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Bengal Election: कोलकाता में CEC ज्ञानेश कुमार का दौरा, कालीघाट मंदिर में पूजा के दौरान लगे ‘गो बैक’ के नारे

Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। राज्य में चुनाव तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को आज, 9 मार्च को कोलकाता में भारी विरोध का सामना करना पड़ा।

सोमवार सुबह CEC ज्ञानेश कुमार ने कोलकाता के ऐतिहासिक कालीघाट मंदिर में पूजा-अर्चना की। उनके साथ पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों ने उन्हें काले झंडे दिखाए।

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CEC Gyanesh Kuma का मंदिर में पूजा और शांति का संकल्प

कालीघाट मंदिर से बाहर निकलने के बाद ज्ञानेश कुमार ने बंगाल की जनता का अभिवादन किया। उन्होंने कहा-पश्चिम बंगाल के सभी भाइयों और बहनों को मेरा प्रणाम। माँ काली का आशीर्वाद सब पर बना रहे। जय भारत, जय हिंद। हमने प्रार्थना की है कि आने वाले चुनाव पूरी तरह से शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हों। विशेष रोल ऑब्जर्वर सुब्रत गुप्ता ने भी मंदिर में दर्शन किए और कहा कि आयोग की प्राथमिकता राज्य में भयमुक्त चुनावी वातावरण तैयार करना है।

Kalighat Temple Visit के दौरान काले झंडे और 'गो बैक' के नारे

हालांकि, ज्ञानेश कुमार का यह दौरा विवादों से अछूता नहीं रहा। कालीघाट मंदिर के बाहर और उनके होटल के पास बड़ी संख्या में लोगों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाथ में तख्तियां ले रखी थीं और 'लोकतंत्र के हत्यारे, ज्ञानेश कुमार वापस जाओ' (Go back Gyanesh Kumar, murderer of democracy) जैसे नारे लगाए। काले झंडे दिखाए जाने और विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए CEC ज्ञानेश कुमार ने बेहद शांत लहजे में कहा, लोकतंत्र में हर किसी को विरोध करने का अधिकार है। यह लोकतंत्र की खूबसूरती है।

चुनाव आयोग का 'मिशन बंगाल': 3 दिनों का फुल शेड्यूल

निर्वाचन आयोग की बेंच 8 मार्च से 10 मार्च तक कोलकाता के प्रवास पर है। इस दौरान बैठकों का दौर जारी रहेगा। आज सुबह 10 बजे से चुनाव आयोग 8 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मिल रहा है। प्रत्येक दल को अपनी बात रखने के लिए 15 मिनट का समय दिया गया है। आज शाम को जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ राज्य की कानून-व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी।

60 लाख वोटरों पर सस्पेंस के साथ चुनाव की तारीखों का इंतजार

पश्चिम बंगाल में इस बार सबसे बड़ा विवाद मतदाता सूची को लेकर है। हाल ही में पूरी हुई एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के बाद लगभग 60 लाख मतदाताओं का नाम न्यायिक जांच (Judicial Adjudication) के अधीन है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि यह वैध मतदाताओं को हटाने की साजिश है।

इसी सिलसिले में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि एक 'सप्लीमेंट्री लिस्ट' जारी की जाएगी जिसमें उन नामों को शामिल किया जाएगा जिन्हें न्यायिक अधिकारियों ने हरी झंडी दे दी है। माना जा रहा है कि 10 मार्च को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बाद चुनाव आयोग दिल्ली लौट जाएगा और उसके तुरंत बाद पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों (असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी) के चुनावी शंखनाद की संभावना है। ज्ञानेश कुमार के लिए बंगाल में शांतिपूर्ण चुनाव कराना एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाली है।

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