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LPG संकट में बेंगलुरु ऑटो चालकों की कमाई हुई ठप, IOC की सलाह से क्यों नाराज़ हैं ऑटो ड्राइवर?

Bengaluru LPG crisis: बेंगलुरु में इन दिनों ऑटो-रिक्शा चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऑटो LPG की कमी इतनी गंभीर हो गई है कि हजारों चालकों का रोज़गार प्रभावित हो रहा है। हालत ये है कि लंबी कतारों में घंटों खड़े रहने के बावजूद उन्हें गैस नहीं मिल पा रही। हालात दिन-ब-दिन मुश्किल होते जा रहे हैं। इस संकट की वजह वैश्विक स्तर पर आई ऊर्जा आपूर्ति में बाधाएं हैं-खासतौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर सीधा भारत तक पहुंचा है।

वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने से एलपीजी की उपलब्धता पहले ही कम थी, ऊपर से बेंगलुरु में करीब 80% निजी ऑटो एलपीजी स्टेशन बंद पड़े हैं। नतीजा-जो कुछ गिने-चुने सरकारी (PSU) स्टेशन खुले हैं, वहीं पर भारी भीड़ उमड़ रही है और इंतज़ार कई घंटों तक खिंच रहा है।

Bengaluru auto

कीमतों का खेल भी बना वजह

चालक निजी स्टेशनों से दूरी बना रहे हैं क्योंकि वहां एलपीजी ₹99 से ₹105 प्रति लीटर मिल रही है, जबकि PSU स्टेशनों पर यही कीमत करीब ₹89.5 है। सस्ता ईंधन पाने की कोशिश में सभी एक ही जगह पहुंच रहे हैं, जिससे दबाव और बढ़ रहा है।

IOC ने दी सलाह- फिलहाल पेट्रोल पर चलो

Indian Oil Corporation (IOC) ने चालकों को अस्थायी तौर पर पेट्रोल इस्तेमाल करने की सलाह दी है। अच्छी बात ये है कि शहर के ज़्यादातर ऑटो ड्यूल-फ्यूल (LPG/पेट्रोल) सिस्टम से लैस हैं, जिससे ये बदलाव संभव है। कंपनी का कहना है कि इससे चालकों को लंबी लाइनों से राहत मिल सकती है और उनका काम नहीं रुकेगा।

कमाई पर सीधा असर

लेकिन हकीकत ये है कि इस संकट ने चालकों की कमाई पर गहरा असर डाला है। घंटों लाइन में लगने से उनका काम का समय कम हो रहा है। कई चालकों का कहना है कि अब EMI, किराया और बच्चों की फीस भरना भी मुश्किल हो गया है।

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सड़कों पर उतरने की कर रहे तैयारी

ऑटो-रिक्शा यूनियन अब चुप बैठने के मूड में नहीं हैं। वे विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं और सरकार को ज्ञापन सौंपेंगे। उनकी मांगें साफ हैं-हर दिन पर्याप्त एलपीजी सप्लाई, सभी स्टेशनों पर बेहतर उपलब्धता और CNG जैसे विकल्पों पर शिफ्ट होने के लिए सरकारी मदद।

क्या है आगे का रास्ता?

IOC का कहना है कि सप्लाई सुधारने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर और डिस्ट्रीब्यूशन की सीमाएं अभी भी चुनौती बनी हुई हैं। फिलहाल पेट्रोल पर शिफ्ट को ही शॉर्ट-टर्म समाधान बताया जा रहा है, लेकिन चालक स्थायी और भरोसेमंद विकल्प चाहते हैं-ताकि उनकी रोज़ी-रोटी सुरक्षित रह सके।

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