बेंगलुरु में बीबीएमपी ने कोरोना पॉजिटिव लोगों के घरों के दरवाजों को टीन से कर दिया सील
बेंगलुरु:बीबीएमपी ने कोरोना पॉजिटिव मरीजों के घरों के दरवाजों को टीन से कर दिया सील
बेंगलुरु। कनार्टन की राजधानी में कोरोना संक्रमितों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। कोरोना मरीजों की बढ़ते आंकड़े और मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त सुविधा न होने के कारण प्रदेश की येरियुरप्पा सरकार सवालों से घिर चुकी है। कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने पर सरकार जब घिरने लगी तो पहले तो अचानक 7 दिन का सख्त लॉकडाउन करने का फरमान सुना दिया और अब एक के बाद बचाव के नाम पर नए-नए नियम लागू किए जा रहे हैं। इसी बीच बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) की एक करतूत सामने आई है जिसके बाद लोगों में सरकारी तंत्र के प्रति गुस्सा और बढ़ गया है।

दो फ्लैटों को टीन से कर दिया सील
दरअसल, बेंगलुरु के दोमलूर इलाके में बीबीएमपी ने जिन दो घरों में कोरोना पॉजिटिव मरीज पाए गए बिल्डिंग में मौजूद उनके घर के दरवाजे पर टीन से सील कर दिया। जबकि बिल्डिंग में जो दो फ्लैट सील किए गए उनमें एक परिवार में दो छोटे बच्चे थे और दूसरे घर में एक बुजुर्ग दंपत्ति रह रहे हैं। बीबीएमपी के लोगो द्वारा दरवाजा सील किए जाने पर महिला ने फोटो खींच कर ट्वीट कर अधिकारियों से शिकायत दर्ज की जिसके बाद अधिकारियों ने दरवाजों से स्टील की चादरें हटा दी हैं।
डॉक्टर को अस्पतालों ने नहीं किया भर्ती कोरोना से हुई मौत
बता दें गुरुवार को मरीजों का कोरोना का इलाज करने वाले डॉ. मंजूनाथ को तीन अस्पतालों ने भर्ती करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद गंभीर रूप से बीमार होने के कारण बेंगलुरु मेडिकल कॉलेज ऐंड रिसर्च सेंटर में उनकी मौत हो गईडॉ. मंजूनाथ रामनगरा जिले के एक प्राइमरी हेल्थ सेंटर पर नौकरी कर रहे थे। बीते दिनों वह यहीं पर कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे। 25 जून को बुखार और सांस लेने में तकलीफ के बाद डॉ. मंजूनाथ को अलग-अलग अस्पतालों में ले जाया गया था। हालांकि कोविड टेस्ट की रिपोर्ट ना होने के कारण किसी अस्पताल ने उन्हें भर्ती नहीं किया। तीन प्राइवेट अस्पतालों में भटकने के बाद उन्हें किसी तरह कुमारस्वामी लेआउट के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां शुरु में तबीयत सुधरी लेकिन बाद में जब सेहत में गिरावट आने लगी तो तत्काल उन्हें बीएमसीआरआई में भर्ती कराया। मंजूनाथ के भाई डॉ. नागेंद्र ने कहा कि इलाज के दौरान उनके भाई को फिजियोथेरेपिस्ट की जरूरत थी, लेकिन कोई भी थेरेपिस्ट उनका इलाज करने को राजी नहीं हुआ।

कोई भी डाक्टर इलाज के लिए नहीं हुआ तैयार
तीन प्राइवेट अस्पतालों में भटकने के बाद उन्हें किसी तरह कुमारस्वामी लेआउट के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां शुरु में तबीयत सुधरी लेकिन बाद में जब सेहत में गिरावट आने लगी तो तत्काल उन्हें बीएमसीआरआई में भर्ती कराया। मंजूनाथ के भाई डॉ. नागेंद्र ने कहा कि इलाज के दौरान उनके भाई को फिजियोथेरेपिस्ट की जरूरत थी, लेकिन कोई भी थेरेपिस्ट उनका इलाज करने को राजी नहीं हुआ।

सरकार ने गठित की है ये टीम
बता दें कर्नाटक सरकार द्वारा बेंगलुरु में कोविड बेड आवंटन को सुव्यवस्थित करने के लिए गठित सात विशेष टीमों ने निजी अस्पतालों में कई विसंगतियां पाई हैं, जिसमें सरकार के आदेश (बेड का 50 प्रतिशत आवंटित करने ) का अनुपालन न करना और कथित रूप से गलत डेटा देना भी शामिल है। कर्नाटक सरकार ने 15 जुलाई को सभी अस्पतालों, सरकारी और निजी के लिए अनिवार्य कर दिया था कि वे अपने बेड आवंटन के विवरणों को बताएं और इसे बीबीएमपी डैशबोर्ड पर अपडेट करें। इससे रोगियों के लिए यह पहचानना आसान होगा कि बेड कहां उपलब्ध हैं।

कर्नाटक में एक दिन में पाए गए 3649 कोरोना पॉजिटिव
कर्नाटक में मंगलवार को 3649 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। वहीं बेंगलूरु में 1714 मामले सामने आए हैं। वहीं बुधवार को एक दिन में सबसे ज्यादा 4,764 लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले सामने आए। इसके साथ संक्रमित लोगों की कुल संख्या 75,833 पहुंच गई। वहीं मृतकों का आंकड़ा 1,519 हो गया है। इसके साथ ही 1,780 मरीज रिकवरी कर स्वस्थ भी हो गए। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अब कुल 75,833 COVID-19 पॉजिटिव केस हैं, जिसमें 1,519 मौतें और 27,239 डिस्चार्ज शामिल हैं।












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