Bengaluru Building Collapse: सात और शव हुए बरामद, पुलिस ने मालिक और ठेकेदार को पकड़ा

Bengaluru building collapse: बेंगलुरु में मंगलवार 22 अक्टूबर को एक निर्माणाधीन इमारत ढह गई, जिसके बाद सात और शव बरामद किए गए। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, इससे मरने वालों की कुल संख्या आठ हो गई है। पुलिस की मानें तो तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है।

यह हादसा बेंगलुरु शहरके हेनूर इलाके में भारी बारिश के बीच हुआ है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, 13 मजदूर बचा लिए गए हैं और छह घायल हैं। मलबे में 21 लोग फंसे थे। यह पता लगाने के लिए तलाशी अभियान जारी है कि कहीं और लोग तो फंसे नहीं हैं।

Bengaluru building collapse

इस बाबत एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया,'मुनिराज रेड्डी, जिनके नाम पर इमारत का निर्माण किया जा रहा था, उनके बेटे भुवन और ठेकेदार मुनियप्पा, जो इमारत का निर्माण कर रहे थे, को घटना के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया गया है। कहा कि अनुमति केवल चार मंजिला इमारत के निर्माण के लिए थी, लेकिन सात मंजिलों का निर्माण किया जा रहा था।

खबर के मुताबिक, मंगलवार को एक शव बरामद किया गया था, बाद में सात और शव बरामद किए गए। मृतक बिहार, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे। मलबे में फंसे दो लापता लोगों को खोजने के प्रयास जारी हैं। वहीं, अब तक 13 श्रमिकों को बचा लिया गया है।

न्यायमूर्ति पाटिल ने कहा कि इतनी बड़ी निर्माण परियोजना के लिए कोई स्वीकृत योजना या लाइसेंस नहीं था। उन्होंने अवैध निर्माण को पहले न रोकने के लिए बीबीएमपी अधिकारियों की आलोचना की। उन्होंने कहा, 'ऐसा कहा जाता है कि इमारत का निर्माण पिछले दो सालों से चल रहा था।'

इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि घटना के संबंध में सहायक कार्यकारी अभियंता विनय के को कर्तव्य में गंभीर लापरवाही के लिए शहर की नगर निकाय बीबीएमपी ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। घटनास्थल का दौरा करने वाले लोकायुक्त न्यायमूर्ति बी एस पाटिल ने इसे "दुर्भाग्यपूर्ण घटना" करार दिया और आश्वासन दिया कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। आठ निर्दोष लोगों की जान चली गई। संदेह है कि दो और लोग अभी भी फंसे हुए हैं। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? ऐसा क्यों हुआ? किसकी गलती है? हमने स्वत: संज्ञान लेकर मामला दर्ज कर लिया है। हम यहां निरीक्षण के लिए आए हैं।'

उन्होंने कहा कि निरीक्षण में पता चला कि इमारत के पास कोई लाइसेंस नहीं था। जब इतनी बड़ी इमारत बन रही थी, तब न तो कोई स्वीकृत नक्शा था और न ही कोई लाइसेंस। इमारत का निर्माण अवैध रूप से किया जा रहा था। कहा कि अवैध रूप से इमारतें नहीं बनाई जानी चाहिए और निर्माण कार्य उचित लाइसेंस के साथ किया जाना चाहिए।

जब ​​अनधिकृत निर्माण कार्य चल रहा हो तो अधिकारियों को चुप नहीं रहना चाहिए और फिर निर्माण पूरा होने के बाद नोटिस जारी नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने सहायक कार्यकारी अभियंता, क्षेत्रीय आयुक्त और संयुक्त आयुक्त से पूछताछ की है और प्रथम दृष्टया हमें पता चला है कि अधिकारियों की ओर से चूक हुई है।

उन्हें नोटिस दिया जाएगा और उन्हें तलब किया जाएगा। ऐसी दुखद घटना बेंगलुरूवासियों के लिए आंख खोलने वाली होनी चाहिए। कहा कि यदि निर्माण कार्य रोक दिया जाए तो ध्वस्तीकरण का सवाल ही नहीं उठेगा। ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए और हम सभी आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

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