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पटाखों पर बैन: विरोध में उठने लगी है आवाज, RSS के संगठन से लेकर DMK तक ने खोला मोर्चा

नई दिल्ली- आरएसएस से जुड़े संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने दीपावली के मौके पर पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाए जाने का विरोध किया है। मंच की ओर से लिखित बयान जारी कर कहा गया है कि दिवाली पर पटाखों पर पाबंदी लगाना सही नहीं है। उधर लोकसभा में डीएमके के नेता टीआर बालू ने भी केंद्र सरकार को खत लिखकर कुछ राज्य सरकारों की ओर से पटाखों पर पाबंदी लगाने के फैसले को आश्चर्यजनक और चौंकाने वाला फैसला करार दिया है और पटाखा उद्योग से जुड़े लोगों को अनुदान देने की मांग की है।

Ban on firecrackers: Voice has started to rise in protest, from RSS organization to DMK opened front

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ी संस्था स्वदेशी जागरण मंच ने पटाखों पर पूरी तरह से बैन करने के फैसले को पूरी तरह से गैर-वाजिब बताया है। मंच की ओर से इसके राष्ट्रीय संयोजक डॉक्टर अश्वनी महाजन ने लिखित बयान जारी कर कहा है कि, 'स्वदेशी जागरण मंच सभी राज्य सरकारों से आग्रह करता है कि दीपावली के मौके पर पटाखों के दुष्प्रभाव के संदर्भ में झूठे प्रोपेगेंडा को दरकिनार कर पटाखों पर पूरी तरह से बैन लगाने का फैसला ना लें।........ कुछ समय से बिना किसी तथ्यात्मक जानकारी के सरकारें दिवाली के अवसर पर सभी प्रकार के पटाखों पर प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई कर रही हैं, जो कि पूरी तरह से अनुचित है...।' उनके मुताबिक पटाखों के चलते जो प्रदूषण होता था, 'मुख्य तौर पर चीन से गैरकानूनी तौर पर आयातित पटाखों के चलते होता था।'

उन्होंने इसके बारे में विस्तार से बताया है कि 'चाइनीज पटाखों में पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर के मिश्रण की वजह से प्रदूषण होता है। जबकि आज भारत में जो ग्रीन (प्रदूषण-रहित) पटाखे बन रहे हैं, उसमें पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर नहीं मिलाया जाता; और एलुमिनियम, लिथियम, आर्सेनिक और मरकरी जैसे प्रदूषक भी बहुत ही कम कर दिए गए हैं।' उनका कहना है कि ग्रीन पटाखों को काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च और नेशनल एन्वायरोमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ने मान्यता दी हुई है। उन्होंने कहा है कि ग्रीन पटाखे 30 फीसदी कम प्रदूषण करते हैं।

महाजन का साफ कहना है कि 'जब भारत सरकार ने चाइनीज पटाखों पर पुख्ता पाबंदी लगा रखी है, ऐसे में दीपावली पर सभी तरह के पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध पूरी तरह से अनुचित है।' यही नहीं स्वदेशी जागरण मंच का कहना है कि पटाखा उद्योग से करीब 10 लाख लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। महाजन के मुताबिक, 'हमें नहीं भूलना चाहिए कि तमिलनाडु (शिवकाशी), पश्चिम बंगाल और देश के कई हिस्सों में करीब 10 लाख लोग पटाखा उद्योग से जुड़े हैं और जिनकी आजीविका ही इसी पर निर्भर है। पूरे साल ये लोग दीपावली पर पटाखा बेचने का इंतजार करते हैं।......ऐसी स्थिति में, ग्रीन पटाखों पर जो कि कम प्रदूषणकारी हैं, बिना किसी वैज्ञानिक आधार के प्रतिबंध लगाना समझदारी नहीं है।।'

Ban on firecrackers: Voice has started to rise in protest, from RSS organization to DMK opened front

उन्होंने मंच की ओर से केंद्र सरकार से भी अनुरोध किया है कि कि वह ग्रीन पटाखों से होने वाले प्रदूषण के प्रभाव की जानकारी नेशनल ग्रीम ट्रिब्यूनल को भी दे। उन्होंने पराली जलाने की समस्या पर चिंता जताई है और कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के इलाके में वायु प्रदूषण का यह सबसे बड़ा कारण है और सरकारी एजेंसियां इस समस्या से निजात पाने में नाकाम रही हैं।

मंच ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया है कि दिवाली पर पटाखे जलाने की परंपरा और लाखों लोगों की आजीविका के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने भी अक्टूबर 2018 में दो घंटे के लिए इसकी इजाजत दी थी। उन्होंने दिल्ली, राजस्थान, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और बाकी राज्यों से दिवाली के मौके पर पटाखों पर पूर्ण पाबंदी लगाने का फैसला बदलने का अनुरोध किया है।

उधर डीएमके सांसद और लोकसभा में पार्टी के नेता सदन टीआर बालू ने केंद्री श्रम मंत्री संतोष गंगवार को खत लिखकर राज्य सरकारों के फैसले पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा है कि 'राजस्थान और दूसरे राज्य सरकार द्वारा पटाखे की बिक्री पर अचानक लगाया गया प्रतिबंध आश्चर्यजनक और चौंकाने वाला है; आपसे अनुरोध है कि श्रमिकों और पटाखा उद्योग की भरपाई के लिए फंड निर्धारित करें।'

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