भगत सिंह और वैलेंटाइन डे: ये कौन सा विवाद है?

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    Bhagat Singh Vs Valentine Day: What's the controversy? | वनइंडिया हिंदी

    Bhagat Singh Valentine Day
    बेंगलुरु। भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु भारत मां के महान सपूत थे, जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हंसते-हंसते सूली पर चढ़ गये। आपको क्या लगता है इन महान शहीदों का नाता वैलेंटाइन डे से हो सकता है? नहीं, लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ लोग वैलेंटाइन डे का विरोध इन शहीदों का नाम लेकर कर रहे हैं। ये वो लोग हैं, जो अपनी बात को सिद्ध करने के लिये इतिहास तक बदलने के लिये तैयार हैं।

    जी हां हम बात कर रहे हैं, उस विवाद की जो फेसबुक, गूगल प्लस और ट्व‍िटर समेत कई सोशल मीडिया साइट पर चल रहा है। सच पूछिए तो विवाद खड़ा करने वालों ने इन तीनों के नाम और उनसे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को वैलेंटाइन से जोड़ने का काम सिर्फ इसलिये किया है, क्योंकि ये वो लोग हैं जिन्होंने देश के युवाओं को जगाया था और आज भी उनका नाम लेने से युवाओं में जोश भर जाता है।

    अगर ऐतिहासिक तथ्यों की बात करें तो भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को लाहौर षढ़यंत्र मामले में ट्रिब्यूनल कोर्ट ने 7 अक्टूबर 1930 को 300 पेज के जजमेंट पर आधारित तीनों को फांसी की सजा सुनायी थी। तीन शहीदों के अलावा उनके 12 साथ‍ियों को उम्रकैद की सजा दी गई थी। उसके बाद 24 मार्च 1931 को फांसी दी जानी थी, लेकिन विशेष आदेश के अंतर्गत उन्हें 23 मार्च 1931 को शाम 7:30 बजे फांसी दे दी गई।

    तो तस्वीर में 14 फरवरी कहां से आयी?

    अब आप सोच रहे होंगे कि इस पूरे मामले में 14 फरवरी की तारीख कहां से तस्वीर में आ गई? क्या समाज के कुछ अराजक तत्वों ने जबरदस्ती 23 मार्च को बदल कर 14 फरवरी कर दिया? क्या 7 अक्टूबर 1930 को बदलकर 14 फरवरी 1930 कर दिया गया? तो जवाब है नहीं। असल में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की जिंदगी में 14 फरवरी का महत्व बस इतना है कि प्रिविसी काउंसिल द्वारा अपील खारिज किये जाने के बाद कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष मदन मोहन मालवीय ने 14 फरवरी 1931 को लॉर्ड इरविन के समक्ष दया याचिका दाख‍िल की थी, जिसे बाद में खारिज कर दिया गया।

    फेसबुक पर ऐतिहासिक तथ्यों की क्षति

    ऐतिहासिक तथ्यों को क्षति पहुंचाने वाले लोगों ने न तो भगत सिंह के जीवन को ढंग से पढ़ा और न हीं सुखदेव व राजगुरु के। बस वैलेंटाइन डे का विरोध करने के लिये तथ्यों को तोड़मरोड़ कर प्रस्तुत कर दिया। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर सबसे ज्यादा वायरल हो रही है, जिसमें लिखा है- "वैलेंटाइन डे के शोर में युवा अपने देश, मातृभूमि के इन शहीदों को कहीं भूल न जाएं.... 14 फरवरी 1931 को मां भारती के इन शूरवीरों को अंग्रेजों ने फांसी की सजा सुनायी थी।"

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    वैलेंटाइन डे का विरोध करने वालों के दिल को ठेस पहुंचाना हमारा मकसद कतई नहीं है, हमारा मकसद सिर्फ इतना है कि कम से कम देश के शूरवीरों से जुड़े तथ्यों को लेकर युवाओं को गुमराह नहीं किया जाये। ये इतने संवेदनशील मुद्दे हैं, कि इनसे हजारों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं।

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