दूसरी पंक्ति के BRS नेताओं के बाहर होने से कांग्रेस को फायदा कैसे? जानिए
तेलंगाना विधानसभा चुनाव में तीसरी बार जीत दर्ज करने का दावा करने वाली बीआरएस के कुछ नेताओं के बाहर निकलने के बाद पार्टी की हालत पतली हो रही है। बीआरएस की दूसरी पंक्ति के नेताओं के बाहर निकलने का एक प्रमुख कारण मौजूदा विधायकों की उम्मीदवारी का उनका विरोध है। वहीं अब दावा किया जा रहा है कि बीआरएस ने निकाले गए नेता कांग्रेस कर रुख कर रहे हैं।
बीआरएस तेलंगाना विधानसभा चुनाव जीत का हैट्रिक बनाने के दावे के साथ मैदान में उतर रही है। कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी होने के बाद पार्टी के कई नेताओं ने मौजूदा विधायकों का समर्थन करने से इनकार कर दिया। कुछ ने तो पार्टी छोड़ने का भी ऐलान कर दिया। वहीं बीआरएस के कुछ नेताओं ने अब निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया है।

बीआरएस कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी होने के करीब 20 दिन बाद एक नया मोड़ आया जब बीआरएस के कुछ नेताओं ने कांग्रेस में शामिल होने का निर्णय लिया। बीआरएस से नाराजगी के चलते पार्टी में कई बदलावा देखे गए। नलगोंडा, करीमनगर, वारंगल और महबूबनगर जैसे जिलों के साथ-साथ पूर्ववर्ती रंगारेड्डी जिले में दलबदल काफी अधिक हुआ है। दावा किया जा रहा है कि अब बीआरएस के पांच से छह नगरपालिका अध्यक्ष कांग्रेस में शामिल हो सकती है।
इन दावों के बाद बीआरएस अपनी जमीनी पकड़ का विश्लेषण कर सकती है। दरअसल, नगरपालिका अध्यक्ष, सरपंच, मंडल प्रजा परिषद और जिला प्रजा परिषद प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य जैसे दूसरे स्तर के नेता जमीनी स्तर पर चुनाव प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वहीं बीआरएस ने 54 विधानसभाओं के लिए प्रभारियों की पहली सूची जारी की जो पार्टी उम्मीदवारों की जीत प्रशस्त करने की दिशा में कार्य करेंगे। केटी रामा राव ने प्रभारियों से कहा कि वे जनता के बीच जाएं और पिछले 10 वर्षों के दौरान बीआरएस सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों को रेखांकित करते हुए उनसे पार्टी के पक्ष में मतदान का अनुरोध करें। स्वास्थ्य मंत्री टी. हरीश राव ने भी पार्टी नेताओं कई सुझाव दिए हैं।












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