'बालासोर से निकलते ही लगा तेज झटका, चारों ओर छा गया धुंआ', भयानक हादसे में भी बच गया पूरा परिवार
बंगाल का एक परिवार कोरमंडल एक्सप्रेस में सफर कर रहा था। उनकी किस्मत अच्छी थी कि वो भयानक हादसे में भी सुरक्षित बच निकले।

ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार शाम भयानक हादसा हुआ, जहां तीन ट्रेनें आपस में टकरा गईं। इस घटना में ढाई सौ से ज्यादा लोगों ने जान गंवाई, जबकि 900 से ज्यादा लोग घायल हुए। हालांकि कुछ खुशनसीब लोग ऐसे भी थे, जो हादसे में बच गए। उन्होंने अब अपनी आपबीती सुनाई है।
पश्चिम बंगाल के पुरबा मेदिनीपुर के मालुबासन गांव का एक परिवार भी इस ट्रेन में सफर कर रहा था, लेकिन उनकी किस्मत अच्छी थी। वो इस भयानक हादसे में भी बच निकले। उनको मामूली चोटें आई हैं, लेकिन अस्पताल में नहीं भर्ती होना पड़ा।
मामले में सुब्रतो पाल ने कहा कि वो अपनी पत्नी और बच्चे के साथ खड़गपुर से चेन्नई जा रहे थे। बालासोर स्टेशन तक तो सब ठीक था, लेकिन उसके आगे उन्हें तेज झटका लगा। वो कुछ समझ पाते, तब तक डिब्बे में धुंआ भर गया। उनको कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, बस चारों ओर चीख-पुकार मची थी।
करीब 45 मिनट तक वो डिब्बे में फंसे रहे, तभी कुछ स्थानीय लोग वहां पहुंचे और उनके परिवार को निकाला। उनके बेटे के पैर में मोच आई है, जबकि उनको और उनकी पत्नी को छोटी-मोटी खरोंच लगी। फिर स्पेशल ट्रेन से वो वापस अपने घर लौट आए।
कैसे हुआ हादसा?
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक कोरोमंडल एक्सप्रेस ने शुक्रवार शाम करीब 6.55 बजे बहानगर बाजार स्टेशन को पार करने के बाद मुख्य लाइन के बजाय एक लूप लाइन ले ली, जहां मालगाड़ी खड़ी थी। जिसकी वजह से यह भीषण हादसा हो गया। जब उसके डिब्बे पलटे तो वो दूसरी ओर से आ रही ट्रेन से टकरा गए।
हादसे के वक्त कोरोमंडल की रफ्तार 127 किमी प्रति घंटे थी। मालगाड़ी के बाद उसकी टक्कर यशवंतनगर एक्सप्रेस से हुई। इस वजह से ज्यादा नुकसान हुआ है। फिलहाल वहां पर बचाव अभियान पूरा कर लिया गया है। अब अलग-अलग अस्पतालों में घायलों का इलाज किया जा रहा। साथ ही रूट बहाल करने पर रेलवे का फोकस है।












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