भीमा कोरेगांव मामला: सुप्रीम कोर्ट से एक्टिविस्ट सुधा भारद्वाज को राहत
नई दिल्ली, 07 दिसंबर: भीमा कोरेगांव मामले में सुप्रीम कोर्ट से एक्टिविस्ट सुधा भारद्वाज को बड़ी राहत मिली है।सुप्रीम कोर्ट ने सुधा भारद्वाज की जमानत याचिका को बरकरार रखा है। कोर्ट ने मंगलवार को आदेश को चुनौती देने वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से दाखिल एक याचिका को खारिज कर दिया। दरअसल, साल 2018 से जेल में सुधा भारद्वाज को इस महीने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा डिफॉल्ट जमानत दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि एक अदालत जिसने उसके खिलाफ जांच को बढ़ाया और उसकी हिरासत को लंबा किया, उसने पास ऐसा करने का अधिकार क्षेत्र नहीं था।
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यह आदेश को जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एनजे जमादार की बेंच ने पारित किया है। इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने 8 दिसंबर को सुधा भारद्वाज की जमानत की शर्तों और रिहाई को तय करने के लिए पेश होने पेश होने के लिए कहा था। बता दें कि भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद जाति हिंसा मामले में साल 2018 में सुधा भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया था। वो दो साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं।
दरअसल, बॉम्बे हाई कोर्ट के जमानत के फैसले को एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए को झटका लगा है। कोर्ट ने एजेंसी की इस याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान कहा कि इस मामले में दखल देने की कोई वजह नहीं दिखाई देती। अपने फैसले पर कोर्ट ने कहा कि बिना किसी संशय के इस याचिका को खारिज किया जा रहा है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी एनआईए का प्रतिनिधित्व करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच से अपील की था कि वह जांच एजेंसी की दलील पर विचार करें कि हाई कोर्ट ने डिफॉल्ट जमानत देते समय यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967) की कुछ धाराओं पर विचार नहीं किया। लेकिन उनकी दलीलें बेंच को समझाने में नाकाम रहीं।












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