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अजीत पवार से पहले भाजपा में डुबकी लगाकर पवित्र हो चुके हैं बड़े-बड़े दागी

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बेंगलुरु। महाराष्‍ट्र में भले ही अब देवेन्‍द्र फडणवीस के इस्‍तीफा देने के बाद सरकार गिर चुकी हैं। लेकिन सोमवार को सीएम पद पर रहते हुए उपमुख्‍यमंत्री बने अजित पवार को सिंचाई घोटाले में बड़ी राहत देकर भाजपा ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि भाजपा वो गंगा है जिसमें समाहित होते ही सारे पाप धुल जाते हैं।

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बता दें पिछले एक माह से महाराष्‍ट्र सरकार के गठन को लेकर चल रहे नाटक में पिछले शनिवार को एनसपी नेता अजित पवार के सहयोग से भाजपा ने सरकार का गठन करने का ऐलान कर सबको चौंका दिया था। जिसमें सीएम देवेन्‍द्र फडणवीस बने थे और डिप्‍टी सीएम पद की शपथ ली। जिसके बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने इस सरकार गठन में एनसीपी का कोई भी योगदान न होने की बात की। जिसके बाद मामला कोर्ट पहुंचा गया और फ्लोर टेस्‍ट से पहले ही बहुमत न जुटा पाने के कारण सीएम बने देवेन्‍द्र और उपमुख्‍यमंत्री बने अजित पवार ने मंगलवार को इस्‍तीफा दे दिया और सरकार गिर गई।

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लेकिन सोमवार को सरकार बचाने की एक और कोशिश में सीएम पद पर रहते हुए फडणवीस ने सिंचाई घोटाले में संलिप्‍त अजित पवार को बड़ी राहत दे दी। अजीत पवार के खिलाफ सिंचाई घोटाले के 9 मामलों को बंद कर दिया गया। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) सिंचाई घोटाले से संबंधित 3000 प्रोजेक्ट्स जांच के घेरे में हैं और इनमें से 9 मामलों को सबूतों के अभाव में बंद कर दिया गया। बताया गया कि अभी तक जिन टेंडर की जांच की गई है,उनमें एसीबी को अजित पवार के खिलाफ कुछ भी नहीं मिला है। जबकि 2014 में चुनाव प्रचार के दौरान फडणवीस ने इसी घोटाले में शामिल अजित पवार को जेल में चक्की पिसवाने की बात की थी। यह पहली बार नहीं हुआ है इससे पहले भी भाजपा का हाथ थामने वाले कई दागी नेताओं के पाप ऐसे ही धुलते रहे हैं।

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भाजपा के इतिहास पर नजर डाले तो अब यह उनके कल्चर का ये हिस्सा हो चुका है जबकि मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का मूल मंत्र है 'न खाउंगा न खाने दूंगा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी सरकार ने जो, मुहिम चलाई, उसी का नतीजा है कि पहले 2014 में जनता ने उन्हें बहुमत से जिताया और फिर 2019 में पीएम मोदी को ऐतिहासिक जीत हासिल की।

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लेकिन अब भाजपा की फितरत में कुछ बदलाव सा दिख रहा है गलत लोगों को सजा दिलाने वाली पार्टी की छवि रखने वाली भाजपा बदली हुई नजर आने लगी है। भाजपा के सत्ता में आने के बाद बहुत सारी पार्टियों के दागी नेताओं ने अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा है। इन नेताओं में वह भी हैं, जिन्हें कल तक भाजपा ही भ्रष्ट कहती थी। इन दागी नेताओं में कुछ के खिलाफ मुकद्दमें चल रहे थे तो किसी के खिलाफ ईडी की जांच चल रही थी। कई बड़े-बड़े नेताओं ने भाजपा की गंगा में डुबकी लगाई और कल तक दागी कहे जाने वाले ये नेता पवित्र हो गए हैं।

 2017 में यूपी में भाजपा में शामिल हुए बुक्कल नवाब

2017 में यूपी में भाजपा में शामिल हुए बुक्कल नवाब


उत्तर प्रदेश में बुक्कल नवाब ने अगस्‍त 2017 में समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ भाजपा का हाथ थाम थम लिया था। ये वो ही ही बुक्कल नवाब हैं, जिनकी किसी वक्त में सपा में तूती बोलती थी। जब तक वह समाजवादी पार्टी में थे, वह लखनऊ में रिवर फ्रंट मामले में भ्रष्टाचार के आरोपी थे। उन पर आरोप था कि उन्‍होंने अपनी जमीन के बदले गलत तरीके से 8 करोड़ रुपए लिए। लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद उन पर लगे सारे आरोप ये कहते हुए खारिज कर दिए गए कि वह एक राजनीतिक साजिश का शिकार हो रहे थे, जिसके जरिए उनकी छवि को जनता के बीच में धूमिल किए जाने की कोशिश की जा रही थी। भाजपा में शामिल होने के बाद वह हिंदुत्व के एजेंडे से पार्टी को आगे ले जाने की तमाम कोशिशें कर रहे हैं। पार्टी ने उनके लिए जो किया है, उसका अहसान चुकाने के लिए मंदिर दर्शन करने तक पहुंच गया।

2017 में हिमाचल में भाजपा में शामिल हुए चाणक्य सुखराम

2017 में हिमाचल में भाजपा में शामिल हुए चाणक्य सुखराम

अक्टूबर 2017 में हिमाचल प्रदेश की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले सुखराम भाजपा में शामिल हो गए थे। अपने साथ वह अपने बेटे अनिल शर्मा को भी भाजपा ज्वाइन करवाई। सुखराम का नाम दूरसंचार घोटाले में शामिल था। जिसके बाद उन्हें कांग्रेस से निकाल दिया गया था। अब सुखराम के भाजपा में शामिल होते ही उन पर लगे सारे आरोप खत्म से हो गए हैं। यह वहीं भाजपा थी जिसने दूरसंचार घोटाले में शामिल सुखराम मामले पर करीब दो सप्ताह तक संसद नहीं चलने दी थी. भाजपा प्रवक्ता के तौर पर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा दिया- 'सुखराम के खिलाफ मामले बहुत पुराने हैं। जो बीत गई, वह बात गई। कानून अपना काम करेगा।

2019 में भाजपा में शामिल हुए नारायण राणे

2019 में भाजपा में शामिल हुए नारायण राणे

2019 चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए महाराष्‍ट्र के पूर्व मुख्‍यमंत्री नारायाण राणे कांग्रेस के कद्दार नेता थे। सिंतबर 2107 से ही कांग्रेस छोड़ने के बाद महाराष्‍ट्र स्‍वाभिमान पक्ष के नाम से अपनी पार्टी शुरु की थी। वह लंबे समय से भाजपा में आने के चक्कर में थे। शिवसेना में रहते हुए राणे 1999 में महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री थे। राणे की कोंकण क्षेत्र में तगड़ी पकड़ है, विधानसभा चुनाव में फायदा लेने के लिए भाजपा ने उसे अपनी पार्टी में शामिल किया। बता दें नारायण राणे आदर्श घोटाला के आरोपी है। उस दौरान राणे भाजपा-शिवसेना की सरकार में रेवेन्यू मिनिस्टर थे। इस मामले में उन पर मुकदमा भी चल रहा है।

2015 में भाजपा में शामिल हुए हेमंत बिस्‍वा शर्मा

2015 में भाजपा में शामिल हुए हेमंत बिस्‍वा शर्मा

2015 में असम में हेमंत बिस्‍वा शर्मा कांग्रेस का साथ छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे। 2016 में विधानसभा चुनाव होने वाले थे इससे पहले बिस्‍वा शामिल हुए थे। उन्हीं की बदौलत असम में भाजपा की सरकार बनी थी। भाजपा ने भी उनकी मेहनत पर उन्हें स्वास्थ्य मंत्री का पद दिया था। कांग्रेस छोड़ने से कुछ समय पहले 21 जुलाई 2015 को ही भाजपा ने एक बुकलेट जारी की थी। उसमें साफ कहा गया था कि वॉटर सप्लाई स्कैम का प्रमुख संदिग्ध गुवाहाटी डेवलपमेंट डिपार्टमेंट है। इस विभाग केउस समय प्रभारी हेमंत बिस्‍वा शर्मा ही थे. इस प्रोजेक्ट में लुईस बर्जर कंपनी की सेवाओं पर सवाल उठे थे। यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट की जांच में यह खुलासा भी हुआ था कि अमेरिका की बहुराष्ट्रीय कंपनी लुईस बर्जर ने असम के कुछ बड़े अफसरों और नेताओं को घूस खिलाकर ठेका हासिल किया था।

इसे भी पढ़े- महाराष्‍ट्र में अजीत पवार से गलबहियां करने वाले फडणवीस कभी उन्‍हें भिजवाना चाहते थे जेल

महाराष्‍ट्र के इतिहास में फ्लोर टेस्‍ट में कभी नहीं गिरी सरकार, क्या फडणवीस दोहराएंगे अपना इतिहास ? महाराष्‍ट्र के इतिहास में फ्लोर टेस्‍ट में कभी नहीं गिरी सरकार, क्या फडणवीस दोहराएंगे अपना इतिहास ?

English summary
To save the Fadnavis government in Maharashtra, gave a clean chit to Ajit Pawar, trapped in the irrigation scam. Earlier, the tainted leaders involved in the big allegations, who joined the broken BJP from other parties, have got a clean chit. Know who is that leader.
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