Bengaluru Metro: बेंगलुरू में नम्मा मेट्रो का बढ़ने वाला है किराया, जानिए कितना महंगा हो जाएगा टिकट?
Bengaluru Namma Metro Ticket Price: बेंगलुरु की नम्मा मेट्रो में सफर करना फरवरी 2026 से अधिक महंगा हो सकता है। बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) ने एक नई ''Automatic Fare Revision Policy'' का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत मेट्रो के किराए में वार्षिक वृद्धि होगी। इसका उद्देश्य मेट्रो सर्विस के परिचालन (operations) की लागतों की भरपाई और भविष्य की विस्तार परियोजनाओं के लिए धन जुटाना है।

BMRCL अधिकारियों के मुताबिक, इस स्वचालित नीति का मुख्य लक्ष्य परिचालन खर्चों को पूरा करना और भविष्य की विस्तार परियोजनाओं हेतु धन जुटाना है। यह नीति अचानक होने वाली बड़ी किराया वृद्धि से भी बचाएगी, जिससे यात्रियों पर एक साथ पड़ने वाला बोझ कम होगा और मूल्य वृद्धि क्रमिक होगी।
कितने साल से नहीं बढ़ा नम्मा मेट्रो का किराया?
इस नीति को लागू करने के लिए फिलहाल कर्नाटक सरकार की अंतिम मंजूरी अनिवार्य है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो नम्मा मेट्रो के किराए में लगातार आठ साल बाद बदलाव होगा, क्योंकि पिछली वृद्धि जून 2017 में हुई थी। तब से किराए अपरिवर्तित रहे हैं।
कितने फीसदी बढ़ जाएगा किराया?
BMRCL गैर-किराया राजस्व (non-fare box revenue) को बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित है। वर्तमान में, मेट्रो का केवल 7% राजस्व गैर-किराया स्रोतों से आता है; कॉर्पोरेशन का लक्ष्य इसे 25-30% तक बढ़ाना है। इसमें विज्ञापन, वाणिज्यिक स्थान और अन्य नवीन आय स्रोत शामिल हैं, ताकि टिकट किराए पर निर्भरता कम हो। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु में मेट्रो टिकट के दाम में फरवरी में 5 फीसदी तक बढ़ा दिए जाएंगे।
नम्मा मेट्रो के यात्रियों पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ
इस नीति का क्रियान्वयन BMRCL को परिचालन में अधिक वित्तीय स्थिरता दे सकता है। हालांकि, यह निश्चित रूप से मेट्रो यात्रियों पर एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा। प्रबंधन का मानना है कि लंबी अवधि में नागरिकों को बेहतर सेवाएं और एक व्यापक नेटवर्क प्रदान करने के लिए यह किराया वृद्धि आवश्यक है।
सुझाव के लिए 2023 में गठित की गई थी समिति
किराया संशोधन प्रणाली पर सुझाव देने के लिए 2023 में एक समिति गठित की गई थी। इसमें BMRCL, BMTC, KSRTC, शहर पुलिस और शहरी विकास विभाग के प्रतिनिधि शामिल थे। समिति ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के संयुक्त आधार पर वार्षिक किराया संशोधन की सिफारिश की।
प्रस्तावित तंत्र के अनुसार, किराया वृद्धि में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का 80% और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) का 20% भार होगा। यह मुद्रास्फीति के प्रभावों को किराए में समायोजित करने का एक वैज्ञानिक व पारदर्शी तरीका है। योजना के अनुसार, यह प्रणाली फरवरी 2026 से प्रभावी हो जाएगी।












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