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Bengaluru में बैंक के डिप्टी मैनेजर ने कस्‍टमर्स के लॉकर से चुराया ₹3.5 करोड़ का सोना, आखिर कैसे हुआ ये संभव?

Bengaluru Bank News: कर्नाटक की राजनधाीन बेंगलुरु से एक हैरान करने वाली वारदात सामने आई है। एक बैंक के डिप्‍टी मैनेजर ने ही कस्‍टमर्स ने सोने के गहनों का सफाया कर चूना लगा दिया है। इस डिप्‍टी मैनेजर ने ऑनलाइन गेमिंग के चक्‍कर में फंस कर इस वारदात को अंजाम दिया है। ग्राहकों के सोने के आभूषणों के दुरुपयोग और अवैध रूप से गिरवी रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

इस मामले के बाद बैंक के कस्‍टमर्स दहशत में हैं और ये सवाल उठ रहा है क्‍या बैंक के लॉकर में रखे गहने और अन्‍य दस्‍तावेज सुरक्षित नहीं है? आइए जानते हैं क्‍या है पूरा मामला, आखिर कैसे होती है बैंक के लॉकर की सुरक्षा और नियम क्‍या है। साथ ही जानते हैं कि क्‍या 100 फीसदी हमारे लॉकर में रखा सामान सुरक्षित है या नहीं?

Bengaluru Bank News

₹3.5 करोड़ के सोने के गहनों की चोरी की पोल कैसे खुली?

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार डिप्‍टी मैनेजर ने ग्राहकों का कुल 2,780 ग्राम सोना जिसकी कीमत ₹3.5 करोड़ है, चुराया है। पीटीआई के अनुसार, इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब बैंक के मुख्य प्रबंधक ने 5 फरवरी को बेंगलुरु के गिरीनगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की।

क्‍यों डिप्‍टी मैनेजर ने चोरी किए लॉकर से कस्‍टमर्स के गहने?

पुलिस ने शिकायत का हवाला देते हुए बताया कि आरोपी ने उच्च अधिकारियों को सूचित किए बिना बैंक लॉकरों से 2,780 ग्राम सोने के ग्राहक आभूषण हटाए और उन्हें एक फाइनेंस कंपनी के पास गिरवी रख दिया था। जांच में पता चला कि इस धोखाधड़ी से मिले पैसों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टेबाजी में किया गया हो सकता है।

डिप्‍टी मैनेजर के पास से बरामद हुआ 700 ग्राम सोना

दक्षिण बेंगलुरु के पुलिस उपायुक्त लोकेश बी जगलासर ने बताया, "आरोपी उप-बैंक प्रबंधक को गिरफ्तार किया गया है। हम सोना बरामद करने का प्रयास कर रहे हैं और अब तक लगभग 700 ग्राम सोना बरामद हुआ है।" जगलासर ने आगे कहा, "हमें फाइनेंस कंपनियों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा। हम अदालत जाएंगे और उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करेंगे।" उन्होंने बताया कि जांच जारी है।

क्‍या इतना आसान है कस्‍टमर के लॉकर से गहने चुराना?

हालांकि इस डिप्‍टी मैनेजर ने कैसे कस्‍टर्स के लॉकर से कैसे गहने चुराए इसको लेकर बैंक ने चुप्‍पी साध रखी है।दरअसल, बैंक डिप्टी मैनेजर का काम ग्राहकों के लॉकर की सुरक्षा करना होता है और लॉकर से गहने चोरी करना गंभीर अपराध है। ऐसी घटना केवल तब संभव हो सकती है जब सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हो, जैसे डुअल-की सिस्टम या रिकॉर्ड में गड़बड़ी, लेकिन बैंकों में सीसीटीवी, एक्सेस लॉग और ऑडिट जैसी सख्त सुरक्षा व्यवस्था होती है।

बैंक लॉकर की सुरक्षा कैसे होती है?

बैंक के लॉकर में गहनों की सुरक्षा कई स्तरों (multi-layer security) पर आधारित होती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि सुरक्षा कैसी होती है और रूटीन (रूट) प्रक्रिया क्या होती है

डबल लॉक सिस्टम (Dual Control System)
लॉकर खोलने के लिए दो चाबियों की जरूरत होती है-

एक ग्राहक के पास

एक बैंक के पास
दोनों के बिना लॉकर नहीं खुलता।

सीसीटीवी निगरानी

बैंक परिसर, लॉकर रूम के बाहर तक कैमरे लगे होते हैं। (लॉकर के अंदर प्राइवेसी के कारण कैमरा नहीं होता)

बायोमेट्रिक/सिग्नेचर वेरिफिकेशन
लॉकर एक्सेस से पहले ग्राहक की पहचान-सिग्नेचर, आईडी, या बायोमेट्रिक से की जाती है।

स्ट्रॉन्ग रूम (Strong Room)
लॉकर एक मोटे, फायर-प्रूफ और हाई-सिक्योरिटी कमरे में होते हैं, जिसे तोड़ना आसान नहीं होता।

एंट्री रजिस्टर / डिजिटल लॉग
कौन ग्राहक कब आया, लॉकर कब खोला गया-इसका रिकॉर्ड रखा जाता है।

लॉकर एक्सेस की रूटीन प्रक्रिया (Routine Process)

ग्राहक बैंक में आता है और लॉकर एक्सेस का अनुरोध करता है।

बैंक कर्मचारी पहचान सत्यापित करता है।

लॉकर रजिस्टर/सिस्टम में एंट्री की जाती है।

कर्मचारी अपनी मास्टर चाबी लगाता है।

ग्राहक अपनी चाबी लगाकर लॉकर खोलता है।

ग्राहक को प्राइवेसी के लिए अकेला छोड़ा जाता है।

काम पूरा होने पर लॉकर बंद कर एंट्री दर्ज की जाती है।क्या बैंक लॉकर 100% सुरक्षित होते हैं?

पूरी तरह 100% गारंटी नहीं होती।
Reserve Bank of India के नियमों के अनुसार बैंक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होते हैं। यदि बैंक की लापरवाही से नुकसान हो, तो मुआवज़ा देना पड़ सकता है। आमतौर पर लॉकर में रखे सामान का बीमा अलग से कराना पड़ता है।

अगर आपको संदेह है कि लॉकर से चोरी हुई है तो क्या करें?

तुरंत बैंक शाखा प्रबंधक को लिखित शिकायत दें।

बैंक की उच्च प्रबंधन टीम/हेड ऑफिस को सूचित करें।

पुलिस में FIR दर्ज कराएं।

Reserve Bank of India की बैंकिंग लोकपाल (Banking Ombudsman) योजना के तहत शिकायत दर्ज करें।

जरूरत पड़े तो उपभोक्ता फोरम/अदालत में मामला दर्ज करें।

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