सावधान, कहीं आप तो नहीं पी रहे ऐसा दूध, जानें सेहत के लिए ये कितना खतरनाक है

दूध पीने से शरीर हमेशा स्वस्थ और ताकतवर रहता है। इससे शरीर में किसी भी तत्व की कमी नहीं रहती। लेकिन सेहत का सबसे बड़ा श्रोत माना जाने वाला दूध लगातार हानिकारक बनता जा रहा है।

बेंगलुरु। दूध पीने से शरीर हमेशा स्वस्थ और ताकतवर रहता है। इससे शरीर में किसी भी तत्व की कमी नहीं रहती। लेकिन सेहत का सबसे बड़ा श्रोत माना जाने वाला दूध लगातार हानिकारक बनता जा रहा है। हाल ही में दूध के संबंध में आयी एक रिपोर्ट में ऐसा ही डरा देने वाला खुलासा हुआ है। शोधकर्ताओं का दावा है कि बाजार में मिलने वाला खुला दूध ज्यादा हानिकारक हो सकता है।

milk

सेहत का खजाना माने जाने वाले दूध की सेहत को लेकर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। कोई कहता है खुला दूध फायदेमंद होता है तो कोई कहता है कि पैकेट वाला दूध ही सही है। दूध की शुद्धता और उसके गुणों को लेकर चलने वाली बहस बहुत पुरानी है।

खुले में बिक रहे दूध में बढ़ रही एंटीबॉयोटिक की मात्रा

खुले में बिक रहे दूध में बढ़ रही एंटीबॉयोटिक की मात्रा

एंटीबायोटिक्स के बढ़ते दुरुपयोग से खाने-पीने की वस्तुओं में भी दवाओं के अवशेष मिलने का खतरा बढ़ रहा है। एक नए अध्ययन में पता चला है कि बाजार में मिलने वाले खुले दूध में भी एंटीबायोटिक दवाओं की मात्रा लगातार बढ़ रही है। इसका असर पशुओं के स्वास्थ्य, दूध की गुणवत्ता और दूध का सेवन करने वाले लोगों की सेहत पर पड़ सकता है। भारतीय शोधकर्ताओं के एक ताजा अध्ययन में यह दावा किया है।

अध्‍ययन में हुआ ये खुलासा

अध्‍ययन में हुआ ये खुलासा

इस अध्ययन के दौरान गाय के दूध में एजिथ्रोमाइसिन और टेट्रासाइक्लिन नामक एंटीबायोटिक दवाओं के अवशेष सामान्य से अधिक मात्रा में पाए गए हैं। गाय के प्रति लीटर दूध में भी 9708.7 माइक्रोग्राम एजिथ्रोमाइसिन और 5460 माइक्रोग्राम टेट्रासाइक्लिन की मात्रा पाई गई है। इन दवाओं का उपयोग आमतौर पर पशु चिकित्सा में किया जाता है। शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में दोनों एंटीबायोटिक दवाओं की स्थिरता को प्रभावित करने वाले तापमान और पीएच मान के स्तर का भी मूल्यांकन किया है। एंटीबायोटिक दवाओं की अत्यधिक मात्रा गाय की आंतों में पाए जाने वाले बेसिलस सबटिलिस नामक बैक्टीरिया की वृद्धि को बाधित कर सकती है। यह बैक्टीरिया जुगाली करने वाले पशुओं और मनुष्यों की आंतों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। इस बैक्टीरिया की वृद्धि बाधित होने का असर गाय के स्वास्थ्य एवं उसके दूध की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।

यहां पर हुआ अध्‍यन

यहां पर हुआ अध्‍यन

शोधकर्ताओं ने दूध के 13 नमूने कर्नाटक के धारवाड़ के विभिन्न डेयरी फार्म से एकत्रित किए हैं और फिर उनका सूक्ष्मजीव परीक्षण किया गया है। दूध में मौजूद तत्वों का पता लगाने के लिए लिक्विड क्रोमैटोग्राफी विश्लेषण किया गया है। क्रोमैटोग्राफी का उपयोग जटिल मिश्रण में प्रोटीन, न्यूक्लिक एसिड या छोटे अणुओं को अलग करने के लिए किया जाता है।

प्रभावित होती हैं सूक्ष्म जीवों की गतिविधियां

प्रभावित होती हैं सूक्ष्म जीवों की गतिविधियां

एजिथ्रोमाइसिन और टेट्रासाइक्लिन एंटीबायोटिक की स्थिरता का पता लगाने के लिए इन दोनों दवाओं पर तापमान और पीएच मान के प्रभाव का मूल्यांकन किया गया है। एजिथ्रोमाइसिन को 70 से 100 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 24 घंटे रखने पर उसकी स्थिरता एवं सूक्ष्मजीव गतिविधियों में महत्वपूर्ण रूप से कमी देखी गई है। यह प्रक्रिया टेट्रासाइक्लिन पर दोहराए जाने पर उसकी स्थिरता में भी कमी दर्ज की गई है, पर सूक्ष्मजीव गतिविधि में उल्लेखनीय गिरावट नहीं देखी गई।

 खराब हो जाएगी सेहत

खराब हो जाएगी सेहत

दूध में मिले दोनों एंटीबायोटिक्स का उच्च स्तर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि उपभोक्ताओं के लिए दूध और उससे बने उत्पादों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कार्रवाई से एंटीबायोटिक दवाओं की स्थिरता को कम किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि एंटीबायोटिक्स अवशेषों के लिए दूध की स्क्रीनिंग से पहले इसे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की सख्त आवश्यकता होती है क्योंकि यह खाद्य श्रृंखला के अवशिष्ट संदूषण के खतरे को कम करने में मदद करेगा।

इसे भी पढ़े- देशभर में दूध पर किए गए सर्वे, नतीजे आपके होश उड़ा देंगे

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+