उद्धव ठाकरे से पहले इन मुख्यमंत्रियों की 'बीमारी' भी बन चुकी हैं सुर्खियां

नई दिल्ली, 27 दिसंबर: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे लंबे समय से लोगों के बीच नहीं आए हैं। वह बीमार थे और उनका ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद से वह पूरी तरह से सार्वजनिक जीवन से विलुप्त ही मालूम पड़ रहे हैं। विपक्षी बीजेपी इसे मुद्दा बना रही है। उनके विधानसभा से गायब होने को लेकर सवाल कर रही है। जबकि,सत्ताधारी गठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री ठाकरे के जनता के बीच आने की सिर्फ तारीखें दी जा रही हैं। जाहिर है कि इसकी वजह से कयासबाजियों को मौका मिल रहा है। लेकिन, उद्धव पहले मुख्यमंत्री नहीं हैं, जिनका स्वास्थ्य रहस्य बन गया है, इसकी एक लंबी फेहरिस्त है जिसपर हम यह बात करने वाले हैं।

1 नवंबर के बाद से नहीं दिखे हैं उद्धव ठाकरे

1 नवंबर के बाद से नहीं दिखे हैं उद्धव ठाकरे

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे 1 नवंबर के बाद से सार्वजनिक तौर पर नहीं दिखाई पड़े हैं। 12 नवंबर को उनकी सर्वाइकल स्पाइन सर्जरी हुई थी। उनकी सेहत में सुधार होने के बाद 2 दिसंबर को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मुख्यमंत्री के कार्यालय से तब यह बताया गया कि उनका स्वास्थ्य ठीक हो रहा है। जबकि,उनका ऑपरेशन हुआ था तो उनके बड़े बेटे और राज्य के पर्यावरण और पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए यूके गए हुए थे। ऑपरेशन के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर कुछ जिम्मेदारियां ऑनलाइन ही निपटाई हैं। जानकारी के मुताबिक ऑपरेशन के बाद पार्टी के नेताओं में राज्यसभा सांसद संजय राउत ही उनसे से निजी तौर पर मिल पाए हैं। मुख्यमंत्री ठाकरे ने 17 नवंबर को अपने पिता बालासाहेब ठाकरे के सम्मरण समारोह में भी शिरकत नहीं की थी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री भी मुंबई गई थीं तो शरद पवार और आदित्य ठाकरे से ही मिलकर लौट आईं।

विपक्ष उद्धव के स्वास्थ्य को लेकर उठा रहा है सवाल

विपक्ष उद्धव के स्वास्थ्य को लेकर उठा रहा है सवाल

22 दिसंबर से शुरू हुए महाराष्ट्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र से 5 दिन पहले वे नरीमन पॉइंट स्थित विधानसभा जरूर गए थे, जिसे सत्र से पहले एक मॉक ड्रिल की तरह बताया गया। जानकारी के मुताबिक वे विधानसभा स्थित अपने चैंबर में भी गए, अपनी कुर्सी पर बैठे भी, लेकिन विधानसभा सत्र में उपस्थित नहीं हुए। 22 दिसंबर को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने उनके स्वास्थ्य पर अपडेट मांगा और कहा कि मुख्यमंत्री 45 दिनों से जनता के सामने नहीं आए हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसी अटकलें हैं कि रश्मि वहिनी (रश्मि ठाकरे, उद्धव ठाकरे की पत्नी) जल्दी ही मुख्यमंत्री बनेंगी। यह कितना सच है?' इसपर उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने साफ किया कि सीएम फिट और स्वस्थ हैं- 'वह जल्द ही सत्र में उपस्थित होंगे।' संजय राउत भी बोले कि ठाकरे तेजी से ठीक हो रहे हैं। उन्होंने कहा- 'वह टहलते हैं। सबसे बड़ी बात है कि वह काम कर सकते हैं। वह फाइलें साइन कर रहे हैं।' लेकिन, सच्चाई ये है कि आज तक मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाई पड़े हैं।

इस मुख्यमंत्री को थी नींद की बीमारी!

इस मुख्यमंत्री को थी नींद की बीमारी!

मुख्यमंत्रियों की बीमारी का किस्सा कोई नया नहीं है। मध्य प्रदेश में तो इसकी वजह से एक सीएम की छुट्टी तक हो चुकी है। बात आपातकाल के बाद की है। 1977 का चुनाव जीतकर कैलाश जोशी मुख्यमंत्री बनाए गए। लेकिन, उनके सोने के किस्से सुर्खियां बनने लगीं। कहा जाता है कि किसी खास बीमारी के चलते मुख्यमंत्री जोशी हमेशा सोते रहते थे। एकबार तो उन्होंने प्रधानमंत्री के दौरे को इसलिए मिस कर दिया क्योंकि उनकी नींद ही नहीं खुली। एक बंदे ने तो अखबार की कटिंग के साथ हाई कोर्ट में उन्हें अनफिट कहकर हटाने के लिए याचिका तक दायर कर दी थी। खुद जोशी कहते थे कि उनपर किसी ने जादू-टोना कर दिया है। आखिरकार इसी के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ गया। कहा जाता है कि कुर्सी जाने के बाद वह स्वस्थ हो गए।

इस सीएम को थी भूलने की बीमारी!

इस सीएम को थी भूलने की बीमारी!

90 के दशक के अंत में उत्तर प्रदेश को 19वें मुख्यमंत्री के रूप में 76 वर्षीय राम प्रकाश गुप्ता मिले। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्हें भूलने की बीमारी थी। उनकी यह बीमारी खूब मशहूर हुई और उनके कैबिनेट के सदस्य भी इसके बारे में बोलने लगे। वे 12 नवंबर, 1999 से 28 अक्टूबर 2000 तक यानी 11 महीने तक सीएम की कुर्सी पर रहे और 90 से ज्यादा मंत्रियों वाले विशाल मंत्रिपरिषद को संभालने का काम किया। उनके एक मंत्रिमंडलीय सहयोगी प्रेम प्रकाश सिंह ने इस समस्या के बारे में कहा था कि जब मुख्यमंत्री इतना भुलक्कड़ होगा तो राज्य में कुछ भी हो सकता है। बसपा नेता मायावती ने भी उनपर तंज कसा था कि गुप्ताजी हमेशा भूल जाते हैं कि उन्हें कहना क्या है। बाद में वे मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी बने। (ऊपर की तस्वीर-मध्य प्रदेश गवर्नर हाउस की साइट से)

जयललिता की बीमारी अभी भी रहस्य है!

जयललिता की बीमारी अभी भी रहस्य है!

पांच-पांच बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं जे जयललिता लंबी बीमारी के बाद चल बसीं। 2016 में अपने मुख्यमंत्री के आखिरी कार्यकाल में निधन से पहले वह काफी गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती रहीं। हालांकि,उन्हें दिल का दौरा भी पड़ चुका था। लेकिन, आखिरी बार उन्हें क्या बीमारी थी, इस रहस्य पर से अभी तक पर्दा नहीं उठा है। उनके बीमार होने को लेकर कई तरह की अटकलें चलती रही हैं। 5 दिसंबर, 2016 को उनका निधन हो गया,लेकिन मौत की असली वजह से आज भी पर्दा नहीं हटा है। इसको लेकर एक मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पड़ा हुआ है।

ज्योति बसु को बीमारी के चलते छोड़नी पड़ी कुर्सी

ज्योति बसु को बीमारी के चलते छोड़नी पड़ी कुर्सी

सिक्किम में पवन कुमार चामलिंग से पहले देश में सबसे ज्यादा दिनों तक मुख्यमंत्री पद पर रहने का रिकॉर्ड पश्चिम बंगाल के पूर्व सीएम ज्योति बसु के पास था। वह जब तक स्वस्थ रहे, लेफ्ट फ्रंट के सबसे कद्दावर और पार्टी की सत्ता के निर्विवाद नेता था। केंद्र में जब तीसरे मोर्चे की सरकार बन रही थी तो उनके पास प्रधानमंत्री बनने का मौका था,लेकिन उन्होंने तब इस ऑफर को ठुकरा दिया था। हालांकि, बाद में शायद उन्हें अपने फैसले का मलला रह गया था। 1977 से मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के बाद साल 2000 आते-आते उनकी उम्र 85 साल के करीब हो चली थी। तब स्वास्थ्य ने उनका साथ देना छोड़ दिया। विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया और आखिरकार उन्होंने कुर्सी छोड़ दी। 17 जनवरी, 2010 को 95 साल की अवस्था में वे चल बसे।

जब नवीन पटनायक के बीमार होने की खबरें आईं

जब नवीन पटनायक के बीमार होने की खबरें आईं

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने दो दशकों से भी लंबे कार्यकाल में अपनी छवि शांति भाव से काम करते रहने वाले राजनेता की बनाई है। वह बेवजह के राजनीतिक बयानों से भी खुद को दूर रहते हैं। 2000 से कुर्सी संभालने के बाद 2019 तक तो सबकुछ ठीक चला, लेकिन अचानक उनकी बीमारी की खबरें आने लगीं। यहां तक कहा जाने लगा कि वह अपनी बहन गीता मेहता को राजनीतिक विरासत सौंप सकते हैं। मजबूर होकर पटनायक खुद मीडिया के सामने आए और सारे कयासों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने एक्सरसाइज करते हुए वीडियो और तस्वीर शेयर करके भी खुद को तंदरुस्त बताया और आरोप लगाया कि एक बीजेपी नेता ने उनके अस्वस्थ होने की अफवाह उड़ाई है।

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