Bengal SIR Row: संविधान सजाने वाले नंदलाल बोस के परिवार का नाम वोटर लिस्ट से गायब, बंगाल में छिड़ी बहस
Bengal Voter List SIR Row: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होनी हैं लेकिन राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR और वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
पहले चल रही मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया अब एक बड़े विवाद के केंद्र में है। इस बार मामला किसी साधारण नागरिक का नहीं, बल्कि भारत के महान चित्रकार और भारतीय संविधान की मूल प्रति को अपनी कला से सजाने वाले नंदलाल बोस के परिवार का है।

शांतिनिकेतन में रहने वाले नंदलाल बोस के पोते, 88 वर्षीय सुप्रबुद्ध सेन और उनकी 82 वर्षीया पत्नी दीपा सेन का नाम मतदाता सूची से गायब पाया गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि सभी वैध दस्तावेज जमा करने और चुनाव अधिकारियों की व्यक्तिगत जांच के बावजूद, इस बुजुर्ग दंपत्ति को मताधिकार से वंचित कर दिया गया है।
पेंशन रिकॉर्ड और पासपोर्ट भी पड़े कम, 'पेंडिंग' कैटेगरी ने छीना वोटिंग का हक
सुप्रबुद्ध सेन, जो नंदलाल बोस की छोटी बेटी जमुना सेन के पुत्र हैं, ने अपनी आपबीती सुनाते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सेन दंपत्ति ने चुनाव अधिकारियों के सामने पासपोर्ट, पेंशन रिकॉर्ड, रोजगार के कागजात और शैक्षणिक प्रमाण पत्र जैसे सभी पुख्ता सबूत पेश किए थे।
सुप्रबुद्ध सेन ने मीडिया से बातचीत में बताया कि चुनाव आयोग के अधिकारी उनके घर भी आए थे और उन्होंने मांगी गई हर जानकारी उपलब्ध कराई थी। इसके बावजूद अंतिम सूची से उनका नाम हटा दिया गया। केवल सेन दंपत्ति ही नहीं, बल्कि पिछले 52 सालों से उनके साथ रह रहे चक्रधर नायक का नाम भी वोटर लिस्ट से नदारद है।
सुप्रबुद्ध सेन ने कहा कि-मैंने जीवन में कई बार वोट डाला है, इसलिए नाम कटने का निजी अफसोस नहीं है। लेकिन बिना किसी ठोस कारण के एक नागरिक का हक छीन लेना समझ से परे है। अब मैं वोट नहीं डालूंगा।
Who Is Suprabuddha Sen: कौन हैं सुप्रबुद्ध सेन जिनता वोटर लिस्ट से कटा नाम?
सुप्रबुद्ध सेन का व्यक्तित्व और इतिहास शांतिनिकेतन की मिट्टी से जुड़ा है। उन्होंने 1954 में विश्व-भारती विश्वविद्यालय के पाठ भवन से शिक्षा ली और जाधवपुर यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। वे दामोदर वैली कॉर्पोरेशन (DVC) में इंजीनियर रहे और 32 साल की सेवा के बाद 1996 में सेवानिवृत्त होकर स्थायी रूप से शांतिनिकेतन बस गए। वे उस नंदलाल बोस के वंशज हैं जिन्हें जवाहरलाल नेहरू ने भारतीय संविधान की मूल पांडुलिपि को चित्रों से सजाने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
SIR प्रक्रिया वोटर लिस्ट से 45% नाम हटने से राज्य में हड़कंप
पश्चिम बंगाल में चल रही 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया के तहत अब तक छह सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी की जा चुकी हैं। लगभग 50 लाख नामों की गहन जांच की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जांच किए गए नामों में से करीब 45 प्रतिशत नाम हटा दिए गए हैं। श्रीनिकेतन की बीडीओ (BDO) अर्पिता चौधरी ने इस मामले पर कहा कि नाम हटने के सटीक कारणों की जानकारी फिलहाल स्पष्ट नहीं है। उन्होंने प्रभावित लोगों को ट्रिब्यूनल जाने की सलाह दी है।
संविधान की मर्यादा को चित्रों में उकेरने वाले परिवार के साथ हुए इस व्यवहार ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों का आरोप है कि 'SIR' के नाम पर वास्तविक मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। शांतिनिकेतन के स्थानीय निवासियों में भी इस बात को लेकर गहरा रोष है कि इतने प्रतिष्ठित परिवार को अपनी नागरिकता और पहचान सिद्ध करने के बाद भी सूची से बाहर कर दिया गया।












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