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Bengal Election 2026: बंगाल में चुनाव के बाद भी तैनात रहेंगी केंद्रीय फोर्स? EC के फैसले से क्यों मचा बवाल

Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का बिगुल बज चुका है और इसके लिए चुनाव आयोग ने भी किसी भी अनहोनी से बचने के लिए टाइट सिक्योरिटी का इंतजाम कर दिया है। 23 और 29 अप्रैल को होने वाले चुनाव के बाद होने वाली संभावित हिंसा को रोकने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने एक अभूतपूर्व और कड़ा फैसला लिया है।

आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव संपन्न होने और मतों की गिनती (Counting) पूरी होने के बाद भी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 500 कंपनियां राज्य में तैनात रहेंगी। यह निर्णय बंगाल के चुनावी इतिहास में हिंसा की पुरानी घटनाओं और मौजूदा तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए लिया गया है।

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आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 'पोस्ट-पोल' (मतदान के बाद) राज्य में शांति बनी रहे और किसी भी प्रकार की प्रतिशोधात्मक हिंसा न हो।

सुरक्षा का त्रिस्तरीय घेरा: स्ट्रॉन्ग रूम से काउंटिंग सेंटर तक

चुनाव आयोग द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था का कड़ा इंतजाम किया गया है। काउंटिंग और स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा के लिए स्ट्रांग तैयारियां की गई हैं। राज्य में ईवीएम (EVM) की सुरक्षा, स्ट्रॉन्ग रूम की निगहबानी और मतगणना केंद्रों (Counting Centres) के सुचारू संचालन के लिए 200 कंपनियां तैनात की गई हैं।

ये कंपनियां तब तक तैनात रहेंगी जब तक राज्य में गिनती की पूरी प्रक्रिया आधिकारिक रूप से संपन्न नहीं हो जाती। आयोग ने आदेश दिया है कि मतगणना पूरी होने के बाद भी 500 कंपनियां पश्चिम बंगाल में 'लॉ एंड ऑर्डर' बनाए रखने के लिए तैनात रहेंगी। ये कंपनियां अगले आदेश तक राज्य के संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च और गश्त जारी रखेंगी।

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चुनाव आयोग क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा की खबरें आई थीं, जिसे लेकर मामला अदालतों तक भी पहुंचा था। 2026 के चुनाव में भी SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) और ध्रुवीकरण जैसे मुद्दों ने पहले ही माहौल को गरमा दिया है।

हाल ही में मालदा में जजों को बंधक बनाने जैसी घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। बता दें प. बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों 23 और 29 अप्रैल, 2026 में होगा जिसकी मतगणना (Counting) 4 मई, 2026 की जाएगी। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह हिंसा के प्रति 'ज़ीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रहा है।

आयोग नहीं चाहता कि चुनावी प्रक्रिया खत्म होते ही सुरक्षा बलों के हटते ही अराजक तत्व सक्रिय हों। आयोग के इस फैसले का भाजपा ने स्वागत किया है, जिनका तर्क है कि केंद्रीय बलों की मौजूदगी से ही निष्पक्ष चुनाव और सुरक्षित माहौल संभव है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे राज्य के संघीय ढांचे में हस्तक्षेप और 'सुपर राष्ट्रपति शासन' जैसी स्थिति करार दिया है।

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