खून के आंसू पीते गांधी की वाल्मिकी बस्ती वाले
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) राजधानी के मंदिर मार्ग पर बसी हुई वाल्मिकी बस्ती का अपना पुराना इतिहास है। इधर ही एक दौर में बापू रहते थे। इधर ही कुछ माह पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता अभियान की शुरूआत की थी। तब यहां के वाशिंदे बड़े प्रसन्न थे।

पर रामपुर में वाल्मिकियों के अपनी बस्ती बचाने के लिए इस्लाम धर्म स्वीकार करने के कारण यहां के लोग बहुत दुखी और परेशान हैं। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा कि क्या किया जाए। वे खून के आंसू पी रहे हैं।
रामपुर के दलित इस्लाम स्वीकार करेंगे तो बचेंगे उनके घर
सौंवे दर्जें का इंसान
रामपुर के हालातों पर ओम प्रकाश बड़ी मुश्किल से बोलते हैं। कहते हैं, हम लोगों का दर्द सुनने वालों कोई नहीं है। हमें पहले भी अनादर झेलना पड़ता था। अब झेलना पड़ रहा है। हमें सौवें दर्जे का भी इंसान नहीं माना जाता। उनके दादा यूपी के बुलंदशहर से इधर आकर बसे थे। उनके पिता को यहां पर बापू ने अंग्रेजी पढ़ाई थी। वे हाल ही में सरकारी नौकरी से रिटायर हुए हैं।
वाल्मिकी मंदिर भी
यहां पर ही वाल्मिकी मंदिर भी है। कुछ लोग वहां पर आ जा रहे हैं। रवि राम करीब के सरकारी अस्पताल में नौकरी करते हैं। वे वाल्मिकी समाज से जुड़े हैं। वे भी ओम प्रकाश की तरह रामुपर में अपने बंधुओं के साथ जो हो रहा है, उससे बेहद आहत है। वे कहते हैं कि हमें कौन पूछता है। जब हमारे भाइयों के पास कोई चारा नहीं बचा तो उन्होंने इस्लाम धर्म से जुड़ने का फैसला लिया। आखिर हमें भी छत चाहिए। वे आजम खान से लेकर मायावती सबको कोसते हैं।
स्वच्छता अभियान
बता दें कि इधर ही पिछली 2 अक्टूबर को नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता अभियान का श्रीगणेश किया था। तब इस बस्ती में सफाई हुई थी। रंग-रोगन हुआ था। स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत इस बाल्मीकि बस्ती से हुई थी। यहां का मंदिर का अपना महत्व है। इस मंदिर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने महत्वपूर्ण 214 दिन गुजारे थे। महात्मा गांधी 1 अप्रैल 1946 से 1 जून 1947 तक यहीं रूके थे। यहीं रहकर उन्होंने तत्कालीन वायसराय लार्ड इरविन को खत भी लिखा था, जिसे गांधी-इरविन समझौते की शुरूआती कड़ी के रूप में जाना जाता है।
इस बस्ती में पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी तथा विश्वनाथ प्रताप सिंह आ चुके हैं । मंदिर मार्ग वाल्मिकी बस्ती से निकलते हुए आप यहां की कुछ औरतें के बीच के संवाद को सुन सकते हैं। वे भी रामपुर के मसले को ही डिस्कस कर रही हैं अपने सिर पर साड़ी का पल्लू संभालते हुए।












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