारण आज कई गुटों ने महाराष्ट्र बंद का ऐलान किया है।

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