Bengaluru: विपक्षी नेताओं के स्वागत में IAS अफसरों की क्यों हुई तैनाती, क्या कहता है नियम? जानिए
17 और 18 जुलाई को बेंगलुरु में करीब 26 विपक्षी दलों के नेताओं का जमावड़ा लगा था। लेकिन, इस बैठक के लिए देशभर से पहुंचे नेताओं के स्वागत में राज्य सरकार की सरकारी मशीनरी के जमकर दुरुपयोग किए जाने का आरोप लग रहा है। हालांकि, कांग्रेस सरकार यह कहकर अपना बचाव कर रही है कि कई नेता मुख्यमंत्री और राजकीय मेहमान थे।
पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और एचडी कुमारस्वामी दोनों ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक कार्यक्रम के लिए सरकारी मशीनरी के गलत इस्तेमाल का दावा किया है। कुमारस्वामी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार ने विपक्षी दलों की बैठक में शामिल होने पहुंचे लोगों के स्वागत में आईएएस अधिकारियों की लाइन लगा दी, जैसा कभी नहीं हुआ।

इस तरह से नौकरशाही का दुरुपयोग कभी नहीं हुआ- कुमारस्वामी
जेडीएस नेता कुमारस्वामी ने कहा यह बैठक राजनीतिक थी और 'पिछले 40 वर्षों में इस तरह से नौकरशाही का दुरुपयोग कभी नहीं हुआ।' उन्होंने कहा, 'पहले भी राजनीतिक नेताओं की इस तरह की बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन हर बार उनका स्वागत राजनीतिक दलों के नेताओं और कैडरों की ओर से होता था। यह पूरी तरह से सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग है।' वो बोले कि पांच साल पहले उन्हें भी कोलकाता जाने का निमंत्रण मिला था, लेकिन किसी भी नौकरशाह को उनके स्वागत के लिए तैनात नहीं किया गया था।
अफसरों को प्रोटोकॉल के तहत तैनात किया गया- डीके शिवकुमार
कुमारस्वामी के जवाब में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा, 'मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के अलावा वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति होने की वजह से वे राजकीय मेहमान हैं। आईएएस अफसरों को प्रोटोकॉल के तहत तैनात किया गया।' लेकिन, राज्य सरकार के इन दलीलों से विपक्ष शांत होने को तैयार नहीं है। पूर्व सीएम और बीजेपी नेता बसवराज बोम्मई ने कहा कि मेहमानों के स्वागत के लिए वरिष्ठ आईएएस अफसरों की तैनाती के बारे में कभी नहीं सुना था।
एस्कॉर्टिंग और पीआरओ की तरह काम किया जो शर्मनाक है- बसवराज बोम्मई
पूर्व सीएम बोम्मई बोले, 'दूसरे राज्यों के सीएम आते हैं तो उसका एक प्रोटोकॉल (आईएएस अफसरों की तैनाती को लेकर) है। लेकिन, आईएएस, आईपीएस अफसर डिप्टी सीएम और अन्य नेताओं की एस्कॉर्टिंग और पीआरओ की तरह काम कर रहे हैं जो शर्मनाक है।'
केवल महत्वपूर्ण व्यक्तियों के स्वागत के लिए तैनात किया गया-सिद्दारमैया
कर्नाटक के सीएम सिद्दारमैया ने एक ट्वीट में कहा, 'आईएएस अधिकारियों को केवल महत्वपूर्ण व्यक्तियों के स्वागत के लिए तैनात किया गया था, जिसमें प्रोटोकॉल के हिस्से के तौर पर अन्य राज्यों के सीएम और डिप्टी सीएम शामिल थे। इसके अलावा कार्यक्रम में राज्य सरकार का कोई रोल नहीं रहा। '
नौकरशाह असंवैधानिक आदेश का पालन नहीं करने के लिए स्वतंत्र हैं- पूर्व नौकरशाह
दरअसल, नौकरशाहों को इस तरह के राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल किए जाने को लेकर नियम क्या कहता है, इसको लेकर वनइंडिया ने भारत सरकार के रिटायर्ड नौकरशाह एके मिश्रा से बात की है। उन्होंने कहा, "कोई भी नौकरशाह संवैधानिक जिम्मेदारी के निर्वाह करने के लिए अपनी ड्यूटी से बंधा हुआ है, किसी भी असंवैधानिक आदेश के पालन नहीं करने के लिए वह स्वतंत्र है।"
ट्रांसफर-पोस्टिंग के चक्कर में उलझ जाते हैं अफसर- पूर्व नौकरशाह
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नौकरशाहों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार सरकार के पास होता है, इसलिए वह सरकार के गैर-जरूरी फरमान मानने से मना नहीं कर पाते। क्योंकि मलाईदार पोस्टिंग बहुत बड़ी कमजोर बन गई है। सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि बेंगलुरु पहुंचने वाले नेताओं में आरजेडी नेता लालू यादव भी शामिल थे, जो चारा घोटाले के कई मामलों में सजायाफ्ता हैं और अभी जमानत पर जेल से बाहर रहकर 2024 का चुनावी एजेंडा सेट कर रहे हैं।
इस कार्यक्रम में प्रोटोकॉल ड्यूटी लगाना समझ से बाहर- पूर्व एडिश्ननल चीफी सेक्रेटरी
वहीं कर्नाटक के एक रिटायर्ड एडिश्नल चीफ सेक्रेटरी एम मदन गोपाल ने भी ऑल इंडिया सर्विस के रूल 5 का हवाला देकर एक ट्वीट में कहा है, 'आईएएस अफसरों का उद्देश्य निष्पक्ष होना और संवैधानिक सदाचार और परंपराओं का पालन करना है।' उन्होंने कहा, 'अगर राज्य सरकार ने राजनीतिक सम्मलेन के लिए जुटे नेताओं को राजकीय मेहमान घोषित भी कर दिया, यह समझ से बाहर है कि एक मौजूदा अफसर को कैसे उस कार्यक्रम के लिए प्रोटोकॉल ड्यूटी के तहत तैनात किया जा सकता है, जो कि सरकारी नहीं पूरी तरह से राजनीतिक कार्यक्रम है।'
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