बांग्लादेश में फिर सक्रिय हुए भारत-विरोधी जहांगीर आलम चौधरी! किसके दबाव में काम कर रहे हैं मोहम्मद यूनुस?

Bangladesh News: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में भारत-विरोधी रवैए के लिए कुख्यात माने जाने वाले वहां के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल जहांगीर आलम चौधरी फिर से सक्रिय हो गए हैं। बांग्लादेश में प्रमुख सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार ने उन्हें बांग्लादेश के गृह मामलों के विभाग का नया सलाहकार नियुक्त किया है।

जहांगीर आलम चौधरी का इस सदी की शुरुआत में बेगम खालिदा जिया के कार्यकाल के दौरान भारत-विरोधी रवैया देखा गया था, जिसमें से कुछ तो दोनों देशों के राजनयिक संबंधों पर भी असर डालने लगे थे।

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भारत-विरोधी जहांगीर आलम चौधरी को अहम जिम्मेदारी!
जहांगीर आलम को ब्रिगेडियर जनरल (रिटायर्ड) एम सखावत हुसैन की जगह नई जिम्मेदारी दी गई है। भारत-बांग्लादेश के संबंधों पर नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में उनकी भूमिक कैसी रहती है, इसपर निगरानी रखनी पड़ेगी।

क्योंकि, 2001 से लेकर 2006 के बीच जब खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) वहां सत्ता में थी तो आलम की वजह से दोनों देशों के बीच कई बार विवाद की स्थितियां पैदा हुई थीं।

भारत पर लगा चुके हैं बांग्लादेशी अलगाववादियों को संरक्षण देने का आरोप
बीएनपी सरकार के दौरान जहांगीर आलम बांग्लादेश राइफल्स के डीजी हुआ करते थे। अब इसका नाम बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश हो चुका है। खालिदा जिया के शासन के दौरान एक बार इन्होंने भारत पर बांग्लादेश अलगाववादियों के 90 आतंकी कैंपों को संरक्षण देने का आरोप लगा दिया था।

बांग्लादेश में हुए ग्रेनेड हमलों में भी लिया था भारत का नाम
17 अगस्त, 2005 को बांग्लादेश में कई ग्रेनेड हमले हुए थे, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने इसके लिए भी भारत पर दोष मढ़ने की कोशिश की थी। हालांकि, तबके बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने इनका यह कहकर बचाव किया था कि भारतीय मीडिया ने उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया। जबकि, वास्तव में उन्होंने कहा था कि देशव्यापी बम धमाकों में कुछ भारतीय अपराधी शामिल हो सकते हैं।

नियुक्ति के एक दिन बाद ही खोली 2009 वाली फाइल
इस बार भी जिस तरह से नियुक्ति के एक दिन बाद ही जहांगीर आलम चौधरी ने 2009 में बांग्लादेश राइफल्स में हुए विद्रोह की फाइल खोली है, उससे उनके इरादे को लेकर संदेह बढ़ गया है।

भारत के खिलाफ फिर मोर्चा खोलने की आशंका
क्योंकि, जानकारों को लगता है कि इसके लिए वह पूर्व पीएम शेख हसीना और उनके परिवार पर आरोप लगाने की कोशिश करेंगे। शेख हसीना नई सरकार के लगातार निशाने पर हैं और उनपर रोजाना हत्या तक के मामले दर्ज हो रहे हैं।

ऐसे में माना जा रहा है कि वह यह भी दिखाने की कोशिश कर सकते हैं कि 2009 में हुए बांग्लादेश राइफल्स के उस विद्रोह में भी भारत की 'भूमिका' बता सकते हैं। बांग्लादेश राइफल्स के उस विद्रोह में बांग्लादेश आर्मी के कई अफसरों की हत्या हो गई थी।

16 अगस्त को ही मोहम्मद यूनुस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करके बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा का भरोसा दिया था। भारत की चिंता पर उनकी प्रतिक्रिया की सराहना की गई।

लेकिन, जिस तरह से जहांगीर आलम जैसे संदिग्ध लोगों को उनकी अगुवाई वाली सरकार में तरजीह मिल रही है, उससे लगता है कि उनकी अंतरिम सरकार पर जमात के साथ-साथ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी या बेगम खालिदा जिया ने पूरी तरह से दबदबा बना लिया है।

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