Bengal Chunav 2026: अमित शाह का बंगाल दौरा, कोलकाता से दिल्ली तक बन रहा ममता का किला ढहाने का प्लान
Bengal Chunav 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पश्चिम बंगाल दौरे के कुछ ही दिनों बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 29 दिसंबर से दो दिवसीय दौरे पर कोलकाता पहुंचेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर बवाल चल रहा है। SIR लागू होने के बाद अमित शाह का यह बंगाल का पहला दौरा होगा। इस दौरान वह पार्टी पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक भी करेंगे।
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह 29 दिसंबर की देर रात कोलकाता पहुंचेंगे। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, 30 और 31 दिसंबर को पार्टी के पदाधिकारियों और चुनिंदा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए चुनावी रणनीति, संगठन की स्थिति और SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की काट ढूंढ़ने के लिए रणनीति बनाई जाएगी।

Bengal Chunav 2026: बंगाल दौरे में अमित शाह बनाएंगे रणनीति
- बीजेपी सूत्रों का कहना है कि SIR के तहत मतदाता सूची का ड्राफ्ट पहले ही जारी किया जा चुका है। खास तौर पर मतुआ समुदाय के बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने को लेकर चिंता जताई जा रही है।
- शाह की बैठकें उन मतदाताओं की नाराजगी और चिंताओं को दूर करने पर केंद्रित रहेंगी, जिनके नाम मतदाता सूची से गायब बताए जा रहे हैं।
- सूत्रों के अनुसार, अमित शाह अपने दौरे के दौरान राज्य के वरिष्ठ बीजेपी नेताओं से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में SIR के बाद बने राजनीतिक हालात, जनता की सोच और बीजेपी के आउटरीच प्रोग्राम की प्रभावशीलता की समीक्षा की जाएगी।
Amit Shah के लिए बीजेपी करेगी मेगा बाइक रैली
बंगाल बीजेपी ने अमित शाह के स्वागत के लिए बाइक जुलूस निकालने की योजना बनाई है। बताया जा रहा है कि कोलकाता, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, हावड़ा और हुगली को कवर करने वाले 10 संगठनात्मक जिलों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। हर जिले को करीब 500 बाइक जुटाने का लक्ष्य दिया गया है, जिससे कुल संख्या लगभग 1,500 बाइक तक पहुंच सकती है।
Mamata Banerjee का किला ढहाना अमित शाह के लिए चुनौती
पिछले 11 सालों में अमित शाह ने बंगाल के सबसे ज्यादा दौरे किए हैं। उनके लिए बंगाल में ममता बनर्जी का किला ढहाना सबसे ज्यादा मुश्किल साबित हुआ है। इस बार शाह कोई कसर नहीं छोड़ने वाले हैं और अभी से चुनाव की तैयारियों में लग गए हैं। हालांकि, शाह के दौरे में कोई सार्वजनिक सभा शामिल नहीं है और यह पूरी तरह संगठनात्मक बैठकों तक सीमित रहेगा। बावजूद इसके, पार्टी इसे चुनाव से पहले विजिबिलिटी और संगठन की ताकत दिखाने के मौके के तौर पर देख रही है।












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