क्यों बंजारा समाज 'धर्मांतरण' के खिलाफ है ? BJP-RSS का रोल जानिए

महाराष्ट्र के जलगांव में बंजारा समाज का एक विशाल महाकुंभ आयोजित हो रहा है। इसमें धर्मांतरण के खिलाफ एक संकल्प पारित किया गया है। इसके आयोजन में भाजपा-संघ की बड़ी भूमिका है।

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महाराष्ट्र में बीजेपी और आरएसएस बंजारों के एक कार्यक्रम में बहुत ही सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इस कार्यक्रम में भाजपा और संघ के कई दिग्गज नेता जुटे भी हैं और आगे भी पहुंचने वाले हैं। यह महाकुंभ पूरी तरह से एक धार्मिक आयोजन है, जिसमें हिंदुओं के धर्मांतरण के खिलाफ पूरी एकजुटता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, आयोजकों के इरादे पर बंजारा समाज के ही कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं। आइए जानते हैं कि यह किस तरह का धार्मिक महाकुंभ है और इसको लेकर किस तरह की राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं।

'धर्मांतरण नहीं कानून' बनाने का संकल्प पारित

'धर्मांतरण नहीं कानून' बनाने का संकल्प पारित

महाराष्ट्र में बंजारा 'महाकुंभ मेला' में एक प्रस्ताव के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर 'धर्मांतरण नहीं कानून' की मांग को लेकर एक संकल्प पारित किया गया है। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है कि इस महाकुंभ का आयोजन ही पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के समर्थन से हुआ है। इसके आयोजकों में धरम जागरण मंच की सक्रिय भूमिका बताई जा रही है, जो कि संघ से ही जुड़ा एक संगठन है। महाराष्ट्र के जलगांव जिले के गोधरी गांव में चल रहा है यह 5 दिनों का महाकुंभ 30 जनवरी को खत्म हो रहा है। जिस तरीके से संघ और भाजपा इस महाकुंभ में रोल निभा रहा है, उसके चलते कहा जा रहा है कि पूरे देश के बंजारा समाज में भाजपा अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती है।

पूरे देश में 15 करोड़ से अधिक बताई जाती है आबादी

पूरे देश में 15 करोड़ से अधिक बताई जाती है आबादी

पूरे देश में बंजारा या घुमंतू समाज की जनसंख्या 15 करोड़ से भी ज्यादा बताई जाती है। इनमें से ज्यादातर लोग महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में रहते हैं। महाराष्ट्र में इनकी अधिकतर आबादी विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में मिलती है। जहां तक महाराष्ट्र की बात है तो करीब 35 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां इनके वोट काफी मायने रखते हैं। लेकिन, सिर्फ महाराष्ट्र में ही नहीं, कई दूसरे राज्यों में भी इनकी जनसंख्या चुनाव के लिहाज से अहम है और यही वजह है कि इस महाकुंभ में भाजपा और संघ के बड़े नामों को शामिल होते देखा जा रहा है। अलग-अलग राज्यो में बंजारा समाज को कहीं ओबीसी, कहीं अनुसूचित जाति और कहीं अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है।

बीजेपी-आरएसएस के दिग्गज भी हो रहे हैं शामिल

बीजेपी-आरएसएस के दिग्गज भी हो रहे हैं शामिल

जलगांव जिले में हो रहे बंजारा महाकुंभ में आरएसएस के दिग्गज सुरेश 'भैयाजी' जोशी के शामिल होने की चर्चा है। तो बीजेपी की ओर से खुद महाराष्ट्र के डिप्टी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के भी मौजूद रहने की चर्चा है। आयोजक तो यहां तक दावा कर चुके हैं कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे भी समारोह में उपस्थित होने वाले हैं। लेकिन, बीजेपी के इन प्रयासों के बीच और महाकुंभ में धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने की मांग के बीच बंजारा समाज में इस मसले पर मतभेद की बातें भी सामने आ रही हैं। जहां एक तबका खुद को हमेशा से हिंदू मानता है, तो कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें लगता है कि आरएसएस बीजेपी के वोट बैंक को मजबूत करने के लिए 'आदिवासी' इतिहास को तबाह कर रहा है।

क्यों बंजारा समाज 'धर्मांतरण' के खिलाफ है ?

क्यों बंजारा समाज 'धर्मांतरण' के खिलाफ है ?

बंजारा महाकुंभ की शुरुआत में आयोजकों को इसमें 10 लाख लोगों के पहुंचने का अनुमान था। द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस महाकुंभ के उद्घाटन के मौके पर ही बंजारा समाज के एक धार्मिक नेता जीतेंद्र 'महाराज' ने लोगों से कहा था कि ऐसे लोगों और संगठनों से दूर रहें जो , हिंदू समाज में मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक ऐसे संगठनों में BAMCEF (ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनोरिटी कम्युनिटीज एंप्लॉइज फेडरेशन) जैसे संगठन भी शामिल हैं। उन्होंने कहा था, 'गोर बंजारा समुदाय हिंदू धर्म का अविभाज्य अंग है और हम सभी सनातन धर्मी हैं। हमारी अपनी तीज, होली और दिवाली के गीत हैं। क्रिश्चियन मिशनरी हमारे समुदाय पर हमला और हमारे लोगों का धर्मांतरण कर रहे हैं। उनसे सावधान रहें।'

संघ और भाजपा पर आरोप

संघ और भाजपा पर आरोप

लेकिन, बंजारा समाज के ही कुछ नेताओं को इस तरह के कार्यक्रमों पर आपत्ति है और वह इसके लिए आरएसएस की आलोचना कर रहे हैं। उनका तो यहां तक दावा है कि इस समाज के लिए कुंभ का विचार ही अजीब है और यह सब उनपर हिंदू धर्म थोपने के लिए किया जा रहा है, ताकि बीजेपी को फायदा मिल सके। जैसे नागपुर के एक इलेक्ट्रोनिक इंजीनियरिंग के रिटायर्ड प्रोफेसर और भारतीय बंजारा समाज कर्मचारी सेवा संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन सिंह चव्हाण का कहना है, 'वे कर्नाटक, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए कुंभ का आयोजन कर रहे हैं, जो कि हमारे रीति-रिवाजों का हिस्सा नहीं है। इन सभी राज्यों में बंजाराओं की अच्छी-खासी तादाद है।' लेकिन, कुंभ में शामिल बंजारा समाज के लोग इन नेताओं से असहमत हैं और प्रत्येक घरों और कॉलोनियों में देवी-देवताओं की तस्वीरें रखने और पूजा-प्रार्थना में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। इसी कार्यक्रम में वीएचपी के एक नेता विनायकराव देशपांडे ने समाज से कहा है कि आने वाले जनगणना में 'हमारे धर्म' को निश्चित रूप से हिंदू लिखवाएं। (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)


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